Interest Rate: होम लोन और पर्सनल लोन जैसे कर्ज की EMI कम होने की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। रॉयटर्स के एक ताजा सर्वे के अनुसार, यह दर कम से कम 2027 के मध्य तक मौजूदा स्तर पर ही बनी रह सकती है। इस समय रेपो रेट 5.25% है। 8 अप्रैल को RBI की अगली बैठक है और उससे कोई बड़ी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
पिछले 1 साल से घट रही थीं ब्याज दरें
पिछले एक साल से RBI लगातार दरें घटा रहा था। अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की कोशिश जारी थी। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। ईरान के साथ अमेरिका और इजराइल का युद्ध, बढ़ते कच्चे तेल के दाम, दुनिया भर के बाज़ारों में अफरा-तफरी और महंगाई का डर, इन सब चीज़ों ने RBI को मजबूर किया कि वो थोड़ा रुके और देखे।
घटा GDP अनुमान
Goldman Sachs ने 24 मार्च को अपनी रिपोर्ट में भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटा दिया। पहले 2026 के लिए 7% का अनुमान था, अब वो घटाकर 5.9% कर दिया गया है। यानी युद्ध का असर सिर्फ तेल की कीमतों पर नहीं, बल्कि भारत की तरक्की की रफ्तार पर भी पड़ रहा है।
इकोनॉमी पर दोहरी मार
ANZ Bank के अर्थशास्त्री धीरज निम कहते हैं कि ऊंचे ऑयल प्राइस के साथ युद्ध जैसे हालात अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार करते हैं। एक तरफ ग्रोथ धीमी होती है और दूसरी तरफ महंगाई बढ़ती है। इस स्थिति में RBI न तो बहुत नरम रुख अपना सकता है और न ही बहुत सख्त। फरवरी में भारत की खुदरा महंगाई 3.21% थी जो RBI की 4% की तय सीमा से नीचे है। लेकिन तेल के दाम बढ़ते रहे तो यह आंकड़ा जल्द ही उछाल मार सकता है।
IDFC First Bank की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने साफ कहा कि अगर किसी बाहरी झटके की वजह से महंगाई बढ़ी है तो उसके जवाब में ब्याज दरें बढ़ाना सही नहीं होगा। इससे ग्रोथ को और नुकसान पहुंचेगा। RBI ने पहले ही बॉन्ड खरीदकर बाज़ार में 7.6 लाख करोड़ रुपये की नकदी डाली है और सरकार ने GST की दरें घटाकर खपत बढ़ाने की कोशिश की है। इस सारी मेहनत को अब एक बाहरी झटके की वजह से बर्बाद करना समझदारी नहीं होगी।
क्या करें ग्राहक
पहली बात, EMI कम होने का इंतज़ार न करो, जो लोन ले रखा है उसे समय पर चुकाने पर ध्यान दे। दूसरी बात, बैंक अब कर्ज देने से पहले क्रेडिट प्रोफाइल और भी बारीकी से देखेंगे, इसलिए सिबिल स्कोर दुरुस्त रखें। तीसरी बात, जरूरत से ज़्यादा कर्ज मत लो। ब्याज दर, प्रोसेसिंग चार्ज और प्रीपेमेंट की शर्तें पहले समझो। चौथी बात, अगर बड़ा फैसला करना है तो किसी जानकार वित्तीय सलाहकार से बात करना बेहतर होगा।
दुनिया में जो हो रहा है उसका असर हमारी जेब तक पहुंचता ही है। ईरान में जंग हो, तेल महंगा हो या डॉलर मजबूत हो, इसकी कीमत आखिर में EMI भरने वाला आम इंसान ही चुकाता है। 6 से 8 अप्रैल के बीच मुंबई में RBI की पॉलिसी बैठक होगी।


