Aravalli Mountain Range: अरावली पर्वत श्रृंखला में खनन का मुद्दा मंगलवार को संसद में फिर गर्माया। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने पर्यावरण मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा पर जवाब में कहा कि अशोक गहलोत सरकार के समय अरावली में अवैध खनन होता था। हमने अरावली में अवैध खनन रोका है। हम अरावली के पूरी तरह संरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध है। कांग्रेस सांसदों ने गहलोत सरकार के समय अवैध खनन की बात कहने पर जमकर हंगामा किया। इस दौरान पक्ष-विपक्ष के सांसदों में जमकर तकरार हुई।
हम अरावली पर काम कर रहे है- मंत्री
केंद्रीय मंत्री यादव ने राज्यसभा में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गठित कमेटी के तहत ही हम अरावली पर काम कर रहे हैं। पहाड़ी के बारे में जो मानक तय किए जाते हैं, उसके हिसाब से काम हो रहा है। कोर्ट ने जो निर्णय दिया है, उसमें परिभाषा को लेकर कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईपॉवर कमेटी बनाने की बात कही है, हम उसमें भी सकारात्मक है। यदि इस विषय में न्यायालय को हमारी सरकार से किसी भी प्रकार की सकारात्मक सहायता की आवश्यकता होगी, तो हम पूर्ण सहयोग देने के लिए तैयार हैं। दिल्ली में प्रदूषण को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक्यूआई मानकों को हमने 2015 में लागू किया। 30 से ज्यादा शहरों में आकलन कर रहे हैं। दिल्ली सहित दूसरे शहरों के वायु प्रदूषण को लेकर काम कर रहे हैं। दिल्ली के लिए पूरा प्लान तैयार किया है।
अरावली मिटेगी तो दिल्ली तक आएंगी रेतीली आंधियां
सांसद नीरज डांगी ने अरावली में खनन और उसकी परिभाषा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत शृंखला है और 670 किलोमीटर लम्बी है। यह भारत के मैदानी इलाकों और थार के रेगिस्तान के बीच स्थित है और रेतीली आंधियों को दिल्ली तक आने से रोकती है। यदि यह गायब हो गई तो बारिश पर असर होगा, खेती कम हो जाएगी।


