प्रदेश में डिजिटाइजेशन, फाइबर नेटवर्क, जल-ऊर्जा पाइपलाइन और औद्योगिक गलियारों की मांग बढ़ रही है, लेकिन सडक़ कटिंग की अनुमति की प्रक्रिया उतनी तेज नहीं हो सकी है। यही कारण है कि सडक़ कटिंग के स्वीकृत आवेदनों की संख्या बेहद कम देखने को मिल रही है, जबकि खारिज और लंबित मामलों का भार बढ़ा है। मांग और अनुमति के बीच की दूरी बढ़ रही है। आंकड़े बताते हैं कि उदयपुर 7 स्वीकृत मामलों के साथ उल्लेखनीय रहा और प्रदेश में अपेक्षाकृत बेहतर स्वीकृति वाला जिला बना है। सरहदी जिले जैसलमेर में 8 में 3 लंबित और 5 खारिज, वहीं बाड़मेर में 31 में 6 लंबित और 25 खारिज किए गए हैं। जयपुर शहर में सभी 27 आवेदन खारिज हुए। जयपुर ग्रामीण के 38 आवेदनों में 34 लंबित और 4 खारिज. रहे।
प्रदेश में उभरे तीन प्रमुख पैटर्न
-स्वीकृति कम
-खारिज अधिक
-लंबित मामलों का बोझ
जोधपुर-नागौर: औद्योगिक भूगोल, स्वीकृति शून्य
अजमेर में 272 आवेदन, जिनमें 27 स्वीकृत, 103 लंबित और 142 खारिज रहे। इसी तरह पाली में 263 आवेदन, जिनमें 46 स्वीकृत, 136 लंबित और 81 खारिज किए गए। दोनों जिलों में फाइबर नेटवर्किंग, सिटी गैस पाइपलाइन, औद्योगिक कनेक्शन और शहरीकृत भूगोल ने मांग का दबाव बढ़ाया, लेकिन अंतिम निर्णय में लंबित और खारिज की संख्या अधिक रही। जोधपुर में 98 आवेदन, 48 लंबित और 50 खारिज और नागौर में 50 आवेदन, 24 लंबित और 26 खारिज रहे।
बीकानेर-उदयपुर-कोटा-भीलवाड़ा की तस्वीर
कोटा में 36 में से 1 स्वीकृत, 17 लंबित और 18 खारिज रहे। इसी तरह उदयपुर में 34 में 7 स्वीकृत, 11 लंबित, 16 खारिज किए गए। भीलवाड़ा में 58 में 2 स्वीकृत, 14 लंबित, 42 खारिज, वहीं बीकानेर में 20 में 9 लंबित और 11 खारिज हुए।
पूर्वी जिलों में मिश्रित परिदृश्य
अलवर में 73 आवेदन आए — 5 स्वीकृत, 18 लंबित और 50 खारिज रहे। इसी तरह भरतपुर में 16 में 10 खारिज और 6 लंबित किए गए। करौली में 29 में 17 खारिज और 12 लंबित रहे। प्रतापगढ़ में 11 में 7 लंबित और 4 खारिज किए गए। झालावाड़ में 10 में 1 स्वीकृत, 1 लंबित और 8 खारिज किए गए। दौसा में 36 में 1 स्वीकृत, 13 लंबित और 22 खारिज किए गए।
दक्षिणी राजस्थान में बेहतर स्वीकृति की झलक
-राजसमंद में 15 आवेदन में 5 स्वीकृत, 7 लंबित और 3 खारिज
-बूंदी में 19 में 2 स्वीकृत, 10 लंबित और 7 खारिज
यह माने जा रहे प्रमुख कारण
-नई व उच्च गुुणवत्ता वाली सडक़ों की सुरक्षा प्राथमिकता
-कॉमन डक्ट सिस्टम का अभाव
-बार-बार कटिंग से सडक़ की आयु कम होना
-रेस्टोरेशन कॉस्ट व भुगतान विवाद
-मरम्मत गुणवत्ता पर विवाद
-अधूरे आवेदन व तकनीकी दस्तावेजों की कमी
-मैपिंग व अलाइनमेंट न होना
-सुरक्षा प्रोटोकॉल न होना
-अनावश्यक कटिंग पर राज्यस्तरीय सख्ती
-सरकारी निवेश की सुरक्षा की नीति
सीमान्त जिलों में यह कारण भी
- सैन्य संचार व नियंत्रण क्षेत्र
-सेना- बीएसएफ क्षेत्रों में संवेदनशीलता - गैस पाइपलाइन कॉरिडोर
- सौर ऊर्जा व विंड एनर्जी नेटवर्क
-सीमावर्ती सुरक्षा क्षेत्र में कटिंग रोक
-हाईवे व लिंक रोड का तेजी से उन्नयन
-राष्ट्रीय परियोजनाएं व केंद्रीय फंडिंग
-बार-बार मरम्मत पर लागत अधिक
तेज वाहन संचालन से सड़क क्षति की आशंका - संरचना संरक्षण को प्राथमिकता
- जिला स्तर पर रिजेक्ट रेट अधिक
संवेदनशील प्रोजेक्ट्स के कारण अनुमति सीमित
नियम के अनुसार ही स्वीकृति
रोड कटिंग को लेकर आवेदन आने पर जांच करने स्वीकृति दी जाती है। रोड कटिंग के जो नॉर्म्स है, उसी अनुसार अनुमति मिलती है। नई रोड पर कटिंग की अनुमति नहीं दी जाती हैं। - हर्षवर्धन डाबी,अधिशासी अभियंता,सार्वजनिक निर्माण विभाग,पोकरण (जैसलमेर )


