एम्स भोपाल की गवर्निंग बॉडी बैठक में 500 बेड के विश्राम सदन को मंजूरी मिलने के साथ-साथ इफ्तार पार्टी के आयोजन को लेक विवाद तक हुआ। बैठक में दवाओं के रेट कॉन्ट्रैक्ट, अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और लंबित परियोजनाओं जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सांसद आलोक शर्मा ने इफ्तार कार्यक्रम पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। करीब 9 घंटे चली बैठक में साफ संकेत मिले कि नए प्रोजेक्ट्स से पहले पुराने काम पूरे करने होंगे। गामा नाइफ और क्रिटिकल केयर यूनिट जैसी परियोजनाएं अभी भी लंबित हैं। गामा नाइफ तकनीक, जो ब्रेन ट्यूमर के इलाज में अहम है, 2019 से अटकी हुई है। हालांकि, प्रबंधन की तरफ से इसे जल्द शुरू करने की बात कही जा रही है। विश्राम सदन को मंजूरी, 500 बेड की सुविधा एम्स भोपाल में रोजाना 7 से 8 हजार मरीज पहुंचते हैं, जिनमें बड़ी संख्या बाहर से आने वालों की होती है। ऐसे में मरीजों के परिजनों को ठहरने में परेशानी होती है। इसे देखते हुए 500 बेड के विश्राम सदन को मंजूरी दी गई है। यहां डॉरमेट्री के साथ 1 से 4 बेड वाले कमरे होंगे। योजना है कि इसे 1 से 1.5 साल में तैयार किया जाए। प्रोजेक्ट का प्रस्ताव सेवासदन आरोग्य फाउंडेशन तैयार करेगी। इफ्तार आयोजन पर सियासी विवाद एम्स के अकादमिक ब्लॉक में आयोजित इफ्तार कार्यक्रम ने बैठक की गंभीरता के बीच विवाद खड़ा कर दिया। सांसद आलोक शर्मा ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में धार्मिक आयोजन नहीं होने चाहिए। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की मांग की। ये मुद्दे भी बैठक में उठे दवा और सुरक्षा पर भी उठे सवाल बैठक में दवाओं के रेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, दवाओं की उपलब्धता और कीमतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई। बड़े संस्थान होने के बावजूद सुरक्षा प्रबंधन को और मजबूत करने की जरूरत बताई गई।


