बॉलीवुड में करियर बनाने को लेकर छलका अनुराग कश्यप का दर्द, बोले- तमिल सिनेमा ने सुरक्षित महसूस कराया

Anurag Kashyap On Bollywood Career: हिंदी सिनेमा के चर्चित फिल्ममेकर और अभिनेता अनुराग कश्यप इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘डकैत एक प्रेम कथा’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में अहम भूमिका निभाने के साथ-साथ उन्होंने अपने करियर और इंडस्ट्री के अनुभवों को लेकर भी कई खुलासे किए हैं। एक खास बातचीत में अनुराग ने साफ कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने उन्हें कभी वो सुरक्षा और भरोसा नहीं दिया, जो उन्हें तेलुगु सिनेमा में महसूस हुआ। अनुराग ने क्या कुछ कहा है, चलिए जानते हैं।

‘तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री ने दिया परिवार जैसा साथ’ (Anurag Kashyap On Bollywood Career)

अनुराग कश्यप ने ‘जूम’ के साथ बातचीत में बताया कि वो लंबे समय तक अभिनय को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार नहीं थे। लेकिन ‘डकैत’ के सेट पर काम करते हुए उन्हें एक अलग तरह का अपनापन महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि वहां मौजूद टीम के लोग उन्हें परिवार की तरह सपोर्ट करते थे, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।

उनके मुताबिक, यही वजह है कि उन्होंने तेलुगु सिनेमा के साथ काम करने के अनुभव को बेहद खास बताया। अनुराग का कहना था कि इस इंडस्ट्री ने उन्हें एक सुरक्षित माहौल दिया, जो उन्हें पहले कभी नहीं मिला था।

फिल्म की कहानी में है इमोशन, प्यार और बदले का संघर्ष (Anurag Kashyap On Bollywood Career)

‘डकैत’ एक इमोशनल प्रेम कहानी और बदले की भावना के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में अदिवि शेष और मृणाल ठाकुर मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं। कहानी दो अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले किरदारों के रिश्ते, संघर्ष और भावनात्मक टकराव को दर्शाती है।

फिल्म में अनुराग कश्यप के अलावा प्रकाश राज, अतुल कुलकर्णी, सुनील, जैन मैरी खान और कमाक्षी भास्करला जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई दे रहे हैं। मजबूत स्टारकास्ट के कारण फिल्म को रिलीज से पहले ही काफी चर्चा मिल रही थी।

भाषा की चुनौती भी बनी टीमवर्क की मिसाल

अनुराग कश्यप ने शूटिंग के दौरान भाषा से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि चूंकि वो तेलुगु भाषा में सहज नहीं थे, इसलिए सह-कलाकार कमाक्षी भास्करला ने उन्हें संवादों में मदद की। वहीं अनुराग ने भी उनके हिंदी संवादों में सहयोग किया। इस सहयोग ने सेट पर एक सकारात्मक माहौल तैयार किया।

‘लोग जो सोचते हैं, मैं अब वैसा अनुराग नहीं रहा’

अनुराग कश्यप ने यह भी कहा कि वह अब उस छवि से खुद को अलग कर चुके हैं, जो दर्शक उनके बारे में बना चुके हैं। उनका मानना है कि एक कलाकार को लगातार बदलते रहना चाहिए और नए अनुभवों को अपनाना चाहिए।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शुरुआत में फिल्म के लिए हामी भरने में उन्हें थोड़ी झिझक थी, क्योंकि वह पहले से दो फिल्मों के निर्देशन में व्यस्त थे। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ी, उन्हें अपने किरदार की गहराई समझ आने लगी और उन्होंने इस प्रोजेक्ट से जुड़ने का फैसला किया।

बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत रही धीमी

हालांकि फिल्म को लेकर चर्चा काफी रही, लेकिन शुरुआती एडवांस बुकिंग के आंकड़े उम्मीद से कम नजर आए। इसके बावजूद फिल्म की कहानी और कलाकारों की परफॉर्मेंस को देखते हुए मेकर्स को आगे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

अनुराग कश्यप का यह बयान एक बार फिर हिंदी और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के कामकाज के अंतर पर बहस छेड़ रहा है। साथ ही यह भी दिखाता है कि बदलते दौर में कलाकार अब अलग-अलग भाषाओं के सिनेमा को बराबर महत्व दे रहे हैं।

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