अनूपपुर जिला मुख्यालय पर निर्माणाधीन रेलवे फ्लाईओवर ब्रिज (आरओबी-61) का कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा है। 20 करोड़ रुपए की लागत वाले इस ब्रिज का निर्माण आठ वर्षों से अधिक समय से चल रहा है, लेकिन यह अभी भी अधूरा है। ब्रिज के गार्डर डाले जाने के लगभग दो माह बाद भी रिटेनिंग वॉल का काम पूरा नहीं हो सका है। 14 जनवरी को गार्डर डालने के बाद सपोर्टिंग लोहे के पिलर हटाए जाने थे और दोनों दिशाओं में रिटेनिंग वॉल का कार्य शुरू होना था। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने 10 फरवरी को निरीक्षण के दौरान 15 दिनों के भीतर रिटेनिंग वॉल फर्श में मिट्टी भराव (फीलिंग) सहित अन्य आवश्यक कार्य पूरे करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कार्य में तेजी लाने के लिए दोनों ओर अलग-अलग टीमें लगाने को भी कहा था, लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। वर्तमान में एक ओर रिटेनिंग वॉल के लिए खुदाई का काम शुरू हुआ है, वहीं दूसरी ओर रिटेनिंग वॉल की फीलिंग अधूरी पड़ी है। ठेकेदार कर रहा दिखावा सेतु निगम शहडोल के एसडीओ प्रदीप सिंह बघेल ने बताया कि 23 फरवरी को रेलवे ने आगे काम करने की अनुमति दी थी, लेकिन ठेकेदार की मनमानी के कारण कार्य में गति नहीं आ सकी है। उन्होंने उच्च विभाग को जानकारी दी है कि ठेकेदार द्वारा केवल दिखावे के लिए काम किया जा रहा है और जल्द ही कंपनी पर पेनाल्टी लगाई जाएगी। विभाग ने यह भी बताया कि पूर्व में नगरपालिका की पाइपलाइन के कारण कार्य बाधित रहा था। नपा और बिजली कंपनी ने नहीं किया अमल कलेक्टर ने कई माह पहले ही नगरपालिका और बिजली कंपनी को पाइपलाइन और सड़क किनारे खड़े बिजली के खंभों को हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन नगरपालिका द्वारा पाइपलाइन शिफ्ट नहीं की गई थी। यदि नगरपालिका की ओर से कोई व्यवधान नहीं होता है, तो ऐश फीलिंग और रिटेनिंग वॉल के काम में अभी लगभग दो महीने का समय और लगेगा। हाल ही में कलेक्टर ने एसडीएम अनूपपुर को इस परियोजना की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। 12 करोड़ से 20 हुई लागत एसडीएम कमलेश पुरी ने बताया कि फ्लाई ऐश और मिट्टी फीलिंग के लिए अनुमति मिल चुकी है। ठेकेदार लापरवाही कर रहा है और कार्य में बहुत धीरे चल रहा है, हम जल्द नोटिस जारी करेंगे। इसके कारण 18 माह में बनने वाला 12 करोड़ की ब्रिज अब आठ साल बाद 20 करोड़ की लागत की फ्लाईओवर ब्रिज बन चुकी है। ब्रिज के अधूरेपन से नगरवासी परेशान हैं। रोजाना खतरा मोल लेकर पैदलयात्री पटरी पार कर शहर के दूसरे छोर पहुंच रहे हैं, जबकि बाइक और बड़ी वाहनों को 2 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर मुख्य बाजार क्षेत्र पहुंचना पड़ता है।


