महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के बोध प्रकल्प ने लखनऊ में एक विशेष संगीतमय एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम वृन्दावन योजना में ‘संकल्प नशा विरोधी अभियान’ के तहत आयोजित किया गया था। इसका केंद्रीय विषय ‘क्या भगवान शिव नशा करते थे?’ रहा, जिसने युवाओं और श्रद्धालुओं के बीच सामाजिक जागरूकता का मजबूत संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं, श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। युवा परिवार सेवा समिति ने इस अवसर पर एक ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक नृत्य नाटिका प्रस्तुत की।संगीत, भावपूर्ण अभिनय और विचारोत्तेजक वक्तव्यों के माध्यम से भगवान शिव से जुड़ी प्रचलित भ्रांतियों को तर्कसंगत और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से स्पष्ट किया गया। नाटिका में यह दर्शाया गया कि भगवान शिव नशे के नहीं, बल्कि आत्मसंयम, जागरूकता और आंतरिक शक्ति के प्रतीक हैं। भ्रांतियों को तर्कसंगत स्पष्ट किया गया कार्यक्रम के दौरान युवाओं को यह संदेश दिया गया कि जीवन की चुनौतियों से भागना समाधान नहीं है। धैर्य, विवेक और संतुलन के साथ परिस्थितियों का सामना करना ही सच्ची बहादुरी है। वक्ताओं ने नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर एक सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। जनसमूह को संबोधित करते हुए साध्वी सुदेष्णा भारती ने कहा कि आज के दौर में वही व्यक्ति सच्चा नायक है, जो अपने मन और इच्छाओं पर नियंत्रण रखकर समाज के लिए प्रेरणा बनता है।महाशिवरात्रि पर आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ-साथ नशामुक्त समाज के निर्माण का मजबूत संदेश देकर लोगों के बीच जागरूकता और संकल्प को सुदृढ़ करने वाला साबित हुआ।


