देवरिया में शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या प्रकरण से अलग एक नए मामले में कृषक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिसई के प्रबन्ध समिति के आजीवन सदस्य ने जिलाधिकारी को शिकायत देकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
रिटायर्ड शिक्षक को प्रधानाध्यापक दर्शा कर वेतन बिल पारित
शिकायत में कहा गया है कि वैध रूप से कार्यरत प्रधानाचार्य के रहते हुए एक ऐसे शिक्षक को प्रधानाध्यापक दर्शाकर जनवरी 2026 का वेतन बिल पारित कराया गया, जिसकी सेवाएं पूर्व में समाप्त बताई जा चुकी थीं। इस प्रक्रिया के माध्यम से ₹1,44,366 की धनराशि राजकोष से निकाले जाने को कूटरचना व गबन की श्रेणी का कृत्य बताया गया है।
उच्च न्यायालय की अवहेलना का आरोप
प्रबंधक का आरोप है कि विद्यालय की प्रबंध समिति और प्रधानाचार्य की वैधता सिविल न्यायालय तथा जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेशों से पहले ही स्पष्ट हो चुकी थी, इसके बावजूद विभागीय स्तर पर विपरीत कार्रवाई की गई और प्रस्तुत साक्ष्यों को नजरअंदाज कर एकपक्षीय निर्णय लिया गया। मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का भी आरोप जोड़ा गया है।
डीएम से मुकदमा दर्ज करने की मांग
शिकायतकर्ता ने वर्ष 2021 से 2025 तक के बकाया वेतन के नाम पर बड़े पैमाने पर धन निकासी की साजिश की आशंका जताते हुए जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। शिक्षक आत्महत्या मामले के बाद पहले से सवालों में घिरे शिक्षा विभाग पर यह नया प्रकरण प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पारदर्शिता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।


