बच्चों के सर्वांगीण विकास और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण के संकल्प के साथ आज बेगूसराय के आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य शिशुओं को उचित समय पर पूरक आहार शुरू करने के प्रति जागरूक करना था। इसी कड़ी में जगतपुरा स्थित केंद्र संख्या-3 पर सामूहिक अन्नप्राशन समारोह का आयोजन हुआ, जो जन-जागरूकता की मिसाल बना। सामूहिक प्रयास से जगाई जागरूकता जगतपुरा के केंद्र संख्या-3 पर आयोजित इस कार्यक्रम में अभूतपूर्व सामंजस्य देखने को मिला। यहां केंद्र संख्या 97 और 196 की सेविकाएं और लाभार्थी भी शामिल हुए। सामूहिक रूप से मनाए गए इस उत्सव ने स्थानीय लोगों को एकजुट होकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। इस अभियान में पिरामल की सक्रिय भागीदारी रही, जो जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्यरत है। विशेषज्ञों ने साझा किए पोषण के गुर कार्यक्रम के दौरान महिला पर्यवेक्षिका अदिति वत्स ने माताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि 6 महीने की आयु के बाद केवल मां का दूध बच्चे की बढ़ती जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं होता। सही समय पर ऊपरी और पूरक आहार की शुरुआत ही बच्चे को कुपोषण के चक्र से बचा सकती है। वहीं, पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि दीपक मिश्रा ने व्यवहार परिवर्तन पर जोर देते हुए कहा कि पोषण केवल भोजन तक सीमित नहीं है। 6 महीने के बाद बढ़ती है ऊर्जा की जरूरत यह सही व्यवहार और जानकारी का संगम है। उन्होंने स्वच्छता के साथ घर में उपलब्ध दाल, दलिया व मौसमी फलों के सही उपयोग को एक मजबूत पीढ़ी की नींव बताया। 6 महीने के बाद बच्चे की ऊर्जा की जरूरतें बढ़ जाती है। ऐसे में मसली हुई दाल, गाढ़ा दलिया और मसले हुए फलों जैसे पूरक आहार की शुरुआत करना जीवन रक्षक साबित होता है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सेविका कंचन कुमारी, बिंदु कुमारी, शुभम कुमारी और अर्चना कुमारी ने विशेष योगदान दिया। स्वच्छता और शपथ के साथ समापन कार्यक्रम के समापन पर माताओं और लाभार्थियों को ऊपरी आहार जागरूकता की शपथ दिलाई गई। जगतपुरा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की सीएचओ किरण कुमारी ने सभी को स्वच्छता और सही पोषण की शपथ दिलाई। माताओं ने संकल्प लिया कि वे 6 महीने के बाद ऊपरी आहार शुरू करेंगी और साथ ही दो साल तक स्तनपान भी जारी रखेंगी। स्थानीय लोगों ने विभाग और पिरामल फाउंडेशन के इस संयुक्त प्रयास को बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए एक सार्थक कदम बताया। बच्चों के सर्वांगीण विकास और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण के संकल्प के साथ आज बेगूसराय के आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य शिशुओं को उचित समय पर पूरक आहार शुरू करने के प्रति जागरूक करना था। इसी कड़ी में जगतपुरा स्थित केंद्र संख्या-3 पर सामूहिक अन्नप्राशन समारोह का आयोजन हुआ, जो जन-जागरूकता की मिसाल बना। सामूहिक प्रयास से जगाई जागरूकता जगतपुरा के केंद्र संख्या-3 पर आयोजित इस कार्यक्रम में अभूतपूर्व सामंजस्य देखने को मिला। यहां केंद्र संख्या 97 और 196 की सेविकाएं और लाभार्थी भी शामिल हुए। सामूहिक रूप से मनाए गए इस उत्सव ने स्थानीय लोगों को एकजुट होकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। इस अभियान में पिरामल की सक्रिय भागीदारी रही, जो जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्यरत है। विशेषज्ञों ने साझा किए पोषण के गुर कार्यक्रम के दौरान महिला पर्यवेक्षिका अदिति वत्स ने माताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि 6 महीने की आयु के बाद केवल मां का दूध बच्चे की बढ़ती जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं होता। सही समय पर ऊपरी और पूरक आहार की शुरुआत ही बच्चे को कुपोषण के चक्र से बचा सकती है। वहीं, पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि दीपक मिश्रा ने व्यवहार परिवर्तन पर जोर देते हुए कहा कि पोषण केवल भोजन तक सीमित नहीं है। 6 महीने के बाद बढ़ती है ऊर्जा की जरूरत यह सही व्यवहार और जानकारी का संगम है। उन्होंने स्वच्छता के साथ घर में उपलब्ध दाल, दलिया व मौसमी फलों के सही उपयोग को एक मजबूत पीढ़ी की नींव बताया। 6 महीने के बाद बच्चे की ऊर्जा की जरूरतें बढ़ जाती है। ऐसे में मसली हुई दाल, गाढ़ा दलिया और मसले हुए फलों जैसे पूरक आहार की शुरुआत करना जीवन रक्षक साबित होता है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सेविका कंचन कुमारी, बिंदु कुमारी, शुभम कुमारी और अर्चना कुमारी ने विशेष योगदान दिया। स्वच्छता और शपथ के साथ समापन कार्यक्रम के समापन पर माताओं और लाभार्थियों को ऊपरी आहार जागरूकता की शपथ दिलाई गई। जगतपुरा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की सीएचओ किरण कुमारी ने सभी को स्वच्छता और सही पोषण की शपथ दिलाई। माताओं ने संकल्प लिया कि वे 6 महीने के बाद ऊपरी आहार शुरू करेंगी और साथ ही दो साल तक स्तनपान भी जारी रखेंगी। स्थानीय लोगों ने विभाग और पिरामल फाउंडेशन के इस संयुक्त प्रयास को बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए एक सार्थक कदम बताया।


