सीवान के आंदर नगर पंचायत में व्याप्त कथित वित्तीय अनियमितताओं पर प्रकाशित खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। दैनिक भास्कर के शुक्रवार को प्रकाशित खुलासे पर जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया और जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने वाटर एटीएम योजना के टेंडर को तत्काल प्रभाव से कैंसिल कर दिया। इस कार्रवाई से नगर पंचायत में अफरा-तफरी मच गई है। जानकारी के मुताबिक, आंदर नगर पंचायत में कुल ₹1 करोड़ 90 लाख 82 हज़ार 500 रुपये की योजनाओं के निष्पादन में अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। वार्ड संख्या 8 के पार्षद प्रेम कुमार द्वारा की गई शिकायत में बताया गया कि 15 वाटर एटीएम पर ₹94.50 लाख, साइन बोर्ड पर ₹43.77 लाख, जिम उपकरण पर ₹24.85 लाख और सेक्शन मशीन पर ₹27.90 लाख कुल मिलाकर 1.91 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च दिखाया गया है। पार्षद ने आशंका जताई थी कि इन योजनाओं में भारी वित्तीय गड़बड़ी की गई है। शिकायत के बाद दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई कि नगर पंचायत द्वारा लगाए गए वाटर एटीएम जियो-टैग में वाटर कूलर दर्ज दिखाई दे रहा है, जबकि निविदा एटीएम के लिए निकाली गई थी। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि केवल साधारण वाटर कूलर जैसे उपकरण का अधिष्ठापन किया गया है। डीएम विवेक रंजन मैत्रेय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्यपालक पदाधिकारी से 13 बिंदुओं पर दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। शुरुआती जांच रिपोर्ट असंतोषजनक पाए जाने पर वाटर एटीएम से संबंधित टेंडर रद्द कर दिया गया और कार्यपालक पदाधिकारी को कड़ी चेतावनी जारी की गई। जिला प्रशासन की इस तेज कार्रवाई से आम जनता में सकारात्मक संदेश गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डीएम की त्वरित कार्रवाई ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का भरोसा जगाया है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या कथित अनियमितता सिर्फ वाटर एटीएम तक सीमित है या बाकी तीन कामों की भी जांच होगी? जनता और पार्षदों की मांग है कि यदि एक टेंडर में खामी पाई गई है।तो बाकी योजनाओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। सीवान के आंदर नगर पंचायत में व्याप्त कथित वित्तीय अनियमितताओं पर प्रकाशित खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। दैनिक भास्कर के शुक्रवार को प्रकाशित खुलासे पर जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया और जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने वाटर एटीएम योजना के टेंडर को तत्काल प्रभाव से कैंसिल कर दिया। इस कार्रवाई से नगर पंचायत में अफरा-तफरी मच गई है। जानकारी के मुताबिक, आंदर नगर पंचायत में कुल ₹1 करोड़ 90 लाख 82 हज़ार 500 रुपये की योजनाओं के निष्पादन में अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। वार्ड संख्या 8 के पार्षद प्रेम कुमार द्वारा की गई शिकायत में बताया गया कि 15 वाटर एटीएम पर ₹94.50 लाख, साइन बोर्ड पर ₹43.77 लाख, जिम उपकरण पर ₹24.85 लाख और सेक्शन मशीन पर ₹27.90 लाख कुल मिलाकर 1.91 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च दिखाया गया है। पार्षद ने आशंका जताई थी कि इन योजनाओं में भारी वित्तीय गड़बड़ी की गई है। शिकायत के बाद दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई कि नगर पंचायत द्वारा लगाए गए वाटर एटीएम जियो-टैग में वाटर कूलर दर्ज दिखाई दे रहा है, जबकि निविदा एटीएम के लिए निकाली गई थी। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि केवल साधारण वाटर कूलर जैसे उपकरण का अधिष्ठापन किया गया है। डीएम विवेक रंजन मैत्रेय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्यपालक पदाधिकारी से 13 बिंदुओं पर दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। शुरुआती जांच रिपोर्ट असंतोषजनक पाए जाने पर वाटर एटीएम से संबंधित टेंडर रद्द कर दिया गया और कार्यपालक पदाधिकारी को कड़ी चेतावनी जारी की गई। जिला प्रशासन की इस तेज कार्रवाई से आम जनता में सकारात्मक संदेश गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डीएम की त्वरित कार्रवाई ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का भरोसा जगाया है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या कथित अनियमितता सिर्फ वाटर एटीएम तक सीमित है या बाकी तीन कामों की भी जांच होगी? जनता और पार्षदों की मांग है कि यदि एक टेंडर में खामी पाई गई है।तो बाकी योजनाओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके।


