Amyra suicide case: जयपुर: नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा अमायरा के आत्महत्या मामले में सीबीएसई की ओर से स्कूल की मान्यता रद्द करने के निर्णय पर अब स्कूल संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। निजी स्कूलों के संगठन सीबीएसई के फैसले के विरोध में आ गए हैं।
स्कूल संगठनों ने मान्यता रद्द करने के आदेश को वापस लेने की मांग की है। इधर, सीबीएसई की ओर लिए गए निर्णय से अभिभावक चिंता में हैं। अभिभावकों का तर्क है कि आत्महत्या करने वाली छात्रा के प्रति गहरी संवेदना है। लेकिन स्कूल की गलती की सजा 5500 बच्चों को क्यों दी जा रही है। स्कूल के दूसरे बच्चों का क्या कसूर है। इधर, शिक्षा निदेशालय ने स्कूल प्रशासन को छह जनवरी को तलब किया है।
अभिभावक : दूसरे बच्चों के लिए होंगी मुश्किल
निमिश भूटानी का बेटा नौवीं में पढ़ रहा है। उनका कहना है कि स्कूल में जो घटना हुई उस पर एक्शन लिया जाना चाहिए। लेकिन सीबीएसई ने स्कूल पर जो एक्शन लिया है, उसका असर सभी बच्चों पर पड़ रहा है।
सीबीएसई को स्कूल को पाबंद करना चाहिए, नियम-कायदे और सुरक्षा मापदंडों को पूरा कराना चाहिए। अभिभावकों को जाागरूक करना चाहिए। लेकिन मान्यता रद्द करने के निर्णय से अन्य बच्चों को खमियाजा उठाना पड़ रहा है। इससे प्रतिभाशाली बच्चे पीछे रह जाएंगे। प्रवेश के लिए स्कूलों में भटकना पड़ेगा।
स्कूल संगठन : दबाव में लिया प्रशासनिक फैसला
स्कूल संगठनों ने कहा कि एक दुखद घटना को आधार बनाकर किसी स्कूल की सीबीएसई मान्यता रद्द करना न्याय नहीं बल्कि भावनात्मक दबाव में लिया प्रशासनिक फैसला है। कानून हादसे और लापरवाही में स्पष्ट अंतर करता है।
स्कूल क्रांति संगठन की प्रदेशाध्यक्ष हेमलता शर्मा ने कहा कि झालावाड़ में सरकारी स्कूल में छत गिरने से 7 बच्चों की मृत्यु हुई, तब किसी की मान्यता रद्द नहीं हुई। यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो कार्रवाई भी समान होनी चाहिए।
सीबीएसई का उद्देश्य बच्चों की शिक्षा की रक्षा करना है, न कि हजारों बच्चों का भविष्य एक झटके में खत्म कर देना। यदि हर हादसे पर स्कूल की मान्यता रद्द होगी तो देश का कोई भी स्कूल सुरक्षित नहीं रहेगा।


