युद्ध के बीच ट्रंप का टैरिफ अटैक, स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर लगाया 50 प्रतिशत ट्रैक्स

युद्ध के बीच ट्रंप का टैरिफ अटैक, स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर लगाया 50 प्रतिशत ट्रैक्स

अमेरिका में लंबे समय से विदेशी धातुओं के आयात को लेकर चिंता जताई जा रही थी। खासकर स्टील और एल्यूमिनियम सेक्टर में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की मांग लगातार उठ रही थी। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बड़ा फैसला लेते हुए स्टील, एल्यूमिनियम और कॉपर पर नए टैरिफ लागू करने की घोषणा की है। इस फैसले के तहत आयातित मेटल उत्पादों पर अब 50 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया जाएगा, जिससे ग्लोबल ट्रेड पर असर पड़ने की संभावना है।

पारदर्शिता बढ़ेगी और घरेलू उद्योग मजबूत होगा

नई नीति के अनुसार, अमेरिका में आने वाले अधिकांश स्टील और एल्यूमिनियम उत्पादों पर 50 प्रतिशत एड वेलोरम ड्यूटी लगेगी। यह शुल्क उत्पाद की पूरी कस्टम वैल्यू पर आधारित होगा, जिससे पहले इस्तेमाल किए जा रहे कम मूल्यांकन के तरीकों को खत्म किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि पहले कई निर्यातक उत्पादों की कीमत कृत्रिम रूप से कम दिखाकर सिस्टम का फायदा उठा रहे थे। अब इस बदलाव से पारदर्शिता बढ़ेगी और घरेलू उद्योग को मजबूत समर्थन मिलेगा। यह कदम पहले से लागू सेक्शन 232 नियमों को और सख्त बनाता है, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना है।

डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स के लिए नया फ्रेमवर्क पेश

सरकार ने डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स यानी ऐसे उत्पाद जिनमें धातु का उपयोग होता है, उनके लिए भी नया फ्रेमवर्क पेश किया है। जिन उत्पादों में स्टील, एल्यूमिनियम या कॉपर की मात्रा कम होगी, उन्हें अतिरिक्त टैरिफ से छूट मिलेगी। वहीं जिनमें इन धातुओं का ज्यादा उपयोग है, उन पर 25 प्रतिशत का फ्लैट शुल्क लगाया जाएगा। इस सरल व्यवस्था का मकसद नियमों को आसान बनाना और आयातकों के लिए प्रक्रिया को स्पष्ट करना है। अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रशासनिक जटिलता कम होगी और नियमों का पालन बेहतर तरीके से हो सकेगा।

जरूरत पड़ने पर और उत्पादों पर भी लग सकता है टैरिफ

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, पहले लगाए गए टैरिफ के बाद घरेलू उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ है। एल्यूमिनियम सेक्टर में क्षमता उपयोग करीब 50.4 प्रतिशत और स्टील में 77.2 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अब सरकार का लक्ष्य इसे 80 प्रतिशत तक ले जाना है। नए नियमों के तहत जरूरत पड़ने पर और उत्पादों को भी टैरिफ सूची में शामिल किया जा सकेगा। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि इन टैरिफ का असर आम उपभोक्ताओं की कीमतों पर ज्यादा नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह मुख्य रूप से व्यापारिक ढांचे में बदलाव है। ये नए नियम 6 अप्रैल से लागू होंगे।

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