Israel-Iran Conflict : इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के नेतृत्व में ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ शुरू हुआ महायुद्ध अब एक निर्णायक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के साथ शुरू हुई इज़राइल-ईरान जंग (Israel-Iran Conflict) अब अपने 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है। नेतन्याहू (Netanyahu) की आक्रामक सैन्य रणनीति के चलते इज़राइली और अमेरिकी सेनाओं ने ईरान में अब तक 5,000 से अधिक ठिकानों को तबाह कर दिया है और 50 से ज्यादा ईरानी जहाजों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
दुश्मनों का नेटवर्क खत्म करना लक्ष्य: नेतन्याहू (Netanyahu)
नेतन्याहू का लक्ष्य केवल ईरान की सैन्य ताकत को कुचलना नहीं है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में इज़राइल के दुश्मनों के नेटवर्क को खत्म करना है। इसी कड़ी में इज़राइली सेना (IDF) ने अब दक्षिण लेबनान के टायर और सिडोन इलाकों में भी ‘आसन्न’ (imminent) बड़े हमलों की सख्त चेतावनी दी है। इज़राइल ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों और उन्हें हथियार व पैसा मुहैया कराने वाले वित्तीय नेटवर्क को लगातार निशाना बना रहा है।
ईरानी रिवोल्युशनरी गार्ड्स ने पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं (IRGC)
नेतन्याहू के इस कड़े प्रहार का ही असर है कि पहले दिन के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद, अब उनके बेटे मुजतबा खामेनेई ने देश की कमान संभाली है। नए नेतृत्व के तहत ईरान भी अब जवाबी कार्रवाई कर रहा है। ईरानी रिवोल्युशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इराक के कुर्दिस्तान स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे (अल-हरीर एयर बेस) पर पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
यह युद्ध एक छोटा अभियान है (Donald Trump)
इज़राइल और अमेरिका की इस साझा सैन्य रणनीति पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह युद्ध एक छोटा अभियान है और “बहुत जल्द” खत्म हो जाएगा। हालांकि, नेतन्याहू की आक्रामकता को देखते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पलटवार किया है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि अमेरिका के साथ बातचीत का अब कोई सवाल ही नहीं उठता और इस युद्ध का अंत वाशिंगटन या तेल अवीव नहीं, बल्कि तेहरान तय करेगा।
रिफाइनरियों को गैस का उत्पादन बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए
मध्य पूर्व में नेतन्याहू द्वारा छेड़े गए इस युद्ध का सीधा और गहरा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। ईरान ने साफ शब्दों में धमकी दी है कि जब तक इज़राइली और अमेरिकी हमले नहीं रुकते, वह इस क्षेत्र से अमेरिका और इज़राइल के सहयोगियों को “एक लीटर तेल” का निर्यात भी नहीं होने देगा। इस वैश्विक आपूर्ति संकट की आशंका को देखते हुए भारत सरकार ने भी फौरन कदम उठाए हैं। सरकार ने घरेलू कुकिंग गैस (LPG) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘एस्मा’ (ESMA) लागू कर दिया है और रिफाइनरियों को गैस का उत्पादन बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
खाड़ी देशों में भारी दहशत का माहौल
युद्ध के इस तनावपूर्ण माहौल के बीच खाड़ी देशों में भारी दहशत का माहौल है। ईरान कुवैत और सऊदी अरब की तरफ भी ड्रोन दाग रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को ईरान की तरफ से आ रहे सैकड़ों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से बीच हवा में ही नष्ट करना पड़ रहा है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि यूएई ने अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की एडवाइजरी जारी की है। इस बीच, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से दुनिया को फौरी राहत देने के लिए अमेरिका तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में ढील देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है, ताकि बाजार को स्थिर रखा जा सके।


