जातीय बयानबाज़ी के बीच मऊ में एक और वीडियो वायरल, पार्सल अधीक्षक मऊ और आरपीएफ जवान के बीच विवाद ने पकड़ा तूल

जातीय बयानबाज़ी के बीच मऊ में एक और वीडियो वायरल, पार्सल अधीक्षक मऊ और आरपीएफ जवान के बीच विवाद ने पकड़ा तूल

Mau News: यूजीसी के नए नियमों को लेकर देश-प्रदेश में चल रही बहस के बीच जातीय पहचान से जुड़े मुद्दों पर माहौल पहले से संवेदनशील बना हुआ है। इसी बीच मऊ जनपद से एक और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने नई चर्चा छेड़ दी है।

नया वीडियो सामने आया है, उसमें मऊ के पार्सल अधीक्षक राजेश कुमार सिंह रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के एक जवान से बहस करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में पार्सल अधीक्षक स्वयं को “राजेश कुमार ‘सिंह’, पार्सल अधीक्षक” बताते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

घटना मऊ रेलवे स्टेशन के पार्सल विभाग का

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। आधिकारिक स्तर पर किसी भी पक्ष की ओर से विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, विवाद में दिखाई दे रहे आरपीएफ जवान का नाम अमित कुमार यादव बताया जा रहा है, जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ में तैनात हैं और मऊ जिले के घोसी थाना क्षेत्र के निवासी हैं। बताया जा रहा है कि वह अपना सामान बुक कराने के लिए मऊ के पार्सल कार्यालय पहुंचे थे। बातचीत से यह भी संकेत मिलता है कि किसी वाहन के कार्यालय परिसर तक पहुंचने को लेकर आपत्ति जताई गई थी, हालांकि इसकी पुष्टि अभी शेष है।

ऑफिस में पार्सल को लेकर तू-तू, मैं-मैं…

छत्तीसगढ़ में आरपीएफ में तैनात अमित कुमार यादव मूलतः मऊ के रहने वाले हैं। मंगलवार को शाम करीब 4:30 बजे वे एक पार्सल बुक करने रेलवे पार्सल ऑफिस पहुंचे थे। बताया जा रहा कि पार्सल खुला हुआ था। अधीक्षक राजेश सिंह ने पार्सल पैक कराने को कहा। लेकिन अमित बिना पैक किए ही सामान भेजने को कह रहे थे।

इसी मामले को लेकर राजेश और अमित के बीच बात होते-होते कहासुनी होने लगी। दरअसल, अमित ने बताया कि वह आरपीएफ में हैं और खुला ही पार्सल भेज दें, वह देख लेंगे। इस पर राजेश ने कहा- मैं भी 15 साल आरपीएफ में रहने के बाद ही पार्सल में ट्रांसफर हुआ हूं। मुझे मत समझाओ।

इसके बाद दोनों में कहासुनी हुई और राजेश सिंह भड़क गए। हालांकि, बताया जा रहा कि मामला बढ़ने पर रेलवे अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और दोनों के बीच समझौता करा दिया।

वही पार्सल अधीक्षक की बात से यह समझ में आ रहा है कि व्यक्ति गाड़ी लेकर कार्यालय तक चला गया है, ऐसा बातों से प्रतीत हो रहा है वही दोनों लोगों का पक्ष लेने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

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