ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने लेबनान से कुछ राजनयिकों को वापस बुलाया

ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने लेबनान से कुछ राजनयिकों को वापस बुलाया

मध्य पूर्व में एक बार फिर भू-राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है। पिछले कुछ हफ्तों में बढ़ी सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक बयानबाजी ने दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंकाओं को और अधिक बढ़ा दिया है। इसी बीच अब खबर सामने आ रही है कि अमेरिका ने सुरक्षा कारणों से लेबनान में तैनात अपने कुछ गैर जरूरी राजनयिकों और उनके परिवारों को वापस बुलाने का आदेश दिया है।

दूतावास फिलहाल पूरी तरह से संचालित

अमेरिकी विदेश विभाग (US Department of State) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति की लगातार समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। अधिकारी के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए यह उचित समझा गया कि बेरूत स्थित अमेरिकी दूतावास में केवल जरूरी कर्मी ही तैनात रहें। यह कदम एहतियातन उठाया गया है ताकि संभावित सुरक्षा जोखिमों को कम किया जा सके। अधिकारी ने यह भी कहा कि यह व्यवस्था अस्थायी है और दूतावास फिलहाल पूरी तरह से संचालन में है।

कूटनीतिक वार्ता विफल होने पर युद्ध संभव

हालांकि इस फैसले की औपचारिक घोषणा अभी नहीं की गई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से पहले ही स्टाफ में कटौती शुरू कर दी गई। यह संकेत देता है कि अमेरिका क्षेत्र में किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता है। बता दें कि इससे पहले ईरान ने हाल ही में रूस के साथ वार्षिक सैन्य अभ्यास किया, वहीं अमेरिका ने अपना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर मिडिल ईस्ट के करीब भेज दिया है। दोनों देशों के कदम इस बात का संकेत हैं कि कूटनीतिक वार्ता विफल होने की स्थिति में सैन्य विकल्प भी खुले रखे गए हैं।

ट्रंप ने दिया युद्ध पर बयान

हाल ही में ट्रंप ने मीडिया में चल रही उन खबरों को गलत बताया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर असमंजस में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संभावित युद्ध को लेकर जो भी लिखा गया है वह पूरी तरह गलत है। ट्रंप ने कहा कि वह सैन्य टकराव के बजाय समझौते को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन यदि डील नहीं होती है तो ईरान के लिए बहुत बुरा दिन साबित हो सकता है। उनके इस बयान से यह संकेत मिला कि वॉशिंगटन दबाव की रणनीति अपनाते हुए कूटनीतिक रास्ता खुला रखना चाहता है।

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