अमरीका की सख्त टैरिफ नीति से जूझ रहे भारतीय जेम्स-ज्वैलरी एक्सपोर्टर्स के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की हालिया संक्षिप्त भारत यात्रा ने भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार को नई रफ्तार देने का संकेत दिया है। दोनों देशों ने 2032 तक आपसी कारोबार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जबकि फिलहाल यह आंकड़ा 100 अरब डॉलर के आसपास है।
कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के तहत टेक्नोलॉजी, इंफ्रा, स्पेस, एनर्जी और डिफेंस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा, लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा राजस्थान के जेम्स-ज्वैलरी एक्सपोर्टर्स को मिलने वाला है। अमरीकी टैरिफ से जहां ज्वैलरी निर्यात प्रभावित हुआ था, वहीं सीईपीए के तहत यूएई को बिना ड्यूटी गहनों का निर्यात नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। यही कारण है कि 2022 से 2024-25 के बीच भारत से यूएई को जेम्स-ज्वैलरी एक्सपोर्ट में करीब 60% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दूसरा बड़ा बाजार
ज्वैलर्स एसोसिएशन जयपुर के महासचिव नीरज लूणावत का कहना है कि राजस्थान की ज्वैलरी इंडस्ट्री के लिए यूएई दूसरा बड़ा बाजार है। दोनों देशों के बीच सीईपीए होने से खासतौर से जयपुर के जेम्स-ज्वैलरी एक्सपोर्टर्स को इसका बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि यूएसए की ओर से लगाए गए 50% टैरिफ से 30% तक जेम्स ज्वैलरी का एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है।
अपार संभावनाएं
ग्लोबल मार्केट एक्सपर्ट महेश शर्मा का कहना है कि यूएई के साथ द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि से भारतीय मैन्युफैक्चर्स और एक्सपोर्टर्स के पास अगले 5 साल सुनहरा मौका है। सीईपीए के बाद यूएई को जेम्स-ज्वैलरी एक्सपोर्ट 18 फीसदी बढ़ा है। इसके साथ ही इंजीनियरिंग गुड्स, आइटी प्रोडक्ट्स, इंफ्रा, स्किल्ड मैनपावर के क्षेत्र में अभी अपार
संभावनाएं हैं। यूएई की ओपन ट्रेड पॉलिसी हमें वैल्यू चेन से जोड़ेगी।


