चैत्र नवरात्र के अंतर्गत गुरुवार को भक्ति और शक्ति का अद्भुत संयोग बन रहा है। सूर्योदय के समय अष्टमी और दोपहर में नवमी तिथि की व्याप्ति होने के कारण आज एक ही दिन दुर्गा अष्टमी, संधि पूजा, अन्नपूर्णा अष्टमी और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्मोत्सव (राम नवमी) हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
शास्त्रों में उदया तिथि के महत्व के आधार पर गुरुवार को महाष्टमी और शुक्रवार को महानवमी का पर्व मनेगा। चूंकि प्रभु श्रीराम का प्राकट्य दोपहर 12:15 बजे हुआ था, अतः राम जन्मोत्सव गुरुवार को ही मनाया जाएगा। मंदिरों और घरों में ‘भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला’ के स्वर गूंजेंगे।
शत्रु विजय के लिए 48 मिनट की ‘संधिपूजा’
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गुरुवार सुबह 11:24 से दोपहर 12:12 बजे तक ‘संधिपूजा’ का विशेष मुहूर्त रहेगा। यह वही 48 मिनट का अत्यंत शुभ काल है, जब देवी चामुंडा ने असुर चंड-मुंड का संहार किया था। मान्यता है कि इस समय की गई विशेष आराधना जीवन की बाधाओं को दूर कर शत्रुओं पर विजय दिलाती है।
आज कन्या पूजन श्रेष्ठ, कल होगा व्रत पारण
महाष्टमी का पर्व गुरुवार को होने से कन्या पूजन सुबह के समय करना श्रेष्ठ रहेगा। अष्टमी तिथि सुबह 11:49 बजे तक रहेगी। वहीं, नवमी तिथि शुक्रवार सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के चलते महानवमी शुक्रवार को मनाई जाएगी। श्रद्धालु शुक्रवार सुबह 10:06 बजे नवमी तिथि समाप्त होने के बाद ही व्रत का पारण कर अन्न ग्रहण करें।
- पूजन के शुभ चौघड़िए (गुरुवार)
- शुभ: सुबह 6:39 से 8:10 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:29 से 1:08 बजे तक
- चंचल व लाभ: सुबह 11:13 से दोपहर 3:46 बजे तक
- शाम का शुभ मुहूर्त: शाम 5:17 से 6:48 बजे तक
पंचांग दर्शन: क्यों है यह संयोग
जब अष्टमी तिथि के अंत के 24 मिनट और नवमी तिथि के प्रारंभ के 24 मिनट मिलते हैं, तो उसे ‘संधिकाल’ कहा जाता है। इस बार यह संयोग गुरुवार दोपहर को बन रहा है। राम नवमी के लिए मध्याह्न व्यापिनी तिथि की आवश्यकता होती है, जो गुरुवार को पूर्ण रूप से मिल रही है।


