Rajasthan Crime: हरियाली बढ़ाने के नाम पर करीब 18 करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ है। एक साल पहले कराई गई की जांच की रिपोर्ट आरटीआइ के जरिए सामने आई है। वन विभाग के कुछ अधिकारियों ने फर्जी समितियाें का गठन कर वित्तीय अनियमितता की।
इसमें तत्कालीन अलवर डीएफओ अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव, डीएफओ राजेंद्र हुड्डा, राजगढ़ के तत्कालीन क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक मीणा के अलावा प्रभारी वनपाल का नाम सामने आया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक सेल्फ चेक के जरिए सरकारी राशि का दुरुपयोग किया। मुख्य वन संरक्षक जयपुर राजीव चतुर्वेदी के नेतृत्व में गठित समिति की करीब 300 पेज की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
जांच समिति ने पूरे मामले में राशि की वसूली, दोषी लोकसेवकों पर कड़ी कार्रवाई और सीबीआइ जांच कराने की सिफारिश वन मुख्यालय से की है। वन मंडल अलवर की रेंज राजगढ़ में करवाए गए मृदा व पौधरोपण के कार्यों की 20 प्रतिशत सैंपलिंग जून-जुलाई 2024 में सरकार ने करवाई।
जांच में पाया कि मिट्टी से लेकर पौधरोपण के लिए बनाई गई 7 ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति का गठन अवैध रूप से किया गया। इन समितियों के जरिए ही 15 करोड़ 54 लाख 78 हजार 82 की वित्तीय अनियमिता की गई। इस तरह से राजगढ़ रेंज में ही अन्य कार्य के नाम पर 2 करोड़ करोड़ से ज्यादा राशि का घोटाला हुआ।
जांच जारी है
यह पुराना मामला है और इसकी जांच प्रक्रियाधीन है। सरकार से जो आदेश मिलेंगे, उसकी पालना करेंगे।
राजेंद्र कुमार हुड्डा, डीएफओ, अलवर वन मंडल


