पटना मेडिकल कॉलेज 101 वर्ष का होने जा रहा है। 1925 में स्थापित इस संस्थान की अपनी गरिमा है। यहाँ से निकले आठ डॉक्टरों को पद्म सम्मान से नवाजा जा चुका है। 1000 से अधिक ऐसे डॉक्टर हैं, जिनका देश-दुनिया में नाम है। इस संस्थान ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री तक दिया है। लेकिन, 101वें स्थापना दिवस समारोह से पहले पूर्ववर्ती छात्रों के बीच वर्चस्व को लेकर गुटबाजी शुरू हो गई है। बुजुर्ग डॉक्टरों के गुट को हटाकर वर्तमान डॉक्टरों का गुट एसोसिएशन पर अपना प्रभाव जमाना चाहता है। इसके लिए अलग-अलग बैनर तक टांग दिए गए हैं। इससे देश-विदेश में फैले संस्थान के पूर्ववर्ती छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। पटना मेडिकल कॉलेज ओल्ड बॉयज एलुमनी एसोसिएशन को वर्तमान और पूर्व प्राचार्यों का समर्थन प्राप्त है। उधर, दूसरे गुट पटना मेडिकल कॉलेज एलुमनी एसोसिएशन ने आधिकारिक इकाई होने का दावा किया है। अपना-अपना दावा पटना मेडिकल कॉलेज एलुमनी एसोसिएशन के संयोजक डॉ. सच्चिदानंद कुमार ने कहा कि यह पूरी तरह वैधानिक और सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था है। 101वें स्थापना दिवस एवं एलुमनी सम्मेलन के आयोजन की जिम्मेदारी इसी अधिकृत संस्था की है। कुछ व्यक्तियों द्वारा समानांतर दावेदारी कर भ्रम फैलाया जा रहा है। उधर, पटना ओल्ड बॉयज एलुमनी एसोसिएशन का कहना है कि डीएम द्वारा भेजे गए मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में चुनाव किया गया है, जिसमें नई टीम का गठन हुआ। बावजूद पुरानी टीमों द्वारा इस तरह का विवाद खड़ा करना चिंताजनक है। इस नई टीम को प्राचार्य और कॉलेज के सभी फैकल्टी का सहयोग प्राप्त है। दोनों गुटों द्वारा अलग-अलग रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ने पूर्ववर्ती छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। वे असमंजस में हैं कि किस गुट के पास पंजीकरण कराएँ। संस्थान के भीतर का तनाव तब सार्वजनिक हो गया, जब दोनों संगठनों ने प्राचार्य कक्ष के ठीक सामने अपने-अपने बैनर लगा दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो 101वें स्थापना दिवस जैसे ऐतिहासिक अवसर की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। प्राचार्य ने दोनों गुटों के साथ बैठक की स्थापना दिवस के सफल आयोजन और पूर्ववर्ती छात्र संगठन के दोनों गुटों में सुलह कराने को लेकर प्राचार्य की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पीएमसीएच टीचर्स एसोसिएशन के दर्जनों शिक्षकों के साथ-साथ पटना मेडिकल कॉलेज एलुमनी एसोसिएशन और पटना कॉलेज ओल्ड बॉयज एलुमनी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र दोनों पूर्व छात्र संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करना था। दोनों संगठनों से अपील की गई कि वे आपसी मतभेदों को भुलाकर कॉलेज के गौरवशाली स्थापना दिवस को मिल-जुलकर मनाएँ। हालाँकि, लंबी चर्चा के बावजूद दोनों गुटों में अब तक पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। यहाँ से निकले पद्म सम्मान प्राप्त चिकित्सक पद्म विभूषण डॉ. सी. पी. ठाकुर (पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री), पद्मश्री डॉ. शांति राय, पद्मश्री डॉ. एस. एन. आर्या, पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा, पद्मश्री डॉ. विजय प्रकाश, पद्मश्री डॉ. नरेंद्र प्रसाद, पद्मश्री डॉ. दिलीप कुमार सिंह, पद्मश्री डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह। पटना मेडिकल कॉलेज 101 वर्ष का होने जा रहा है। 1925 में स्थापित इस संस्थान की अपनी गरिमा है। यहाँ से निकले आठ डॉक्टरों को पद्म सम्मान से नवाजा जा चुका है। 1000 से अधिक ऐसे डॉक्टर हैं, जिनका देश-दुनिया में नाम है। इस संस्थान ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री तक दिया है। लेकिन, 101वें स्थापना दिवस समारोह से पहले पूर्ववर्ती छात्रों के बीच वर्चस्व को लेकर गुटबाजी शुरू हो गई है। बुजुर्ग डॉक्टरों के गुट को हटाकर वर्तमान डॉक्टरों का गुट एसोसिएशन पर अपना प्रभाव जमाना चाहता है। इसके लिए अलग-अलग बैनर तक टांग दिए गए हैं। इससे देश-विदेश में फैले संस्थान के पूर्ववर्ती छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। पटना मेडिकल कॉलेज ओल्ड बॉयज एलुमनी एसोसिएशन को वर्तमान और पूर्व प्राचार्यों का समर्थन प्राप्त है। उधर, दूसरे गुट पटना मेडिकल कॉलेज एलुमनी एसोसिएशन ने आधिकारिक इकाई होने का दावा किया है। अपना-अपना दावा पटना मेडिकल कॉलेज एलुमनी एसोसिएशन के संयोजक डॉ. सच्चिदानंद कुमार ने कहा कि यह पूरी तरह वैधानिक और सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था है। 101वें स्थापना दिवस एवं एलुमनी सम्मेलन के आयोजन की जिम्मेदारी इसी अधिकृत संस्था की है। कुछ व्यक्तियों द्वारा समानांतर दावेदारी कर भ्रम फैलाया जा रहा है। उधर, पटना ओल्ड बॉयज एलुमनी एसोसिएशन का कहना है कि डीएम द्वारा भेजे गए मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में चुनाव किया गया है, जिसमें नई टीम का गठन हुआ। बावजूद पुरानी टीमों द्वारा इस तरह का विवाद खड़ा करना चिंताजनक है। इस नई टीम को प्राचार्य और कॉलेज के सभी फैकल्टी का सहयोग प्राप्त है। दोनों गुटों द्वारा अलग-अलग रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ने पूर्ववर्ती छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। वे असमंजस में हैं कि किस गुट के पास पंजीकरण कराएँ। संस्थान के भीतर का तनाव तब सार्वजनिक हो गया, जब दोनों संगठनों ने प्राचार्य कक्ष के ठीक सामने अपने-अपने बैनर लगा दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो 101वें स्थापना दिवस जैसे ऐतिहासिक अवसर की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। प्राचार्य ने दोनों गुटों के साथ बैठक की स्थापना दिवस के सफल आयोजन और पूर्ववर्ती छात्र संगठन के दोनों गुटों में सुलह कराने को लेकर प्राचार्य की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पीएमसीएच टीचर्स एसोसिएशन के दर्जनों शिक्षकों के साथ-साथ पटना मेडिकल कॉलेज एलुमनी एसोसिएशन और पटना कॉलेज ओल्ड बॉयज एलुमनी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र दोनों पूर्व छात्र संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करना था। दोनों संगठनों से अपील की गई कि वे आपसी मतभेदों को भुलाकर कॉलेज के गौरवशाली स्थापना दिवस को मिल-जुलकर मनाएँ। हालाँकि, लंबी चर्चा के बावजूद दोनों गुटों में अब तक पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। यहाँ से निकले पद्म सम्मान प्राप्त चिकित्सक पद्म विभूषण डॉ. सी. पी. ठाकुर (पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री), पद्मश्री डॉ. शांति राय, पद्मश्री डॉ. एस. एन. आर्या, पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा, पद्मश्री डॉ. विजय प्रकाश, पद्मश्री डॉ. नरेंद्र प्रसाद, पद्मश्री डॉ. दिलीप कुमार सिंह, पद्मश्री डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह।


