मोतिहारी में छात्र की मौत पर हंगामा:इलाज में लापरवाही का आरोप, डीएम ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की

मोतिहारी में छात्र की मौत पर हंगामा:इलाज में लापरवाही का आरोप, डीएम ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की

मोतिहारी में एक सड़क दुर्घटना के बाद इलाज में लापरवाही के कारण एक छात्र की मौत हो गई। नगर थाना क्षेत्र के एलएनडी कॉलेज के सामने बस की टक्कर से घायल छात्र अभिषेक कुमार को सदर अस्पताल लाया गया था, जहां उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की है। इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं था मौजूद परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की इमरजेंसी में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था, जिससे अभिषेक को समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि शुरुआती उपचार कंपाउंडर द्वारा किया गया और गंभीर हालत के बावजूद छात्र को ऑक्सीजन तक नहीं दिया गया। परिजनों ने यह भी बताया कि छात्र को रेफर किए जाने के बाद समय पर एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी, जबकि अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस मौजूद थी। उनका दावा है कि हादसे के बाद करीब आधे घंटे तक छात्र जीवित था और यदि समय पर इलाज मिलता तो उसकी जान बच सकती थी। एसडीओ , सदर डीएसपी और सिविल सर्जन शामिल इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है, जिसमें सदर एसडीओ निशांत, सदर डीएसपी दिलीप कुमार और सिविल सर्जन शामिल हैं। डीएम सौरभ जोरवाल ने कहा कि छात्र की मौत के बाद परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच टीम सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल करेगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब जिले में उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन का दौरा प्रस्तावित है। इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट का इंतजार है। मोतिहारी में एक सड़क दुर्घटना के बाद इलाज में लापरवाही के कारण एक छात्र की मौत हो गई। नगर थाना क्षेत्र के एलएनडी कॉलेज के सामने बस की टक्कर से घायल छात्र अभिषेक कुमार को सदर अस्पताल लाया गया था, जहां उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की है। इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं था मौजूद परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की इमरजेंसी में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था, जिससे अभिषेक को समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि शुरुआती उपचार कंपाउंडर द्वारा किया गया और गंभीर हालत के बावजूद छात्र को ऑक्सीजन तक नहीं दिया गया। परिजनों ने यह भी बताया कि छात्र को रेफर किए जाने के बाद समय पर एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी, जबकि अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस मौजूद थी। उनका दावा है कि हादसे के बाद करीब आधे घंटे तक छात्र जीवित था और यदि समय पर इलाज मिलता तो उसकी जान बच सकती थी। एसडीओ , सदर डीएसपी और सिविल सर्जन शामिल इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है, जिसमें सदर एसडीओ निशांत, सदर डीएसपी दिलीप कुमार और सिविल सर्जन शामिल हैं। डीएम सौरभ जोरवाल ने कहा कि छात्र की मौत के बाद परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच टीम सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल करेगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब जिले में उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन का दौरा प्रस्तावित है। इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट का इंतजार है।  

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