कैमूर के कुदरा प्रखंड की भदौला पंचायत में पंचायत सरकार भवन के निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता के आरोप लगे हैं। वार्ड सदस्य अखिलेश चतुर्वेदी और स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर यह खुलासा किया है। उनका दावा है कि निर्माण में घटिया ईंटों का उपयोग किया जा रहा है और कई जगहों पर ढलाई के दौरान छड़ें खुली दिख रही हैं, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा निर्माण की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। वार्ड सदस्य अखिलेश चतुर्वेदी ने कहा, “यह निर्माण कार्य पूरी तरह लापरवाहीपूर्ण है। घटिया सामग्री से बने भवन से ग्रामीणों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।” पंचायत वासियों ने भी निर्माण में भारी गड़बड़ी की शिकायत करते हुए तत्काल जांच की मांग की है।
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग इस संबंध में कुदरा के प्रखंड विकास पदाधिकारी और कैमूर के जिला पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। स्थानीय लोग इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोका जा सके। यह घटना पंचायती राज विभाग की निगरानी पर भी सवाल उठा रही है। कैमूर के कुदरा प्रखंड की भदौला पंचायत में पंचायत सरकार भवन के निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता के आरोप लगे हैं। वार्ड सदस्य अखिलेश चतुर्वेदी और स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर यह खुलासा किया है। उनका दावा है कि निर्माण में घटिया ईंटों का उपयोग किया जा रहा है और कई जगहों पर ढलाई के दौरान छड़ें खुली दिख रही हैं, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा निर्माण की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। वार्ड सदस्य अखिलेश चतुर्वेदी ने कहा, “यह निर्माण कार्य पूरी तरह लापरवाहीपूर्ण है। घटिया सामग्री से बने भवन से ग्रामीणों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।” पंचायत वासियों ने भी निर्माण में भारी गड़बड़ी की शिकायत करते हुए तत्काल जांच की मांग की है।
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग इस संबंध में कुदरा के प्रखंड विकास पदाधिकारी और कैमूर के जिला पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। स्थानीय लोग इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोका जा सके। यह घटना पंचायती राज विभाग की निगरानी पर भी सवाल उठा रही है।


