अररिया के सदर अस्पताल में एक बार फिर लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। टीबी विभाग में मरीज को एक्सपायरी दवा देने के आरोप के बाद मंगलवार को परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर जमकर हंगामा किया। इस दौरान अस्पताल कर्मियों पर पैसे लेकर दवा देने का भी आरोप लगाया गया। दवा खाने के बाद बिगड़ी मरीज की हालत पीड़ित परिवार के अनुसार, 5 मार्च को उन्होंने अपने मरीज का इलाज सदर अस्पताल के टीबी विभाग में कराया था। वहां से दवा लेकर घर लौटने के बाद मरीज को दवा दी गई, लेकिन कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिवार के सदस्य शुरुआत में स्थिति को समझ नहीं पाए, लेकिन जब आसपास के लोगों को दवा दिखाई गई, तो उन्होंने बताया कि दवा एक्सपायरी है। इसके बाद परिजन आक्रोशित हो गए और मंगलवार को अस्पताल पहुंचकर विरोध जताया। पैसे लेकर दवा देने का आरोप परिजनों ने टीबी विभाग के एक कर्मी पर 1600 रुपये लेकर दवा देने का गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में दवाइयां मुफ्त मिलनी चाहिए, इसके बावजूद पैसे लिए गए और वह भी खराब दवा दी गई, जिससे मरीज की हालत और बिगड़ गई। अधिकारी ने आरोपों से किया इनकार वहीं टीबी विभाग के अधिकारी डॉ. मोईज ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि परिजन जो दवा लेकर आए थे, वह सरकारी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में टीबी की सभी दवाइयां मुफ्त दी जाती हैं और किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लिखित शिकायत मिलती है, तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले यह घटना एक बार फिर सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। इससे पहले भी यहां एक्सपायरी दवाइयों और अन्य अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जांच के संकेत, शिकायत की तैयारी स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती। जिला स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले की जांच के संकेत दिए हैं। पीड़ित परिवार ने कहा है कि वे इस मामले में लिखित शिकायत देंगे, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। अररिया के सदर अस्पताल में एक बार फिर लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। टीबी विभाग में मरीज को एक्सपायरी दवा देने के आरोप के बाद मंगलवार को परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर जमकर हंगामा किया। इस दौरान अस्पताल कर्मियों पर पैसे लेकर दवा देने का भी आरोप लगाया गया। दवा खाने के बाद बिगड़ी मरीज की हालत पीड़ित परिवार के अनुसार, 5 मार्च को उन्होंने अपने मरीज का इलाज सदर अस्पताल के टीबी विभाग में कराया था। वहां से दवा लेकर घर लौटने के बाद मरीज को दवा दी गई, लेकिन कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिवार के सदस्य शुरुआत में स्थिति को समझ नहीं पाए, लेकिन जब आसपास के लोगों को दवा दिखाई गई, तो उन्होंने बताया कि दवा एक्सपायरी है। इसके बाद परिजन आक्रोशित हो गए और मंगलवार को अस्पताल पहुंचकर विरोध जताया। पैसे लेकर दवा देने का आरोप परिजनों ने टीबी विभाग के एक कर्मी पर 1600 रुपये लेकर दवा देने का गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में दवाइयां मुफ्त मिलनी चाहिए, इसके बावजूद पैसे लिए गए और वह भी खराब दवा दी गई, जिससे मरीज की हालत और बिगड़ गई। अधिकारी ने आरोपों से किया इनकार वहीं टीबी विभाग के अधिकारी डॉ. मोईज ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि परिजन जो दवा लेकर आए थे, वह सरकारी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में टीबी की सभी दवाइयां मुफ्त दी जाती हैं और किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लिखित शिकायत मिलती है, तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले यह घटना एक बार फिर सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। इससे पहले भी यहां एक्सपायरी दवाइयों और अन्य अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जांच के संकेत, शिकायत की तैयारी स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती। जिला स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले की जांच के संकेत दिए हैं। पीड़ित परिवार ने कहा है कि वे इस मामले में लिखित शिकायत देंगे, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।


