जामताड़ा प्रखंड के उदलबनी पंचायत भवन में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य को ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने अनियमितता का आरोप लगाते हुए रोक दिया है। जिला परिषद योजना के तहत करीब 10 लाख रुपए की लागत से हो रहे इस कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां प्लास्टर किया जाना था, वहां बिना सही प्लास्टर के ही रंग-रोगन कर दिया गया। जिस स्थान पर टाइल्स लगनी थी, वहां केवल रंग कर कार्य पूरा दिखाया जा रहा है। टूटे हुए गेट को बदलने की बजाय पुराने गेट को ही ठीक कर दिया गया है। इसके अलावा, अब तक योजना का बोर्ड भी स्थल पर नहीं लगाया गया है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर संवेदक द्वारा उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी दी जाती है। शिकायत के बावजूद संवेदक मनमाने तरीके से काम करा रहा ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक अनुमान के अनुसार गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं होगा, तब तक काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा। ग्राम प्रधान अशोक पंडित ने बताया कि लगातार शिकायत के बावजूद संवेदक मनमाने तरीके से काम करा रहा था, जिसके विरोध में काम बंद कराया गया। पंचायत समिति सदस्य अमृत कुमार ने भी बिना सही प्लास्टर और वायरिंग के ही रंग-रोगन करने का आरोप लगाया। मामले की जानकारी मिलते ही विभाग के एसडीओ विमल कुमार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिकायतों की जांच कराई जाएगी और यदि कार्य में अनियमितता पाई गई तो संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी। एसडीओ ने यह भी स्पष्ट किया कि खराब कार्य का भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभाग के कनिष्ठ अभियंता को आवश्यक निर्देश दिए हैं। फिलहाल, ग्रामीणों के विरोध के बाद जीर्णोद्धार कार्य रोक दिया गया है और प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जामताड़ा प्रखंड के उदलबनी पंचायत भवन में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य को ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने अनियमितता का आरोप लगाते हुए रोक दिया है। जिला परिषद योजना के तहत करीब 10 लाख रुपए की लागत से हो रहे इस कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां प्लास्टर किया जाना था, वहां बिना सही प्लास्टर के ही रंग-रोगन कर दिया गया। जिस स्थान पर टाइल्स लगनी थी, वहां केवल रंग कर कार्य पूरा दिखाया जा रहा है। टूटे हुए गेट को बदलने की बजाय पुराने गेट को ही ठीक कर दिया गया है। इसके अलावा, अब तक योजना का बोर्ड भी स्थल पर नहीं लगाया गया है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर संवेदक द्वारा उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी दी जाती है। शिकायत के बावजूद संवेदक मनमाने तरीके से काम करा रहा ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक अनुमान के अनुसार गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं होगा, तब तक काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा। ग्राम प्रधान अशोक पंडित ने बताया कि लगातार शिकायत के बावजूद संवेदक मनमाने तरीके से काम करा रहा था, जिसके विरोध में काम बंद कराया गया। पंचायत समिति सदस्य अमृत कुमार ने भी बिना सही प्लास्टर और वायरिंग के ही रंग-रोगन करने का आरोप लगाया। मामले की जानकारी मिलते ही विभाग के एसडीओ विमल कुमार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिकायतों की जांच कराई जाएगी और यदि कार्य में अनियमितता पाई गई तो संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी। एसडीओ ने यह भी स्पष्ट किया कि खराब कार्य का भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभाग के कनिष्ठ अभियंता को आवश्यक निर्देश दिए हैं। फिलहाल, ग्रामीणों के विरोध के बाद जीर्णोद्धार कार्य रोक दिया गया है और प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


