खैरागढ़ के ग्राम पंचायत चोरलाडीह में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत स्वीकृत कार्यों में अनियमितता सामने आई है। मजदूरों से कार्य कराने के बजाय जेसीबी मशीन का उपयोग किया जा रहा है। दरअसल, जनपद पंचायत छुईंखदान के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत चोरलाडीह में भूमि समतलीकरण और तालाब सुधार का कार्य मनरेगा के तहत स्वीकृत है। आरोप है कि मजदूरों से काम लेने के बजाय जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। मौके पर मौजूद ग्रामीण हिमांचल लिल्हारे ने बताया कि उबड़-खाबड़ जमीन को गांव वालों की सहमति से निजी खर्च पर समतल कराया जा रहा है। उनका दावा है कि इस संबंध में गांव में मौखिक सहमति बनी है और पंचायत की इसमें कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा के तहत काम का समय अलग रखा गया है और जेसीबी से काम का समय अलग है। हालांकि जिस स्थल पर मनरेगा का कार्य स्वीकृत है, उसी स्थान पर मशीन से काम होना नियमों के उल्लंघन की आशंका को मजबूत करता है। सरपंच प्रतिनिधि का बयान सवालों में सरपंच प्रतिनिधि केवल सिंह ध्रुव ने कहा कि वह सुबह लगभग 10 बजे तक ही मौके पर रहते हैं। उसके बाद वहां क्या होता है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं रहती। नियमों के खिलाफ मशीनों का उपयोग मनरेगा योजना के प्रावधानों के अनुसार श्रमिकों को रोजगार देना इसका मुख्य उद्देश्य है। श्रम आधारित कार्यों में मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है। ऐसे में यदि मशीन से काम कराया जा रहा है तो यह नियमों का उल्लंघन है और मजदूरों के रोजगार अधिकार पर सीधा असर डालता है। हालांकि, अब तक जनपद पंचायत या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


