दरभंगा में भाजपा विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा ने आज अपने एवी सिग्नेचर फ्लैट प्रोजेक्ट का निरीक्षण कर निर्माण काम में भारी अनियमितता और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए। मौके पर पत्रकारों को बुलाकर उन्होंने अपने हिस्से के फ्लैटों की स्थिति दिखाई और बिल्डर की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। विधायक ने बताया कि उनके हिस्से के कुल 35 फ्लैट हैं, लेकिन एक भी फ्लैट पूरी तरह तैयार नहीं किया गया है। सभी फ्लैट अधूरे पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लिफ्ट घटिया गुणवत्ता की लगाई गई है, वहीं कमरों में बिजली, पंखा, लाइट, किचन और बाथरूम तक का काम अधूरा है। डॉ. झा ने कहा कि एग्रीमेंट के अनुसार मार्च 2024 तक फ्लैट पूरी तरह तैयार कर उन्हें सौंप दिया जाना था, लेकिन बार-बार आग्रह के बावजूद बिल्डर ने काम पूरा नहीं किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिल्डर ने अपने हिस्से के 60 फ्लैट बेच दिए, जबकि उनके हिस्से के फ्लैटों को अधूरा छोड़ दिया गया। टॉप फ्लेर तक जाकर लिया स्थिति का जायजा निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्राउंड फ्लोर से लेकर फर्स्ट फ्लोर,सेकेंड फ्लोर और टॉप फ्लोर तक जाकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने छत और दीवारों में दरारें, अधूरा स्विमिंग पूल, जिम और पार्किंग जैसी कई खामियां भी मीडिया को दिखाईं। विधायक ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि नगर निगम से सूचना मांगने पर उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी के नाम से फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया है। इसको लेकर उन्होंने नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि बिल्डर की ओर से एआई तकनीक का इस्तेमाल कर उनका एक ऑडियो भी वायरल किया गया, जिससे उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई। डॉ. झा ने कहा कि अब वह इस मामले की लिखित शिकायत रेरा (RERA) में करेंगे और पूरे निर्माण काम में हुई गड़बड़ियों को उजागर करेंगे। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट उनकी पत्नी के नाम पर है और इसमें कुल पांच पार्टनर शामिल हैं, जिनमें एक उनके परिचित भी हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब बचे हुए कार्य को पूरा करने के नाम पर बिल्डर उनसे 70 लाख रुपये की मांग कर रहा है, जबकि एग्रीमेंट में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
विधायक ने कहा कि जब मामला सार्वजनिक हुआ है, तब जाकर बिल्डर ने जल्दबाजी में काम शुरू किया है, लेकिन इसे पूरा होने में अभी कम से कम छह महीने का समय लग सकता है। इस पूरे मामले ने निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरभंगा में भाजपा विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा ने आज अपने एवी सिग्नेचर फ्लैट प्रोजेक्ट का निरीक्षण कर निर्माण काम में भारी अनियमितता और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए। मौके पर पत्रकारों को बुलाकर उन्होंने अपने हिस्से के फ्लैटों की स्थिति दिखाई और बिल्डर की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। विधायक ने बताया कि उनके हिस्से के कुल 35 फ्लैट हैं, लेकिन एक भी फ्लैट पूरी तरह तैयार नहीं किया गया है। सभी फ्लैट अधूरे पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लिफ्ट घटिया गुणवत्ता की लगाई गई है, वहीं कमरों में बिजली, पंखा, लाइट, किचन और बाथरूम तक का काम अधूरा है। डॉ. झा ने कहा कि एग्रीमेंट के अनुसार मार्च 2024 तक फ्लैट पूरी तरह तैयार कर उन्हें सौंप दिया जाना था, लेकिन बार-बार आग्रह के बावजूद बिल्डर ने काम पूरा नहीं किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिल्डर ने अपने हिस्से के 60 फ्लैट बेच दिए, जबकि उनके हिस्से के फ्लैटों को अधूरा छोड़ दिया गया। टॉप फ्लेर तक जाकर लिया स्थिति का जायजा निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्राउंड फ्लोर से लेकर फर्स्ट फ्लोर,सेकेंड फ्लोर और टॉप फ्लोर तक जाकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने छत और दीवारों में दरारें, अधूरा स्विमिंग पूल, जिम और पार्किंग जैसी कई खामियां भी मीडिया को दिखाईं। विधायक ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि नगर निगम से सूचना मांगने पर उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी के नाम से फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया है। इसको लेकर उन्होंने नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि बिल्डर की ओर से एआई तकनीक का इस्तेमाल कर उनका एक ऑडियो भी वायरल किया गया, जिससे उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई। डॉ. झा ने कहा कि अब वह इस मामले की लिखित शिकायत रेरा (RERA) में करेंगे और पूरे निर्माण काम में हुई गड़बड़ियों को उजागर करेंगे। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट उनकी पत्नी के नाम पर है और इसमें कुल पांच पार्टनर शामिल हैं, जिनमें एक उनके परिचित भी हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब बचे हुए कार्य को पूरा करने के नाम पर बिल्डर उनसे 70 लाख रुपये की मांग कर रहा है, जबकि एग्रीमेंट में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
विधायक ने कहा कि जब मामला सार्वजनिक हुआ है, तब जाकर बिल्डर ने जल्दबाजी में काम शुरू किया है, लेकिन इसे पूरा होने में अभी कम से कम छह महीने का समय लग सकता है। इस पूरे मामले ने निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।


