MP हाउसिंग बोर्ड में 650 करोड़ की गड़बड़ी! चयनित कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप

MP हाउसिंग बोर्ड में 650 करोड़ की गड़बड़ी! चयनित कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप

MP News: मप्र हाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा जारी लगभग 650 करोड़ के पुनर्निर्माण टेंडर विवादों में आ गए हैं। निविदा में तकनीकी पात्रता को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। लोकायुक्त को की गई शिकायत में बोर्ड के टेंडर को ‘टेलर-मेड’ अर्थात चयनित एजेंसियों को लाभ पहुंचाने वाला बताया गया है। लोकायुक्त को भेजी गई शिकायत में आरोप है कि हाउसिंग बोर्ड के टेंडर क्रमांक 17/2025-26 में शर्ते प्रतिस्पर्धा को सीमित करने वाली हैं और इससे शासन को आर्थिक हानि होने की आशंका है। आरोप है कि निविदा में ऐसी शर्तें रखीं, जिससे कई अनुभवी एजेंसियां बाहर जाएं।

ऐसी शर्ते की सक्षम भी अपात्र

शिकायतकर्ता के अनुसार, निविदा में भवन ऊंचाई, कार्य अनुभव और निर्माण तकनीक से जुड़ी शर्तें प्रतिबंधात्मक हैं। उदाहरण के तौर पर 45 मीटर ऊंचाई का अनुभव अनिवार्य किया, जबकि प्रदेश में कई एजेंसियों ने इससे कम ऊंचाई के लेकिन जटिल और बड़े प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इसी प्रकार एल्यूमिनियम/मिवान फॉर्मवर्क में केवल पूर्ण कार्य का अनुभव मांगा गया है, जबकि चल रहे प्रोजेक्ट को मान्यता नहीं दी गई। इससे भी कई सक्षम कंपनियां पात्रता से बाहर हो रही हैं।

केंद्रीय सतर्कता आयोग के नियमों की अनदेखी

आरटीआइ एक्टिविस्ट सुनील मिश्र ने शिकायत में केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में हाल के वर्षों में हाई-राइज व कॉमर्शियल निर्माण कार्यों में कई नई कंपनियों ने क्षमता विकसित की है, लेकिन निविदा की शर्तों के कारण उन्हें भागीदारी का अवसर नहीं मिल पा रहा। इस मामले निविदा शर्तों की स्वतंत्र तकनीकी
जांच की जानी चाहिए।

टेंडर में बताई यह कमियां

  • 45 मीटर ऊंचाई का अनुभव अनिवार्य, जो अनावश्यक रूप से सीमित करने वाला बताया गया।
  • एल्यूमिनियम/मिवान तकनीक में केवल पूर्ण प्रोजेक्ट का अनुभव मान्य, चल रहे कार्यों को मान्यता नहीं दी गई।
  • पात्रता शर्तें अत्यधिक तकनीकी और प्रतिबंधात्मक होने से प्रतिस्पर्धा कम होने की आशंका।
  • बाजार में उपलब्ध व्यापक अनुभव वाली कंपनियों की भागीदारी स्वतः समाप्त होना।
  • जी-टेंडर बैठक के दौरान उठी आपत्तियों पर पर्याप्त विचार नहीं किए जाने का आरोप।

डिप्टी कमिश्नर ने कहा…

निविदा में विशेष शर्तें रखी हैं ताकि हाई राइज बिल्डिंग के लिए योग्य कंपनियां ही शामिल हों। बाकि सभी शर्तें पीडब्ल्यूडी के अनुरूप हैं। टेलर मेड कंडीशन के आरोप निराधार हैं।- एनके साहू, डिप्टी कमिश्नर, मप्र हाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड

ये नुकसान होंगे

  • सीमित प्रतिस्पर्धा के कारण परियोजना लागत 20-25 करोड़ रुपए तक बढ़ने की आशंका जताई।
  • निष्पक्ष मूल्य खोज प्रभावित होने का खतरा।
  • सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता पर सवाल।
  • भविष्य में वित्तीय अनियमितता या गषडबी के चलते जांच की स्थिति बनने की संभावना।
  • निर्माण क्षेत्र में नई और सक्षम निर्माण एजेंसियों के अवसर कम होना। (MP News)

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