पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। एमबीबीएस और पीजी अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं। भास्कर डिजिटल की टीम जब पड़ताल के लिए IGIMS पहुंची तो निदेशक कार्यालय से उनके छुट्टी पर होने की जानकारी मिली। इन आरोपों के बीच संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे का अचानक छुट्टी पर चले जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। परीक्षा में धांधली और पेपर लीक का मामला यह मामला एक बेनाम ई-मेल के जरिए सामने आया था। 13 मार्च को ही परीक्षा में धांधली और पेपर लीक को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। चार सदस्यीय जांच समिति का गठन आरोपों के तूल पकड़ने पर और मामला सामने आने के करीब 28 दिनों बाद संस्थान के प्रभारी निदेशक ने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। शुक्रवार को IGIMS के प्रशासनिक भवन में इस संबंध में एक बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता प्रभारी निदेशक सह डीन (अकादमिक) डॉ. ओम कुमार ने की। इस समिति में पीएसएम विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार को अध्यक्ष बनाया गया है। डॉ. ज्ञान भाष्कर और डॉ. अश्विनी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। रिपोर्ट मिलते ही आगे कार्रवाई होगी- प्रभारी निदेशक प्रभारी निदेशक डॉ. ओम कुमार ने बताया कि, ‘समिति को एमबीबीएस और पीजी अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में लगे आरोपों की जांच के लिए सात कार्य दिवस का समय दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रिंसिपल को जांच से बाहर रखने पर विवाद इस पूरे मामले में एक और बड़ा विवाद सामने आया है। आईजीआईएमएस के प्रिंसिपल डॉ. रंजीत गुहा ने खुद को जांच प्रक्रिया से अलग रखने पर गंभीर सवाल उठ रहा हैं। उन्होंने कहा कि, ‘यह मामला सीधे तौर पर एमबीबीएस और पीजी छात्रों से जुड़ा है, जो उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद उन्हें न तो बैठक में बुलाया गया और न ही जांच समिति में शामिल किया गया।’ डॉ. गुहा के अनुसार, 13 मार्च से अब तक इस मुद्दे पर चार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन उन्हें किसी भी बैठक की सूचना तक नहीं दी गई। यहां तक कि आंतरिक समिति की बैठकों से भी उन्हें दूर रखा गया। जो जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है? उन्होंने यह भी कहा कि, ‘फिलहाल छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षाएं चल रही हैं और उनके समाप्त होते ही वे छात्रों से सीधे संवाद कर पूरी जानकारी लेंगे।’ पेपर लीक और आंसर शीट की डील का गंभीर आरोप मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि परीक्षा में धांधली के लिए मोटी रकम वसूले जाने के आरोप लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि, एमबीबीएस फाइनल ईयर की परीक्षा में पेपर लीक कराने और उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर के लिए लाखों में डील की गई। जो बेहद ही गंभीर हैं और पेशे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। वहीं, MBBS छात्रों की कैरियर को भी प्रभावित कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ‘पेपर लीक कराने और आंसर शीट बाहर से लिखवाने के लिए अलग-अलग रेट तय किए गए थे। यह भी आरोप है कि कुछ छात्रों की कॉपियां बाहर से लिखवाई गईं और बाद में उन्हें सिस्टम में एडजस्ट किया गया।’ सीसीटीवी फुटेज और प्रारंभिक जांच में संकेत सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा शाखा में लगे सीसीटीवी कैमरों में कुछ संदिग्ध गतिविधियां भी कैद हुई हैं। फुटेज में परीक्षार्थियों का असामान्य समय पर आना-जाना देखा गया है, जिससे संदेह और गहरा गया है। हालांकि, अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पहले भी हुई थी प्रारंभिक जांच, नहीं हुई कार्रवाई इस मामले में पहले भी एक प्रारंभिक जांच की जा चुकी है, जिसमें कुछ अनियमितताओं के संकेत मिले थे। लेकिन बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यही कारण है कि अब जब मामला सार्वजनिक हुआ है, तो संस्थान की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सात दिन में रिपोर्ट, फिर तय होगी कार्रवाई फिलहाल सभी की नजर जांच समिति पर टिकी हुई है, जिसे सात कार्य दिवस में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि आरोप कितने सही हैं और किन लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ आईजीआईएमएस बल्कि पूरे राज्य के मेडिकल शिक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा झटका होगा। यह मामला सिर्फ एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि जांच समिति कितनी निष्पक्षता से जांच करती है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या नहीं। पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। एमबीबीएस और पीजी अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं। भास्कर डिजिटल की टीम जब पड़ताल के लिए IGIMS पहुंची तो निदेशक कार्यालय से उनके छुट्टी पर होने की जानकारी मिली। इन आरोपों के बीच संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे का अचानक छुट्टी पर चले जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। परीक्षा में धांधली और पेपर लीक का मामला यह मामला एक बेनाम ई-मेल के जरिए सामने आया था। 13 मार्च को ही परीक्षा में धांधली और पेपर लीक को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। चार सदस्यीय जांच समिति का गठन आरोपों के तूल पकड़ने पर और मामला सामने आने के करीब 28 दिनों बाद संस्थान के प्रभारी निदेशक ने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। शुक्रवार को IGIMS के प्रशासनिक भवन में इस संबंध में एक बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता प्रभारी निदेशक सह डीन (अकादमिक) डॉ. ओम कुमार ने की। इस समिति में पीएसएम विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार को अध्यक्ष बनाया गया है। डॉ. ज्ञान भाष्कर और डॉ. अश्विनी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। रिपोर्ट मिलते ही आगे कार्रवाई होगी- प्रभारी निदेशक प्रभारी निदेशक डॉ. ओम कुमार ने बताया कि, ‘समिति को एमबीबीएस और पीजी अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में लगे आरोपों की जांच के लिए सात कार्य दिवस का समय दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रिंसिपल को जांच से बाहर रखने पर विवाद इस पूरे मामले में एक और बड़ा विवाद सामने आया है। आईजीआईएमएस के प्रिंसिपल डॉ. रंजीत गुहा ने खुद को जांच प्रक्रिया से अलग रखने पर गंभीर सवाल उठ रहा हैं। उन्होंने कहा कि, ‘यह मामला सीधे तौर पर एमबीबीएस और पीजी छात्रों से जुड़ा है, जो उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद उन्हें न तो बैठक में बुलाया गया और न ही जांच समिति में शामिल किया गया।’ डॉ. गुहा के अनुसार, 13 मार्च से अब तक इस मुद्दे पर चार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन उन्हें किसी भी बैठक की सूचना तक नहीं दी गई। यहां तक कि आंतरिक समिति की बैठकों से भी उन्हें दूर रखा गया। जो जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है? उन्होंने यह भी कहा कि, ‘फिलहाल छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षाएं चल रही हैं और उनके समाप्त होते ही वे छात्रों से सीधे संवाद कर पूरी जानकारी लेंगे।’ पेपर लीक और आंसर शीट की डील का गंभीर आरोप मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि परीक्षा में धांधली के लिए मोटी रकम वसूले जाने के आरोप लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि, एमबीबीएस फाइनल ईयर की परीक्षा में पेपर लीक कराने और उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर के लिए लाखों में डील की गई। जो बेहद ही गंभीर हैं और पेशे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। वहीं, MBBS छात्रों की कैरियर को भी प्रभावित कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ‘पेपर लीक कराने और आंसर शीट बाहर से लिखवाने के लिए अलग-अलग रेट तय किए गए थे। यह भी आरोप है कि कुछ छात्रों की कॉपियां बाहर से लिखवाई गईं और बाद में उन्हें सिस्टम में एडजस्ट किया गया।’ सीसीटीवी फुटेज और प्रारंभिक जांच में संकेत सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा शाखा में लगे सीसीटीवी कैमरों में कुछ संदिग्ध गतिविधियां भी कैद हुई हैं। फुटेज में परीक्षार्थियों का असामान्य समय पर आना-जाना देखा गया है, जिससे संदेह और गहरा गया है। हालांकि, अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पहले भी हुई थी प्रारंभिक जांच, नहीं हुई कार्रवाई इस मामले में पहले भी एक प्रारंभिक जांच की जा चुकी है, जिसमें कुछ अनियमितताओं के संकेत मिले थे। लेकिन बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यही कारण है कि अब जब मामला सार्वजनिक हुआ है, तो संस्थान की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सात दिन में रिपोर्ट, फिर तय होगी कार्रवाई फिलहाल सभी की नजर जांच समिति पर टिकी हुई है, जिसे सात कार्य दिवस में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि आरोप कितने सही हैं और किन लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ आईजीआईएमएस बल्कि पूरे राज्य के मेडिकल शिक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा झटका होगा। यह मामला सिर्फ एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि जांच समिति कितनी निष्पक्षता से जांच करती है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।


