मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JNKTMCH) का संचालन कथित रूप से दलालों के प्रभाव में होने का आरोप कोशी क्षेत्र के विधान पार्षद डॉ. अजय कुमार सिंह ने लगाया है। उन्होंने बिहार विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की। MLC ने सदन में कहा कि मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले आम मरीजों को बेहतर उपचार का भरोसा दिलाकर बाहरी निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इस पूरे प्रक्रिया में कथित तौर पर दलालों की सक्रिय भूमिका रहती है, जिससे न केवल मरीजों का आर्थिक शोषण होता है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की साख पर भी सवाल खड़े होते हैं। नर्सिंग स्टाफ के बड़े पैमाने पर रिक्त पद
डॉ. सिंह ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच डीएम से कराए जाने की मांग की। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों, तकनीशियनों और नर्सिंग स्टाफ के बड़े पैमाने पर रिक्त पदों की ओर भी ध्यान दिलाया। डॉ. सिंह ने कहा कि आवश्यक मानव संसाधन के अभाव में मरीजों को समुचित इलाज उपलब्ध कराना संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, ताकि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें। वर्षों से बहाली लंबित क्यों
सदन में स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि राज्य में चिकित्सकों की कमी है और बहाली की प्रक्रिया चल रही है। इस पर विधान पार्षद ने सवाल उठाया कि वर्षों से बहाली लंबित क्यों है। डॉ. अजय कुमार सिंह ने यह भी आश्चर्य व्यक्त किया कि बिना पर्याप्त प्राध्यापकों और समुचित पठन-पाठन व्यवस्था के मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्र किस प्रकार डिग्री प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह राज्य के विद्यार्थियों को किस स्तर का डॉक्टर बनाना चाहती है। विधान पार्षद ने मेडिकल कॉलेज परिसर, विशेषकर गर्ल्स हॉस्टल में आपूर्ति किए जा रहे दूषित पेयजल की समस्या को भी गंभीर बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा संस्थान में मूलभूत सुविधाओं का अभाव चिंताजनक है। मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JNKTMCH) का संचालन कथित रूप से दलालों के प्रभाव में होने का आरोप कोशी क्षेत्र के विधान पार्षद डॉ. अजय कुमार सिंह ने लगाया है। उन्होंने बिहार विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की। MLC ने सदन में कहा कि मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले आम मरीजों को बेहतर उपचार का भरोसा दिलाकर बाहरी निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इस पूरे प्रक्रिया में कथित तौर पर दलालों की सक्रिय भूमिका रहती है, जिससे न केवल मरीजों का आर्थिक शोषण होता है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की साख पर भी सवाल खड़े होते हैं। नर्सिंग स्टाफ के बड़े पैमाने पर रिक्त पद
डॉ. सिंह ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच डीएम से कराए जाने की मांग की। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों, तकनीशियनों और नर्सिंग स्टाफ के बड़े पैमाने पर रिक्त पदों की ओर भी ध्यान दिलाया। डॉ. सिंह ने कहा कि आवश्यक मानव संसाधन के अभाव में मरीजों को समुचित इलाज उपलब्ध कराना संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, ताकि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें। वर्षों से बहाली लंबित क्यों
सदन में स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि राज्य में चिकित्सकों की कमी है और बहाली की प्रक्रिया चल रही है। इस पर विधान पार्षद ने सवाल उठाया कि वर्षों से बहाली लंबित क्यों है। डॉ. अजय कुमार सिंह ने यह भी आश्चर्य व्यक्त किया कि बिना पर्याप्त प्राध्यापकों और समुचित पठन-पाठन व्यवस्था के मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्र किस प्रकार डिग्री प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह राज्य के विद्यार्थियों को किस स्तर का डॉक्टर बनाना चाहती है। विधान पार्षद ने मेडिकल कॉलेज परिसर, विशेषकर गर्ल्स हॉस्टल में आपूर्ति किए जा रहे दूषित पेयजल की समस्या को भी गंभीर बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा संस्थान में मूलभूत सुविधाओं का अभाव चिंताजनक है।


