मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी घरौनी स्वामित्व योजना मिल्कीपुर विकासखंड में कथित भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं के कारण विवादों में घिर गई है। ग्रामीणों को आबादी भूमि पर मालिकाना हक देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में पूर्ण वितरण से पहले ही स्वामित्व को लेकर शिकायतें सामने आने लगी हैं। उप जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। विकासखंड मिल्कीपुर की ग्राम पंचायत मिल्कीपुर में तत्कालीन लेखपाल और राजस्व कर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बुजुर्गों और नाबालिगों की आबादी भूमि पर ग्राम प्रधान के पिता और भाई के नाम घरौनी दर्ज कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, प्रधान के पिता के नाम दर्ज कम क्षेत्रफल वाली भूमि को निरस्त कर दूसरे हिस्सेदार के नाम किया गया, जबकि अधिक क्षेत्रफल वाली भूमि प्रधान के भाई के नाम दर्ज करा दी गई। ग्राम पंचायत मिल्कीपुर निवासी प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने शिकायत की है कि उनके निर्मित मकान का क्षेत्रफल घरौनी में नहीं दर्शाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि गाटा संख्या 527, जो उनके पिता कृष्ण बलदेव और दादा रामसुंदर के नाम आबादी दर्ज है, उस भूमि पर बिना निर्माण वाले हिस्से को अलग-अलग प्लाटों में बांटकर अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया है। गांव में इसी तरह की कई अन्य गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, गया प्रसाद विश्वकर्मा के मकान को जगतलाल विश्वकर्मा के नाम दर्ज कर दिया गया, जबकि जगतलाल के मकान को खाली भूमि दिखा दिया गया। कई अर्धनिर्मित भवनों में केवल पति का नाम दर्ज किया गया या आधा हिस्सा किसी अन्य व्यक्ति के नाम जोड़ दिया गया। इस पूरे मामले पर उप जिलाधिकारी सुधीर कुमार ने बताया कि शिकायतों की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि पहले की घरौनी में स्वामित्व सही था और अब उसमें बदलाव हुआ है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।


