जांच के नाम पर देरी नहीं चलेगी: कुंभ भगदड़ पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त

जांच के नाम पर देरी नहीं चलेगी: कुंभ भगदड़ पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त

Allahabad High Court : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कुंभ मेला प्राधिकरण और राज्य सरकार द्वारा गठित जांच आयोग को साफ निर्देश दिए हैं कि भगदड़ में जान गंवाने वाली महिला के परिजनों को 30 दिनों के भीतर मुआवजा दिया जाए। अदालत ने कहा है कि जांच अभी लंबित होने का बहाना बनाकर मुआवजा देने में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि पीड़ित परिवार पहले ही भारी नुकसान झेल चुका है, ऐसे में मुआवजा रोकना या टालना न्याय के खिलाफ होगा। खंडपीठ ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन ना करने पर इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।

क्या है पूरा मामला

यह मामला 29 जनवरी 2025 की सुबह कुंभ मेले के संगम स्नान क्षेत्र में मची भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी और कई अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। राज्य सरकार ने अनुग्रह राशि के रूप में मुआवजे की घोषणा तो की थी, लेकिन याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद अधिकारियों की ओर से लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

आयोग अभी दावों की जांच कर रहा

वहीं राज्य सरकार का कहना था कि जांच आयोग अभी दावों की जांच कर रहा है और जनहित को देखते हुए समय सीमा बढ़ाई गई है, क्योंकि पीड़ित परिवारों के बयान अलग-अलग चरणों में दर्ज किए जा रहे हैं। इस पर याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जांच की प्रक्रिया के नाम पर उस मौत के मुआवजे को अनिश्चित काल तक नहीं रोक सकती जिसे पहले ही स्वीकार किया जा चुका है।

जल्द निपटारा किया जाना जरूरी

न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ ने मुआवजे के मामले को अब और लटकाने से इनकार करते हुए राज्य सरकार की ज्यादा समय मांगने वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पहले एक विस्तृत आदेश में अधिकारियों से व्यक्तिगत हलफनामे मांगे गए थे ,लेकिन अब इस मामले को और लंबित रखना उचित नहीं है। न्यायालय ने साफ कहा कि इस स्तर पर याचिकाकर्ता के मुआवजे से जुड़े दावे का जल्द से जल्द निपटारा किया जाना जरूरी है।

अदालत ने दी सख्त चेतावनी

इसी के साथ पीठ ने जांच आयोग और कुंभ मेला प्राधिकरण दोनों को निर्देश दिए कि 30 दिनों के भीतर मुआवजे की पूरी प्रक्रिया पूरी की जाए। अदालत ने सख्त चेतावनी दी कि अगर आदेश का पालन नहीं हुआ तो मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। इसके साथ ही राज्य सरकार से कहा गया है कि अगली सुनवाई तक वह मुआवजा दिए जाने से जुड़ा अपना निर्णय रिकॉर्ड पर दर्ज करें ।

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