मुजफ्फरपुर प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड मामले में तीनों आरोपी बरी:कोर्ट ने दिया आदेश, साक्ष्य के अभाव में आरोपियों की रिहाई

मुजफ्फरपुर प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड मामले में तीनों आरोपी बरी:कोर्ट ने दिया आदेश, साक्ष्य के अभाव में आरोपियों की रिहाई

मुजफ्फरपुर में प्रॉपर्टी डीलर राजीव कुमार हत्याकांड मामला में अदालत ने आज बड़ा फैसला सुनाया। लगभग ढाई साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, अदालत ने मामले के तीनों नामजद आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इस निर्णय से जिला पुलिस की जांच प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना 2 जुलाई 2023 को मानियारी थाना क्षेत्र में हुई थी। बाइक सवार हमलावरों ने प्रॉपर्टी डीलर राजीव कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शक के आधार पर सुशील पासवान, गुरुचरण राय और बुलबुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अंतिम सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील संजय कुमार ने तर्क दिया कि पुलिस ने उनके मुवक्किलों को केवल संदेह के आधार पर फंसाया था। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस या वैज्ञानिक साक्ष्य पेश करने में विफल रहा। गवाहों के बयानों और पुलिस की चार्जशीट में भी विसंगतियां मिलीं। पर्याप्त सबूतों के अभाव में न्यायालय ने सुशील पासवान, गुरुचरण राय और बुलबुल को निर्दोष मानते हुए रिहा करने का आदेश दिया। पत्नी ने जताया न्याय पर भरोसा बता दें कि सुशील और गुरुचरण पहले से जमानत पर थे, लेकिन तीसरा आरोपी बुलबुल पिछले ढाई साल से जेल की सलाखों के पीछे था। रिहाई के बाद बुलबुल की पत्नी पूजा कुमारी ने कहा, “हमें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। मेरे पति को झूठे मामले में फंसाया गया था, आज सच्चाई की जीत हुई है।” हत्याकांड के कुछ अन्य आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। मुख्य आरोपियों के बरी होने के बाद अब पुलिस के लिए यह गुत्थी और उलझ गई है। मुजफ्फरपुर में प्रॉपर्टी डीलर राजीव कुमार हत्याकांड मामला में अदालत ने आज बड़ा फैसला सुनाया। लगभग ढाई साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, अदालत ने मामले के तीनों नामजद आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इस निर्णय से जिला पुलिस की जांच प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना 2 जुलाई 2023 को मानियारी थाना क्षेत्र में हुई थी। बाइक सवार हमलावरों ने प्रॉपर्टी डीलर राजीव कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शक के आधार पर सुशील पासवान, गुरुचरण राय और बुलबुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अंतिम सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील संजय कुमार ने तर्क दिया कि पुलिस ने उनके मुवक्किलों को केवल संदेह के आधार पर फंसाया था। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस या वैज्ञानिक साक्ष्य पेश करने में विफल रहा। गवाहों के बयानों और पुलिस की चार्जशीट में भी विसंगतियां मिलीं। पर्याप्त सबूतों के अभाव में न्यायालय ने सुशील पासवान, गुरुचरण राय और बुलबुल को निर्दोष मानते हुए रिहा करने का आदेश दिया। पत्नी ने जताया न्याय पर भरोसा बता दें कि सुशील और गुरुचरण पहले से जमानत पर थे, लेकिन तीसरा आरोपी बुलबुल पिछले ढाई साल से जेल की सलाखों के पीछे था। रिहाई के बाद बुलबुल की पत्नी पूजा कुमारी ने कहा, “हमें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। मेरे पति को झूठे मामले में फंसाया गया था, आज सच्चाई की जीत हुई है।” हत्याकांड के कुछ अन्य आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। मुख्य आरोपियों के बरी होने के बाद अब पुलिस के लिए यह गुत्थी और उलझ गई है।  

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