गयाजी में श्मशान घाट के नाम पर लगातार नए-नए प्रयोग हो रहे हैं, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुचारू नहीं हो सकी है। अब एक बार फिर नया मॉडल लाने की तैयारी शुरू हो गई है, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नया मॉडल सीताकुंड के पास बनाया जाएगा। नया मॉडल एलपीजी से चलेगा। यही नहीं, विष्णुपद के निकट आने वाले सभी शवदाह गृह शिफ्ट किए जाएंगे। इसकी भी तैयारी शुरू हो गई है। योजना तैयार की जा रही है फिर डीपीआर बनाया जाएगा। 2018-19 में 6 करोड़ रुपए खर्च किया गया था सबसे पहले 2018-19 में नगर निगम ने करीब 6 करोड़ रुपये खर्च कर अत्याधुनिक मशीन युक्त मुक्तिधाम बनाया था। दावा किया गया था कि सिर्फ 120 किलोग्राम लकड़ी में शव का अंतिम संस्कार हो जाएगा और पर्यावरण को भी कम नुकसान होगा। लेकिन यह योजना लोगों को रास नहीं आई। हालात यह है कि इस मशीन का इस्तेमाल लगभग बंद है। आम लोग तो दूर, शहर के प्रभावशाली और संपन्न परिवार भी इस सुविधा से दूरी बनाए हुए हैं। सभी के सभी पारंपरिक तरीके से शवों का अंतिम संस्कार में भरोसा जता रहे हैं। पारंपरिक तरीके का श्मशान घाट विष्णुपद श्मशान घाट के पास ही है। इसे किसी समय में नगर विधायक प्रेम कुमार कुमार की पहल पर बनाया गया था। खास बात यह कि यह वर्षों तक सुनसान पड़ा रहा। लेकिन जब नदी में शवों को जलाए जाने पर प्रतिबंध लगा तो यह स्थान गुलजार हो गया। इस बीच एक और खेल शुरू हो गया। आरोप है कि अंतिम संस्कार के नाम पर प्रमाण पत्र बेचने का धंधा चलने लगा। यानी सुविधा भले न चले, लेकिन उससे जुड़े कागजों का इस्तेमाल जारी है। विष्णुपद श्मशान घाट के पास इलेक्ट्रिक शवदाह गृह की योजना भी फेल मशीन युक्त मुक्तिधाम के फेल होने के बाद नगर निगम ने विष्णुपद श्मशान घाट के पास इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनाने की योजना शुरू की। करोड़ों रुपये की लागत से इसका निर्माण भी शुरू हुआ। लेकिन जब यह परियोजना पूरी होने के करीब पहुंची, तब यह क्षेत्र कॉरिडोर में आ गया। जिला प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी। नतीजा यह योजना भी अधर में लटक गई। अब एलपीजी गैस से शवों के अंतिम संस्कार कराने की योजना अब तीसरा प्रयोग सामने आया है। सीताकुंड के पास नए श्मशान घाट के लिए जमीन एक एनजीओ को दी गई है। यहां एलपीजी गैस से शवों का अंतिम संस्कार कराने की योजना है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में नगर निगम सीधे तौर पर पैसा नहीं लगा रहा है। नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने इसकी पुष्टि की है।
पूर्व पार्षद बोले- श्मशान घाट के नाम पर जनता के पैसे की लूट इधर, इस पूरे मामले पर सवाल भी तेज हो गए हैं। पूर्व वार्ड पार्षद लाल जी प्रसाद ने साफ कहा कि श्मशान घाट के नाम पर जनता के पैसे की लूट हो रही है। उनका आरोप है कि करोड़ों खर्च कर बनाए गए मुक्तिधाम का कोई उपयोग नहीं हो रहा। इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का काम भी बीच में ही रुक गया। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है। वहीं, नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया का कहना है कि विष्णुपद इलाके के सभी श्मशान घाट कॉरिडोर परियोजना में आ रहे हैं, इसलिए वे प्रभावित होंगे। उन्होंने बताया कि अब बाइपास पुल के पास नया श्मशान घाट विकसित करने की योजना बनाई जा रही है और इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है। श्मशान घाट को लेकर लगातार हो रहे प्रयोगों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों को अब एक स्थायी और भरोसेमंद व्यवस्था का इंतजार है। गयाजी में श्मशान घाट के नाम पर लगातार नए-नए प्रयोग हो रहे हैं, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुचारू नहीं हो सकी है। अब एक बार फिर नया मॉडल लाने की तैयारी शुरू हो गई है, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नया मॉडल सीताकुंड के पास बनाया जाएगा। नया मॉडल एलपीजी से चलेगा। यही नहीं, विष्णुपद के निकट आने वाले सभी शवदाह गृह शिफ्ट किए जाएंगे। इसकी भी तैयारी शुरू हो गई है। योजना तैयार की जा रही है फिर डीपीआर बनाया जाएगा। 2018-19 में 6 करोड़ रुपए खर्च किया गया था सबसे पहले 2018-19 में नगर निगम ने करीब 6 करोड़ रुपये खर्च कर अत्याधुनिक मशीन युक्त मुक्तिधाम बनाया था। दावा किया गया था कि सिर्फ 120 किलोग्राम लकड़ी में शव का अंतिम संस्कार हो जाएगा और पर्यावरण को भी कम नुकसान होगा। लेकिन यह योजना लोगों को रास नहीं आई। हालात यह है कि इस मशीन का इस्तेमाल लगभग बंद है। आम लोग तो दूर, शहर के प्रभावशाली और संपन्न परिवार भी इस सुविधा से दूरी बनाए हुए हैं। सभी के सभी पारंपरिक तरीके से शवों का अंतिम संस्कार में भरोसा जता रहे हैं। पारंपरिक तरीके का श्मशान घाट विष्णुपद श्मशान घाट के पास ही है। इसे किसी समय में नगर विधायक प्रेम कुमार कुमार की पहल पर बनाया गया था। खास बात यह कि यह वर्षों तक सुनसान पड़ा रहा। लेकिन जब नदी में शवों को जलाए जाने पर प्रतिबंध लगा तो यह स्थान गुलजार हो गया। इस बीच एक और खेल शुरू हो गया। आरोप है कि अंतिम संस्कार के नाम पर प्रमाण पत्र बेचने का धंधा चलने लगा। यानी सुविधा भले न चले, लेकिन उससे जुड़े कागजों का इस्तेमाल जारी है। विष्णुपद श्मशान घाट के पास इलेक्ट्रिक शवदाह गृह की योजना भी फेल मशीन युक्त मुक्तिधाम के फेल होने के बाद नगर निगम ने विष्णुपद श्मशान घाट के पास इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनाने की योजना शुरू की। करोड़ों रुपये की लागत से इसका निर्माण भी शुरू हुआ। लेकिन जब यह परियोजना पूरी होने के करीब पहुंची, तब यह क्षेत्र कॉरिडोर में आ गया। जिला प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी। नतीजा यह योजना भी अधर में लटक गई। अब एलपीजी गैस से शवों के अंतिम संस्कार कराने की योजना अब तीसरा प्रयोग सामने आया है। सीताकुंड के पास नए श्मशान घाट के लिए जमीन एक एनजीओ को दी गई है। यहां एलपीजी गैस से शवों का अंतिम संस्कार कराने की योजना है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में नगर निगम सीधे तौर पर पैसा नहीं लगा रहा है। नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने इसकी पुष्टि की है।
पूर्व पार्षद बोले- श्मशान घाट के नाम पर जनता के पैसे की लूट इधर, इस पूरे मामले पर सवाल भी तेज हो गए हैं। पूर्व वार्ड पार्षद लाल जी प्रसाद ने साफ कहा कि श्मशान घाट के नाम पर जनता के पैसे की लूट हो रही है। उनका आरोप है कि करोड़ों खर्च कर बनाए गए मुक्तिधाम का कोई उपयोग नहीं हो रहा। इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का काम भी बीच में ही रुक गया। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है। वहीं, नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया का कहना है कि विष्णुपद इलाके के सभी श्मशान घाट कॉरिडोर परियोजना में आ रहे हैं, इसलिए वे प्रभावित होंगे। उन्होंने बताया कि अब बाइपास पुल के पास नया श्मशान घाट विकसित करने की योजना बनाई जा रही है और इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है। श्मशान घाट को लेकर लगातार हो रहे प्रयोगों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों को अब एक स्थायी और भरोसेमंद व्यवस्था का इंतजार है।


