गयाजी में अजय कुशवाहा बनें जदयू जिलाध्यक्ष:बूथ से लेकर ब्लॉक तक संगठन मजबूती का दावा; कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को लगाया गुलाल

गयाजी में अजय कुशवाहा बनें जदयू जिलाध्यक्ष:बूथ से लेकर ब्लॉक तक संगठन मजबूती का दावा; कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को लगाया गुलाल

गयाजी में दो दिन पहले जिस चुनावी बैठक में नारेबाजी, तनातनी और धरना देखने को मिला, उसी प्रकरण का पटाक्षेप अब सियासी संतुलन के साथ हो गया। पार्टी के राज्य निर्वाची अधिकारी ने गया जदयू के नए जिलाध्यक्ष के रूप में अजय कुशवाहा के नाम का आधिकारिक एलान कर दिया है। अहम बात यह कि उन्हें मनोनीत नहीं, बल्कि निर्वाचित जिलाध्यक्ष घोषित किया गया है। लेटर जारी होते ही उनके आवास पर कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मिठाइयां बंटी और होली के पारंपरिक गीत गूंजे। माहौल में उत्साह देखने को मिला। दरअसल, चुनाव के दिन 21 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। सहमति नहीं बनी। प्रक्रिया 1 मार्च को पूरी होनी थी, लेकिन हंगामे के कारण स्थगित करनी पड़ी। एक धड़े के कार्यकर्ता निर्वाची अधिकारी की गाड़ी के सामने धरने पर बैठ गए थे। पुलिस बुलानी पड़ी। उस दिन की तस्वीर ने जिला राजनीति में कई सवाल खड़े किए। विपक्ष को मौका मिला। पार्टी की साख दांव पर दिखी। ऐसे में नेतृत्व ने हस्तक्षेप किया। फैसला लिया और संगठन के अनुभवी चेहरे पर भरोसा जताया। राजनीतिक हलकों में पार्टी के इस निर्णय को इसे संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि अनुशासन सर्वोपरि, लेकिन मेहनतकश कार्यकर्ताओं की अनदेखी यहां नहीं होती। जिम्मेदारी को परिणाम तक ले जाएंगे नए जिलाध्यक्ष अजय कुशवाहा ने साफ कहा कि पार्टी ने जिम्मेदारी दी है। इसे परिणाम तक ले जाएंगे। नेता नीतीश कुमार की विचारधारा को बूथ स्तर तक पहुंचाना है। संगठन ही हमारी ताकत है। कार्यकर्ता ही हमारी पूंजी हैं। उनके बयान में संयम भी दिखा और संकेत भी कि कल कोई और होगा, आज जिम्मेदारी हमारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुशवाहा की छवि साफ-सुथरी है। संगठन का लंबा अनुभव है। सभी समाज में पैठ है। यही कारण है कि अंततः सहमति का रास्ता यहीं आकर थमा। अब असली परीक्षा मैदान में होगी। बूथ प्रबंधन, पंचायत स्तर पर सक्रियता, और आगामी चुनावी रणनीति—सब पर नजर रहेगी। गया जदयू के लिए यह सिर्फ पद का बदलाव नहीं, बल्कि यह अंदरूनी शक्ति परीक्षण के बाद संगठनात्मक संतुलन है। पार्टी के इस निर्णय से स्पष्ट हुआ कि हंगामा भले हुआ, लेकिन अंतिम फैसला नेतृत्व का ही चलता है। इन मौके पर अवध बिहारी पटेल, ज्योति दांगी, धनंजय शर्मा, अजीत शर्मा, शहजाद शाह, शंकर चौधरी, प्रकाश राम पटवा, राकेश पाण्डेय सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने फूल माला एवं अंग वस्त्र से नए जिलाध्यक्ष का स्वागत किया। गयाजी में दो दिन पहले जिस चुनावी बैठक में नारेबाजी, तनातनी और धरना देखने को मिला, उसी प्रकरण का पटाक्षेप अब सियासी संतुलन के साथ हो गया। पार्टी के राज्य निर्वाची अधिकारी ने गया जदयू के नए जिलाध्यक्ष के रूप में अजय कुशवाहा के नाम का आधिकारिक एलान कर दिया है। अहम बात यह कि उन्हें मनोनीत नहीं, बल्कि निर्वाचित जिलाध्यक्ष घोषित किया गया है। लेटर जारी होते ही उनके आवास पर कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मिठाइयां बंटी और होली के पारंपरिक गीत गूंजे। माहौल में उत्साह देखने को मिला। दरअसल, चुनाव के दिन 21 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। सहमति नहीं बनी। प्रक्रिया 1 मार्च को पूरी होनी थी, लेकिन हंगामे के कारण स्थगित करनी पड़ी। एक धड़े के कार्यकर्ता निर्वाची अधिकारी की गाड़ी के सामने धरने पर बैठ गए थे। पुलिस बुलानी पड़ी। उस दिन की तस्वीर ने जिला राजनीति में कई सवाल खड़े किए। विपक्ष को मौका मिला। पार्टी की साख दांव पर दिखी। ऐसे में नेतृत्व ने हस्तक्षेप किया। फैसला लिया और संगठन के अनुभवी चेहरे पर भरोसा जताया। राजनीतिक हलकों में पार्टी के इस निर्णय को इसे संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि अनुशासन सर्वोपरि, लेकिन मेहनतकश कार्यकर्ताओं की अनदेखी यहां नहीं होती। जिम्मेदारी को परिणाम तक ले जाएंगे नए जिलाध्यक्ष अजय कुशवाहा ने साफ कहा कि पार्टी ने जिम्मेदारी दी है। इसे परिणाम तक ले जाएंगे। नेता नीतीश कुमार की विचारधारा को बूथ स्तर तक पहुंचाना है। संगठन ही हमारी ताकत है। कार्यकर्ता ही हमारी पूंजी हैं। उनके बयान में संयम भी दिखा और संकेत भी कि कल कोई और होगा, आज जिम्मेदारी हमारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुशवाहा की छवि साफ-सुथरी है। संगठन का लंबा अनुभव है। सभी समाज में पैठ है। यही कारण है कि अंततः सहमति का रास्ता यहीं आकर थमा। अब असली परीक्षा मैदान में होगी। बूथ प्रबंधन, पंचायत स्तर पर सक्रियता, और आगामी चुनावी रणनीति—सब पर नजर रहेगी। गया जदयू के लिए यह सिर्फ पद का बदलाव नहीं, बल्कि यह अंदरूनी शक्ति परीक्षण के बाद संगठनात्मक संतुलन है। पार्टी के इस निर्णय से स्पष्ट हुआ कि हंगामा भले हुआ, लेकिन अंतिम फैसला नेतृत्व का ही चलता है। इन मौके पर अवध बिहारी पटेल, ज्योति दांगी, धनंजय शर्मा, अजीत शर्मा, शहजाद शाह, शंकर चौधरी, प्रकाश राम पटवा, राकेश पाण्डेय सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने फूल माला एवं अंग वस्त्र से नए जिलाध्यक्ष का स्वागत किया।  

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