Airbag Risk: हुंडई की लाखों SUVs में सामने आई बड़ी खराबी, खतरे में है सुरक्षा ?

Airbag Risk: हुंडई की लाखों SUVs में सामने आई बड़ी खराबी, खतरे में है सुरक्षा ?

Hyundai Motor Recall: अगर आप भी बड़ी और लग्जरी कारों के शौकीन हैं, तो यह खबर आपको हैरान कर सकती है। हुंडई (Hyundai) की सबसे लोकप्रिय और लग्जरी कारों में शुमार ‘पलिसैड’ (Palisade) के बारे में एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी हुंडई (Hyundai) ने अपनी लोकप्रिय लग्जरी एसयूवी, पलिसैड (Palisade SUV safety) को लेकर एक बड़ा सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। कंपनी ने अमेरिका सहित वैश्विक बाजारों से करीब 4.5 लाख से ज्यादा वाहन वापस मंगवाने (Hyundai Airbag Recall) का फैसला किया है। एयरबैग में आई एक गंभीर तकनीकी खराबी (Hyundai defect news) के कारण यह कदम उठाया गया है, जो दुर्घटना के समय यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकता है। इस खबर (NHTSA vehicle recall) ने ऑटो बाजार और ग्राहकों के बीच हलचल पैदा कर दी है।

क्या है पूरा मामला ? एयरबैग में ‘खतरे’ की घंटी (Autoliv airbag issue)

हुंडई की जांच में य​ह तथ्य सामने आया है कि 2020 से 2023 के बीच बनी ‘पलिसैड’ मॉडल्स के साइड कर्टन एयरबैग में तकनीकी समस्या हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन एयरबैग्स को फुलाने वाले ‘इन्फ्लेटर’ में निर्माण के दौरान कुछ कमियां रह गई थीं।

खतरा यह है कि अगर गाड़ी का एक्सीडेंट होता है, तो ये एयरबैग सही समय पर नहीं खुलेंगे या फिर फट सकते हैं, जिससे कार में बैठे लोगों को गंभीर चोट लग सकती है। सुरक्षा मानकों पर खरा न उतरने के कारण कंपनी ने इन गाड़ियों को तुरंत प्रभाव से ठीक करने का जिम्मा उठाया है।

कौन से मॉडल्स प्रभावित हैं ?

अगर आपके पास हुंडई पलिसैड का पुराना मॉडल है, तो आपको सचेत रहने की जरूरत है। मुख्य रूप से प्रभावित वाहनों का विवरण इस प्रकार है:

मॉडल: हुंडई पलिसैड (Hyundai Palisade)

उत्पादन वर्ष: 2020, 2021, 2022 और 2023 के कुछ शुरुआती मॉडल्स।

कुल संख्या: अनुमानित 4,48,000 से 5,00,000 यूनिट्स।

अब हुंडई क्या कदम उठा रही है ?

हुंडई ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। कंपनी प्रभावित वाहन मालिकों को ईमेल और पत्र के जरिए सूचित करेगी।

मुफ्त मरम्मत: ग्राहकों को नजदीकी ऑथोराइज्ड डीलरशिप पर जाना होगा।

सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर अपडेट: इंजीनियर एयरबैग सिस्टम की जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर खराब पुर्जों को बिना किसी शुल्क के बदलेंगे।

चेक करने का तरीका: हुंडई की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी कार का VIN (Vehicle Identification Number) डाल कर भी चेक किया जा सकता है कि आपकी गाड़ी इस रिकॉल का हिस्सा है या नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हुंडई का यह कदम ब्रांड की छवि को बचाने के लिए जरूरी था। हालांकि रिकॉल की संख्या बड़ी है, लेकिन स्वेच्छा से इसे स्वीकार करना पारदर्शिता को दर्शाता है।

सोशल मीडिया पर ग्राहकों की चिंता: कई ग्राहकों ने सुरक्षा फीचर्स पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि पलिसैड हुंडई की सबसे प्रीमियम SUVs में से एक मानी जाती है।

आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े अपडेट्स मिल सकते हैं:

अन्य देशों पर असर: फिलहाल यह रिकॉल मुख्य रूप से अमेरिकी बाजार के लिए है। क्या भारत या अन्य एशियाई देशों में निर्यात की गई इकाइयों में भी यह समस्या है? इस पर हुंडई जल्द ही बयान जारी कर सकती है।

सप्लाई चेन की जांच: हुंडई उस वेंडर (Vendor) की भी जांच कर रही है जिसने ये एयरबैग सप्लाई किए थे, ताकि भविष्य में ऐसी बड़ी चूक न हो।

इस घटना का एक दूसरा पहलू भी है जो भविष्य की कारों को प्रभावित करेगा:

सख्त सुरक्षा मानक: इस रिकॉल के बाद वैश्विक स्तर पर सुरक्षा जांच एजेंसियां (जैसे NHTSA) एयरबैग इन्फ्लेटर्स के लिए और भी कड़े नियम बना सकती हैं।

प्रतिस्पर्धा का फायदा: हुंडई की प्रतिद्वंद्वी कंपनियां जैसे किआ (Kia) और टोयोटा (Toyota) इस स्थिति का फायदा उठा सकती हैं, क्योंकि सुरक्षा के मामले में ग्राहक अब अधिक संवेदनशील हो गए हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों पर फोकस

हुंडई इन दिनों अपने इलेक्ट्रिक सेगमेंट (Ioniq सीरीज) पर काफी ध्यान दे रही है। ऐसे में कंबशन इंजन वाली पुरानी कारों में रिकॉल कंपनी के संसाधनों और ध्यान को डायवर्ट कर सकता है।

एयरबैग इन्फ्लेटर बनाने वाली कंपनी की गुणवत्ता पर सवाल उठे

इस पूरी घटना का एक अलग पहलू ‘वेंडर लायबिलिटी’ (आपूर्तिकर्ता की जिम्मेदारी) से जुड़ा हुआ है। कार कंपनियां अक्सर एयरबैग्स और अन्य महत्वपूर्ण हिस्से दूसरी कंपनियों से बनवाती हैं। इस मामले में भी एयरबैग इन्फ्लेटर बनाने वाली कंपनी की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। यह घटना एक बार फिर 2010 के दशक के ‘टकाटा एयरबैग स्कैम’ की याद दिलाती है, जिसने पूरी दुनिया की ऑटो इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया था। यह विवाद बताता है कि आधुनिक कारों में सॉफ्टवेयर के साथ-साथ बेसिक हार्डवेयर की क्वालिटी कंट्रोल कितनी चुनौती भरी होती जा रही है।

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