‘UPSC में 603वीं रैंक मैंने ही हासिल की है, मेरे पास एडमिट कार्ड समेत सभी ऑरिजनल प्रूव मौजूद हैं। इसी वजह से मैंने 9 मार्च को आयोग को ई-मेल कर शिकायत दर्ज कराई है।’ यह कहना है तारापुर अवर निबंधन कार्यालय में पदस्थापित सब रजिस्ट्रार अमन कुमार का, जिनके नाम और रैंक को लेकर इन दिनों विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, मुंगेर के तारापुर में पदस्थापित अवर निबंधन पदाधिकारी अमन कुमार और सारण के युवक अमन कुमार सिंह का 603वीं रैंक आया है। इसमें से मुंगेर के अमन कुमार का कहना है कि उनके पास सारे ऑरिजनल प्रूव मौजूद हैं। वहीं, सारण के अमन का कहना है, वो अभी अपना एडमिट कार्ड नहीं दिखा सकते हैं। अवर निबंधन पदाधिकारी अमन कुमार भोजपुर के रहने वाले हैं। मेरे पास क्रेडेंशियल्स डाक्यूमेंट्स हैं दैनिक भास्कर की टीम ने मुंगेर के अमन और सारण के अमन दोनों से बात कर इसपर जांच शुरू की। सबसे पहले हमारी टीम मुंगेर के जिला कार्यालय पहुंची, जहां भोजपुर के अमन से बातचीत की। इस दौरान अमन ने बताया, 8 मार्च को उन्हें जानकारी मिली कि बिहार के सारण जिले का एक युवक, जिसका नाम भी अमन कुमार है, वही 603वीं रैंक हासिल करने का दावा कर रहा है। यह जानकारी मिलते ही उन्होंने तुरंत UPSC को ई-मेल भेजकर मामले की शिकायत की। उन्होंने कहा, अपने मेल में उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि UPSC 2025 में AIR 603 मैं ही हूं। मेरे पास इस संबंध में सभी क्रेडेंशियल्स मौजूद हैं। जिसमें एडमिट कार्ड, रिजल्ट से जुड़े दस्तावेज और अन्य प्रमाण शामिल हैं। रिजल्ट और कम्यूनिटी डिटेल का दिया हवाला अमन कुमार के अनुसार यूपीएससी द्वारा जारी परिणाम में 603वीं रैंक जिस श्रेणी में है, वह OBC कम्यूनिटी से संबंधित है। वे खुद उसी श्रेणी से आते हैं। उनका कहना है कि सारण के जिस युवक द्वारा यह दावा किया जा रहा है, वह अलग कम्यूनिटी से है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर भी स्पष्ट है कि वास्तविक उम्मीदवार वही हैं। 9 मार्च को आयोग को भेजा ई-मेल अमन कुमार ने आगे बताया,उन्होंने 9 मार्च को feedbackatupsc@gmail.com पर ई-मेल भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी और आयोग से जांच की मांग की है। हालांकि, चार दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें इस संबंध में कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे आयोग के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। अमन कुमार ने कहा कि इस पूरे विवाद में उन्हें UPSC पर पूरा भरोसा है। आयोग एक संवैधानिक संस्थान है और उसकी चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट आधारित होती है। उन्होंने कहा कि मेरी सफलता भी इसी पारदर्शी व्यवस्था का परिणाम है। इसमें आयोग की कोई गलती नहीं है। भविष्य में ऐसे विवाद रोकने के लिए सुझाव अमन कुमार का कहना है, भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए आयोग कुछ दूसरा कदम उठा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि रिजल्ट जारी करते समय उम्मीदवार के नाम के साथ उसके पिता का नाम भी दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसा होने से एक ही नाम वाले उम्मीदवारों को लेकर भ्रम की स्थिति कम होगी। अमन कुमार ने सारण के युवक अमन कुमार सिंह से भी अपने दावे को सार्वजनिक रूप से प्रमाणित करने की अपील की है। उन्होंने कहा, उन्हें अपने सभी क्रेडेंशियल्स, कम्यूनिटी डिटेल, माता-पिता का नाम और संबंधित प्रमाणपत्र सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके दावे की जांच की जाए, तो सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी। जल्द स्पष्ट हो जाएगी स्थिति अमन कुमार ने कहा, उन्हें इस विवाद से व्यक्तिगत रूप से कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि उन्होंने आयोग को शिकायत भेज दी है। आने वाले समय में जब सर्विस एलोकेशन की प्रक्रिया पूरी होगी और नियुक्ति पत्र जारी होगा, तब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। उनका कहना है कि नियुक्ति पत्र किसी एक ही व्यक्ति को मिलेगा और उसी से यह तय हो जाएगा कि असली उम्मीदवार कौन है। मैंने अपनी ओर से आयोग को सूचना दे दी है। अब आगे जो भी फैसला होगा, वह आधिकारिक प्रक्रिया के तहत सामने आ जाएगा। सारण के अमन के घर पर लटका है ताला इसके बाद हमारी टीम सारण के रहने वाले अमन कुमार से बातचीत करने के लिए उनके घर तरैया थाना के नारायणपुर गांव पहुंची। इस दौरान घर पर ताला लगा था। न ही अमन वहां मौजूद थे, न ही उनके परिवार वाले। इसके बाद हमारी टीम ने अमन कुमार सिंह को फोन कर उनसे बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया, मैं किसी काम से बाहर आया हूं इस वजह से आपलोगों से बात नहीं कर पाऊंगा। इतना बोलते ही उन्होंने फोन कट कर दिया। डॉक्यूमेंट्स देने में किया टालमटोल इसके बाद दोबारा से टीम ने अमन को फोन किया। इस दौरान हमने उनसे उनके एडमिड कार्ड और अन्य कागजात की मांग की। इसपर उन्होंने टाल मटोल कर दिया। उन्होंने अभी मेरा पास कोई डॉक्यूमेंट्स नहीं हैं। मैं बाहर आया हूं। इसके बाद हमने फोन पर आए मेल की डिमांड की। इस दौरान उसने कहा, मेरा नेटवर्क सही से काम नहीं कर रहा है, इस वजह से मैं आपको कोई प्रूव नहीं दिखा पाऊंगा। बता दें कि अमन कुमार सिंह के पिता बृज किशोर सिंह पटना स्थित बेउर सेंट्रल जेल में ड्राइवर के पद पर कार्यरत हैं। अमन की प्रारंभिक शिक्षा भी पटना में ही हुई। 6 मार्च को UPSC 2025 का रिजल्ट आया था। इसके बाद सारण के अमन कुमार सिंह ने इस खुशी में अपने गांव पहुंच कर करीब 2000 से ज्यादा लोगों को भोज खिलाया था। अमन कुमार सिंह के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया था। लोगों ने मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया था। अब तक 2025 के रिजल्ट में देश में 5 फर्जी मामले सामने आए हैं गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब यूपीएससी के परिणाम को लेकर इस तरह का विवाद सामने आया हो। अब तक देश में 5 ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां सेलेक्शन होने का फर्जी दावा किया गया। इस कड़ी में सबसे पहले आपको बलंदशहर का मामला बताते हैं। यहां शिखा गौतम ने खुद को यूपीएससी AIR 113 की कैंडिडेट बताया था। घरवालों ने मिठाइयां बांटीं और जश्न मनाया, जब शिखा गौतम अपने घर बुलंदशहर पहुंचीं तो स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत भी किया। 2 दिन बाद जांच में पता चला कि 113वीं रैंक दिल्ली में रहने वाली शिखा की है। UPSC को ई-मेल भेजकर स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की थी। इसके बाद UPSC ने बुलंदशहर की डीएम को जांच का आदेश दिया और जब छानबीन हुई तो बुलंदशहर की शिखा गौतम का दावा झूठा निकला है। दूसरा मामला, यूपी के गाजीपुर से सामने आया था। गौरा खास गांव की प्रियंका चौधरी के घर पर यूपीएससी रिजल्ट के बाद जश्न का माहौल था। दावा किया गया कि प्रियंका चौधरी ने UPSC एग्जाम में 79वीं रैंक हासिल की है। दिसंबर, 2025 में प्रियंका का चयन जीएसटी इंस्पेक्टर के पद पर हुआ, वो करेंट में प्रयागराज में तैनात हैं। लेकिन जब जांच हुई तो असली सेलेक्शन हिमाचल की प्रियंका चौधरी का सामने आया था। हिमाचल प्रदेश के चंबा की रहने वाली प्रियंका चौधरी ने भी 79वीं रैंक मिलने का दावा किया। हिमाचल की प्रियंका चौधरी ने अपने चौथे अटेम्प्ट में एग्जाम क्रैक किया है। तीसरा मामले में कन्फ्यूजन आकांक्षा सिंह के नाम को लेकर हुआ था। UPSC रिजल्ट की 301वीं रैंक पर यूपी के गाजीपुर और बिहार के आरा की दो आकांक्षा सिंह ने दावा किया था। दोनों उम्मीदवारों के दावे के बाद भ्रम की स्थिति बन गई थी, जिसके बाद UPSC ने फाइनल रिजल्ट में रैंक-301 को लेकर 2 आकांक्षा सिंह के दावों पर क्लियर जानकारी दी। आयोग ने लेटर जारी कर बताया था कि रैंक-301 यूपी के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह की है। ऐसे में बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह का दावा गलत निकला। चौथा मामला बिहार के शेखपुरा से सामने आया था। फतेहपुर गांव के रहने वाले रंजीत कुमार ने 6 मार्च को रिजल्ट आने के बाद खुद को ऑल इंडिया रैंक 440 का उम्मीदवार बताया। गांव के लोगों को जब इसकी जानकारी मिली तो वहां खुशी का माहौल बन गया और स्थानीय थाने की टीम आकर बधाई देने लगी। अधिकारियों ने माला पहनाकर सम्मान किया, लेकिन बाद में जब इस दावे की जांच हुई तो पता चला कि 440वीं रैंक बिहार के रंजीत कुमार की नहीं बल्कि कर्नाटक के रंजीथ कुमार की है। ‘UPSC में 603वीं रैंक मैंने ही हासिल की है, मेरे पास एडमिट कार्ड समेत सभी ऑरिजनल प्रूव मौजूद हैं। इसी वजह से मैंने 9 मार्च को आयोग को ई-मेल कर शिकायत दर्ज कराई है।’ यह कहना है तारापुर अवर निबंधन कार्यालय में पदस्थापित सब रजिस्ट्रार अमन कुमार का, जिनके नाम और रैंक को लेकर इन दिनों विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, मुंगेर के तारापुर में पदस्थापित अवर निबंधन पदाधिकारी अमन कुमार और सारण के युवक अमन कुमार सिंह का 603वीं रैंक आया है। इसमें से मुंगेर के अमन कुमार का कहना है कि उनके पास सारे ऑरिजनल प्रूव मौजूद हैं। वहीं, सारण के अमन का कहना है, वो अभी अपना एडमिट कार्ड नहीं दिखा सकते हैं। अवर निबंधन पदाधिकारी अमन कुमार भोजपुर के रहने वाले हैं। मेरे पास क्रेडेंशियल्स डाक्यूमेंट्स हैं दैनिक भास्कर की टीम ने मुंगेर के अमन और सारण के अमन दोनों से बात कर इसपर जांच शुरू की। सबसे पहले हमारी टीम मुंगेर के जिला कार्यालय पहुंची, जहां भोजपुर के अमन से बातचीत की। इस दौरान अमन ने बताया, 8 मार्च को उन्हें जानकारी मिली कि बिहार के सारण जिले का एक युवक, जिसका नाम भी अमन कुमार है, वही 603वीं रैंक हासिल करने का दावा कर रहा है। यह जानकारी मिलते ही उन्होंने तुरंत UPSC को ई-मेल भेजकर मामले की शिकायत की। उन्होंने कहा, अपने मेल में उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि UPSC 2025 में AIR 603 मैं ही हूं। मेरे पास इस संबंध में सभी क्रेडेंशियल्स मौजूद हैं। जिसमें एडमिट कार्ड, रिजल्ट से जुड़े दस्तावेज और अन्य प्रमाण शामिल हैं। रिजल्ट और कम्यूनिटी डिटेल का दिया हवाला अमन कुमार के अनुसार यूपीएससी द्वारा जारी परिणाम में 603वीं रैंक जिस श्रेणी में है, वह OBC कम्यूनिटी से संबंधित है। वे खुद उसी श्रेणी से आते हैं। उनका कहना है कि सारण के जिस युवक द्वारा यह दावा किया जा रहा है, वह अलग कम्यूनिटी से है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर भी स्पष्ट है कि वास्तविक उम्मीदवार वही हैं। 9 मार्च को आयोग को भेजा ई-मेल अमन कुमार ने आगे बताया,उन्होंने 9 मार्च को feedbackatupsc@gmail.com पर ई-मेल भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी और आयोग से जांच की मांग की है। हालांकि, चार दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें इस संबंध में कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे आयोग के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। अमन कुमार ने कहा कि इस पूरे विवाद में उन्हें UPSC पर पूरा भरोसा है। आयोग एक संवैधानिक संस्थान है और उसकी चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट आधारित होती है। उन्होंने कहा कि मेरी सफलता भी इसी पारदर्शी व्यवस्था का परिणाम है। इसमें आयोग की कोई गलती नहीं है। भविष्य में ऐसे विवाद रोकने के लिए सुझाव अमन कुमार का कहना है, भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए आयोग कुछ दूसरा कदम उठा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि रिजल्ट जारी करते समय उम्मीदवार के नाम के साथ उसके पिता का नाम भी दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसा होने से एक ही नाम वाले उम्मीदवारों को लेकर भ्रम की स्थिति कम होगी। अमन कुमार ने सारण के युवक अमन कुमार सिंह से भी अपने दावे को सार्वजनिक रूप से प्रमाणित करने की अपील की है। उन्होंने कहा, उन्हें अपने सभी क्रेडेंशियल्स, कम्यूनिटी डिटेल, माता-पिता का नाम और संबंधित प्रमाणपत्र सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके दावे की जांच की जाए, तो सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी। जल्द स्पष्ट हो जाएगी स्थिति अमन कुमार ने कहा, उन्हें इस विवाद से व्यक्तिगत रूप से कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि उन्होंने आयोग को शिकायत भेज दी है। आने वाले समय में जब सर्विस एलोकेशन की प्रक्रिया पूरी होगी और नियुक्ति पत्र जारी होगा, तब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। उनका कहना है कि नियुक्ति पत्र किसी एक ही व्यक्ति को मिलेगा और उसी से यह तय हो जाएगा कि असली उम्मीदवार कौन है। मैंने अपनी ओर से आयोग को सूचना दे दी है। अब आगे जो भी फैसला होगा, वह आधिकारिक प्रक्रिया के तहत सामने आ जाएगा। सारण के अमन के घर पर लटका है ताला इसके बाद हमारी टीम सारण के रहने वाले अमन कुमार से बातचीत करने के लिए उनके घर तरैया थाना के नारायणपुर गांव पहुंची। इस दौरान घर पर ताला लगा था। न ही अमन वहां मौजूद थे, न ही उनके परिवार वाले। इसके बाद हमारी टीम ने अमन कुमार सिंह को फोन कर उनसे बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया, मैं किसी काम से बाहर आया हूं इस वजह से आपलोगों से बात नहीं कर पाऊंगा। इतना बोलते ही उन्होंने फोन कट कर दिया। डॉक्यूमेंट्स देने में किया टालमटोल इसके बाद दोबारा से टीम ने अमन को फोन किया। इस दौरान हमने उनसे उनके एडमिड कार्ड और अन्य कागजात की मांग की। इसपर उन्होंने टाल मटोल कर दिया। उन्होंने अभी मेरा पास कोई डॉक्यूमेंट्स नहीं हैं। मैं बाहर आया हूं। इसके बाद हमने फोन पर आए मेल की डिमांड की। इस दौरान उसने कहा, मेरा नेटवर्क सही से काम नहीं कर रहा है, इस वजह से मैं आपको कोई प्रूव नहीं दिखा पाऊंगा। बता दें कि अमन कुमार सिंह के पिता बृज किशोर सिंह पटना स्थित बेउर सेंट्रल जेल में ड्राइवर के पद पर कार्यरत हैं। अमन की प्रारंभिक शिक्षा भी पटना में ही हुई। 6 मार्च को UPSC 2025 का रिजल्ट आया था। इसके बाद सारण के अमन कुमार सिंह ने इस खुशी में अपने गांव पहुंच कर करीब 2000 से ज्यादा लोगों को भोज खिलाया था। अमन कुमार सिंह के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया था। लोगों ने मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया था। अब तक 2025 के रिजल्ट में देश में 5 फर्जी मामले सामने आए हैं गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब यूपीएससी के परिणाम को लेकर इस तरह का विवाद सामने आया हो। अब तक देश में 5 ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां सेलेक्शन होने का फर्जी दावा किया गया। इस कड़ी में सबसे पहले आपको बलंदशहर का मामला बताते हैं। यहां शिखा गौतम ने खुद को यूपीएससी AIR 113 की कैंडिडेट बताया था। घरवालों ने मिठाइयां बांटीं और जश्न मनाया, जब शिखा गौतम अपने घर बुलंदशहर पहुंचीं तो स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत भी किया। 2 दिन बाद जांच में पता चला कि 113वीं रैंक दिल्ली में रहने वाली शिखा की है। UPSC को ई-मेल भेजकर स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की थी। इसके बाद UPSC ने बुलंदशहर की डीएम को जांच का आदेश दिया और जब छानबीन हुई तो बुलंदशहर की शिखा गौतम का दावा झूठा निकला है। दूसरा मामला, यूपी के गाजीपुर से सामने आया था। गौरा खास गांव की प्रियंका चौधरी के घर पर यूपीएससी रिजल्ट के बाद जश्न का माहौल था। दावा किया गया कि प्रियंका चौधरी ने UPSC एग्जाम में 79वीं रैंक हासिल की है। दिसंबर, 2025 में प्रियंका का चयन जीएसटी इंस्पेक्टर के पद पर हुआ, वो करेंट में प्रयागराज में तैनात हैं। लेकिन जब जांच हुई तो असली सेलेक्शन हिमाचल की प्रियंका चौधरी का सामने आया था। हिमाचल प्रदेश के चंबा की रहने वाली प्रियंका चौधरी ने भी 79वीं रैंक मिलने का दावा किया। हिमाचल की प्रियंका चौधरी ने अपने चौथे अटेम्प्ट में एग्जाम क्रैक किया है। तीसरा मामले में कन्फ्यूजन आकांक्षा सिंह के नाम को लेकर हुआ था। UPSC रिजल्ट की 301वीं रैंक पर यूपी के गाजीपुर और बिहार के आरा की दो आकांक्षा सिंह ने दावा किया था। दोनों उम्मीदवारों के दावे के बाद भ्रम की स्थिति बन गई थी, जिसके बाद UPSC ने फाइनल रिजल्ट में रैंक-301 को लेकर 2 आकांक्षा सिंह के दावों पर क्लियर जानकारी दी। आयोग ने लेटर जारी कर बताया था कि रैंक-301 यूपी के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह की है। ऐसे में बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह का दावा गलत निकला। चौथा मामला बिहार के शेखपुरा से सामने आया था। फतेहपुर गांव के रहने वाले रंजीत कुमार ने 6 मार्च को रिजल्ट आने के बाद खुद को ऑल इंडिया रैंक 440 का उम्मीदवार बताया। गांव के लोगों को जब इसकी जानकारी मिली तो वहां खुशी का माहौल बन गया और स्थानीय थाने की टीम आकर बधाई देने लगी। अधिकारियों ने माला पहनाकर सम्मान किया, लेकिन बाद में जब इस दावे की जांच हुई तो पता चला कि 440वीं रैंक बिहार के रंजीत कुमार की नहीं बल्कि कर्नाटक के रंजीथ कुमार की है।


