Digital Safeguards: पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दौड़ में शामिल है, लेकिन इस तकनीक के अनियंत्रित प्रसार ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। सेलफोर्स के सीईओ मार्क बेनियोफ (Marc Benioff AI warning Davos) ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि सरकारों को AI के साथ वही ‘आत्मघाती गलती’ नहीं दोहरानी चाहिए, (Salesforce CEO tech ethics) जो उन्होंने फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ की थी। बेनियोफ का कहना है कि एक दशक पहले जब सोशल मीडिया का उभरा तो सरकारों ने इसे रेगुलेट करने (AI vs Social Media regulation) में ढिलाई बरती। नतीजा यह हुआ कि मानसिक स्वास्थ्य, डेटा चोरी और गलत सूचनाओं का अंबार लग गया। बेनियोफ ने चेतावनी दी कि AI के मामले में हमारे पास गलती की गुंजाइश नहीं है। अगर हमने समय रहते कड़े नियम नहीं बनाए, तो यह समाज के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर सकता है। उन्होंने इसे “प्रौद्योगिकी का भविष्य” तो माना, लेकिन यह कह कर चेताया भी कि बिना लगाम के यह विनाशकारी साबित हो सकता है।
भारत से कनेक्शन: क्यों सतर्क रहने की जरूरत है? (India Digital India Act AI)
भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा डेटा उपभोक्ता है और यहाँ AI का प्रभाव शिक्षा से लेकर चुनाव तक पड़ रहा है। बेनियोफ की यह चेतावनी भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है:
डेटा संप्रभुता का मामला
भारत में करोड़ों लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। विदेशी AI मॉडल भारतीय डेटा पर प्रशिक्षित हो रहे हैं। बेनियोफ के अनुसार, भारत को अपने नागरिकों के डेटा की सुरक्षा के लिए ‘गार्डरेल्स’ (सुरक्षा घेरा) तैयार करना होगा।
डीपफेक और चुनाव पर प्रभाव
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में AI का गलत इस्तेमाल (जैसे डीपफेक) चुनावों को प्रभावित कर सकता है। बेनियोफ की सलाह है कि सरकारों को तकनीक कंपनियों के भरोसे बैठने के बजाय खुद कानून बनाने होंगे।
डिजिटल इंडिया और रेगुलेशन
भारत सरकार पहले से ही ‘डिजिटल इंडिया एक्ट’ पर काम कर रही है। बेनियोफ का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि भारत का नियम बनाने का फैसला सही दिशा में है।
तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही
मार्क बेनियोफ ने साफ किया कि अब वह समय चला गया जब टेक कंपनियां खुद को ‘केवल एक प्लेटफॉर्म’ बताकर जिम्मेदारी से बच जाती थीं। अब AI बनाने वाली कंपनियों को अपने एल्गोरिदम और उसके परिणामों के लिए जवाबदेह होना होगा।
खतरा वास्तविक और बड़ा है
मार्क बेनियोफ का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह खुद एक बहुत बड़ी टेक कंपनी के मालिक हैं। जब इंडस्ट्री के अंदर से ही रेगुलेशन (नियमों) की मांग उठती है, तो इसका मतलब है कि खतरा वास्तविक और बड़ा है। यह सरकारों के लिए ‘वेक-अप कॉल’ है कि वे इनोवेशन के नाम पर सुरक्षा से समझौता न करें।
क्या G-20 या UN जैसे मंच AI के लिए कोई साझा ‘ग्लोबल चार्टर’ बनाएंगे?
भारत की भूमिका: भारत सरकार बेनियोफ की इस चेतावनी के बाद अपने आईटी नियमों (IT Rules) में क्या बड़े बदलाव करती है, यह देखने वाली बात होगी।


