PM Modi in India AI Impact Summit 2026: नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने दुनिया को ये संदेश दे दिया कि भारत अब सिर्फ तकनीकी क्रांति का सहभागी नहीं, बल्कि उसका नेतृत्वकर्ता बन चुका है। छह दिनों तक चलने वाले इस वैश्विक सम्मेलन में सौ से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे कूटनीति और तकनीक के संगम का ऐतिहासिक मंच बना दिया।
पीएम मोदी का उद्घाटन संबोधन (PM Modi in India AI Impact Summit 2026)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानव इतिहास का निर्णायक मोड़ बताते हुए ‘MANAV’ फ्रेमवर्क पेश किया। उन्होंने साफ कहा कि एआई का मकसद मानव को सशक्त बनाना होना चाहिए, न कि उसे केवल डेटा में बदल देना। उनके अनुसार AI का लोकतंत्रीकरण जरूरी है ताकि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को भी इसका समान लाभ मिल सके।
वैश्विक नेताओं के बीच पीएम का मस्तमौला अंदाज
सम्मेलन के औपचारिक सत्रों के बीच एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के दिग्गज नेताओं के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत करते नजर आए। ग्रुप फोटो के दौरान उनका मस्तमौला अंदाज और सहज मुस्कान ने माहौल को काफी लाइट कर दिया।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से लेकर ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा तक, कई नेताओं के साथ उनकी अनौपचारिक चर्चा ने ये संदेश दिया कि भारत की कूटनीति केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि रिश्तों की गर्माहट पर भी आधारित है। मंच पर मौजूद टेक जगत के दिग्गजों के साथ भी उनका संवाद सहज और दोस्ताना रहा, जिससे समिट का माहौल और जीवंत बन गया।
ब्राजील के साथ डिजिटल साझेदारी (PM Modi in India AI Impact Summit 2026)
सम्मेलन के दौरान ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के साथ हुई बातचीत में विकासशील देशों के लिए तकनीकी समानता पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि एआई केवल विकसित अर्थव्यवस्थाओं तक सीमित न रहकर सामाजिक न्याय और आर्थिक प्रगति का साधन बने।

श्रीलंका और यूरोप के साथ रणनीतिक संवाद
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ बैठक में आर्थिक स्थिरता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर चर्चा हुई। वहीं स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पारमेलिन के साथ इनोवेशन और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में सहमति बनी।
खाड़ी और यूरोप की भागीदारी
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ ऊर्जा, निवेश और फ्यूचर टेक्नोलॉजी पर गंभीर मंथन हुआ। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ‘एआई फॉर गुड’ की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्वास्थ्य में एआई की भूमिका पर बल दिया।

टेक दिग्गजों की मौजूदगी
सम्मेलन में सैम ऑल्टमैन, डारियो अमोडेई, सुंदर पिचाई और जेंसन हुआंग जैसे दिग्गजों की भागीदारी ने इसे और खास बना दिया। हालांकि मंच पर ऑल्टमैन और अमोडेई के बीच दिखी झिझक ने वैश्विक एआई उद्योग की प्रतिस्पर्धी हकीकत को भी उजागर कर दिया। ओपनएआई और एंथ्रोपिक के बीच वैचारिक मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं और इसकी झलक समूह तस्वीर के दौरान भी देखने को मिली।

‘MANAV’ विजन क्या है?
प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत ‘MANAV’ ढांचा एआई के लिए नैतिकता, जवाबदेही, राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता, समावेशिता और कानूनी वैधता पर आधारित है। उनका कहना था कि यदि एआई को सही दिशा दी जाए तो यह विकास का उत्प्रेरक बनेगा, अन्यथा असंतुलन भी पैदा कर सकता है।
इस समिट ने ये साफ कर दिया कि भारत अब डिजिटल कूटनीति का नया केंद्र बन चुका है। युवा नवोन्मेषकों की बड़ी भागीदारी और वैश्विक नेतृत्व की उपस्थिति ने यह साबित किया कि 21वीं सदी की तकनीकी बहसों में भारत की आवाज निर्णायक होगी।



