AI डेटा-सेंटर्स से बढ़ रहा है धरती का तापमान:आस-पास के इलाकों में 2 डिग्री तक गर्मी बढ़ी, 34 करोड़ लोगों पर असर; स्टडी में खुलासा

AI डेटा-सेंटर्स से बढ़ रहा है धरती का तापमान:आस-पास के इलाकों में 2 डिग्री तक गर्मी बढ़ी, 34 करोड़ लोगों पर असर; स्टडी में खुलासा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती डिमांड अब दुनिया में तापमान भी बढ़ा रही है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एक नई रिसर्च में सामने आया है कि दुनिया भर में बन रहे AI डेटा सेंटर्स अपने आस-पास की जमीन का तापमान बढ़ा रहे हैं। स्टडी के मुताबिक, जहां ये डेटा सेंटर्स काम कर रहे हैं, वहां औसतन 2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ गया है। वैज्ञानिकों ने इसे ‘डेटा हीट आइलैंड इफेक्ट’ नाम दिया है। डेटा सेंटर्स के 10 किलोमीटर के दायरे में महसूस हो रही गर्मी रिसर्चर्स ने पिछले दो दशकों के सैटेलाइट डेटा का एनालिसिस किया। इसमें पाया गया कि जैसे ही किसी इलाके में AI डेटा सेंटर ऑपरेशनल होता है, वहां के तापमान में अचानक बढ़त देखी जाती है। औसत बढ़त: डेटा सेंटर के पास तापमान औसतन 2.07 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। अधिकतम तापमान: कुछ लोकेशन पर तापमान 9.1 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। असर का दायरा: गर्मी का यह असर सिर्फ डेटा सेंटर की बाउंड्री तक सीमित नहीं है। सेंटर से 4.5 किलोमीटर दूर तक 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़त देखी गई, जबकि इसका असर 10 किलोमीटर के दायरे तक फैल रहा है। अब तक अर्बन हीट आइलैंड का कॉन्सेप्ट मशहूर था, जहां कंक्रीट के जंगलों और बढ़ती आबादी की वजह से शहरों का तापमान गांवों के मुकाबले 4-6 डिग्री ज्यादा रहता है। अब AI इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसी लीग में शामिल हो गया है। AI सर्विस देने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जिससे निकलने वाली गर्मी सीधे तौर पर स्थानीय वातावरण को प्रभावित कर रही है। 34 करोड़ लोगों की सेहत और एनर्जी बिल पर असर स्टडी के अनुसार, दुनिया भर में करीब 34.4 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं जो इन डेटा सेंटर्स की गर्मी की चपेट में हैं। खास बात यह है कि कई डेटा सेंटर्स शहरों से दूर बनाए जाते हैं, फिर भी इनका असर बड़े स्तर पर हो रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इससे न केवल लोगों की सेहत पर असर पड़ेगा, बल्कि घरों को ठंडा रखने के लिए बिजली की खपत और खर्च भी बढ़ जाएगा। स्पेन, मेक्सिको और ब्राजील में की गई स्टडी रिसर्चर्स ने स्पेन के अरागोन, मेक्सिको के बाहियो और ब्राजील के उत्तर-पूर्वी इलाकों का केस स्टडी के तौर पर इस्तेमाल किया। इन जगहों पर जहां-जहां डेटा सेंटर्स के क्लस्टर (समूह) बने हैं। वहां के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि AI का काम बढ़ते ही हीट यानी गर्मी बढ़ी और कार्बन एमिशन भी तेजी से बढ़ा है। भारी बिजली की खपत और फॉसिल फ्यूल बड़ी चुनौती ये खबर भी पढ़ें… भारत समेत दुनियाभर में इंटरनेट ठप होने का खतरा: जंग से होर्मुज में बिछीं केबल्स को नुकसान की आशंका; समुद्र में 97% ग्लोबल डेटा अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने से दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस के बाद अब इंटरनेट ठप होने का खतरा है। इसकी वजह यह है कि होर्मुज रूट से न केवल दुनिया का 20% कच्चा तेल और 25% LNG गुजरती है, बल्कि इस रास्ते के नीचे इंटरनेट केबल्स भी बिछीं हैं। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इलाका सिर्फ एनर्जी चोकपॉइंट नहीं, बल्कि एक डिजिटल चोकपॉइंट भी है। पूरी खबर पढ़ें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *