उम्र बनी दीवार, पहली कक्षा में दाखिले की गुहार

उम्र बनी दीवार, पहली कक्षा में दाखिले की गुहार

-चंद दिनों की कमी से लाखों बच्चे वंचित-अभिभावकों ने मांगी 90 दिन की राहत

-शिक्षा मंत्री का साफ संदेश, हर वर्ष छूट नहीं

पहली कक्षा में बच्चों के दाखिले Class One Admission को लेकर लाखों अभिभावक परेशान हैं। नियमानुसार पहली कक्षा में दाखिले के लिए एक जून तक बच्चे की आयु 6 वर्ष होनी चाहिए। हालांकि, कई ऐसे बच्चे हैं, जो कुछ दिनों या फिर चंद सप्ताह के कारण दाखिले से वंचित रह जा रहे हैं। अभिभावकों के दावों के अनुसार कर्नाटक Karnataka में ऐसे 2.3 लाख से ज्यादा बच्चे हैं। एक अभिभावक ने बताया कि उनकी बेटी इस वर्ष 1 जून को 6 वर्ष पूरे करने से 12 दिन कम हो जाएगी। सिर्फ 12 दिन छोटी होने के कारण उसे दाखिला नहीं मिलेगा।

90 दिनों की छूट की अपील

अभिभावकों के एक समूह ने सरकार और शिक्षा विभाग से 6 वर्ष के न्यूनतम आयु सीमा में 90 दिनों की छूट की अपील की है। अपनी मांगों को लेकर अभिभावक उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, स्कूल शिक्षा विभाग आयुक्त सहित स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा से भी मुलाकात कर गुहार लगा चुके हैं। मंत्री बंगारप्पा ने स्पष्ट किया है कि इस बार आयु सीमा में छूट संभव नहीं है।

… तो यह कभी खत्म नहीं होगा

उन्होंने कहा, बीते वर्ष आयु सीमा में छूट दी जा चुकी है। अगर हम हर वर्ष ऐसे ही छूट देते रहेंगे, तो यह कभी खत्म नहीं होगा। पिछले वर्ष छूट देते समय, हमने साफ कहा था कि यह सिर्फ 2025-26 शैक्षणिक के लिए है। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से, पहली कक्षा में दाखिले के लिए बच्चे की उम्र 1 जून तक 6 साल होनी चाहिए। इस पर दोबारा सोचने का कोई सवाल ही नहीं है।

भविष्य के बारे में सोचे सरकार

अभिभावक जयश्री ने कहा, शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में कई बच्चों को एलकेजी LKG से यूकेजी UKG में प्रमोट किया गया और वे अब पहली कक्षा में दाखिले के योग्य हैं। सरकार और शिक्षा विभाग को ऐसे बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए और उन्हें इंसाफ देना चाहिए।

इन बच्चों को ज्यादा दिक्कत

एक और अभिभावक ने कहा, नए नियम से पहले पहली कक्षा में दाखिले की उम्र 5 वर्ष 10 महीने से 6 वर्ष के बीच थी। अब, अगर बच्चे 5-6 दिन कम भी हो जाते हैं, तो दाखिला मिलने का कोई इंतजाम नहीं है। कई ऐसे बच्चे भी हैं, जो केवल एक दिन के कारण दाखिले से वंचित रह जाएंगे। नवंबर और दिसंबर में पैदा हुए बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है। हमारी मांग है कि तीन वर्ष की प्री-प्राइमरी पढ़ाई पूरी कर चुके सभी बच्चों को पहली कक्षा में दाखिला मिले और वो भी दाखिले की अंतिम तिथि से पहले।

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