कुवैत की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी (Kuwait oil refinery attack) पर एक दिन पहले ईरान ने ड्रोन से हमला किया था। अगले ही दिन कुवैत के साथ ब्रिटेन खड़ा हो गया।
ब्रिटेन ने अब अपना एक खास एयर डिफेंस सिस्टम कुवैत भेजने का ऐलान कर दिया है। यह सिर्फ एक सैन्य फैसला नहीं है, यह एक साफ संदेश है कि खाड़ी में हालात कितने गंभीर हो चुके हैं।
जिस रिफाइनरी पर हमला हुआ उसका नाम है मीना अल-अहमदी। यह कुवैत का एक बंदरगाह और तेल शोधन का बड़ा केंद्र है।
यहां से खाड़ी देशों का तेल दुनियाभर में जाता है। इस जगह पर हमला (Kuwait drone attack Hindi) मतलब सिर्फ कुवैत को नुकसान नहीं, पूरी दुनिया की तेल सप्लाई पर असर। माना जा रहा है कि यही वह मुख्य वजह है, जिसके चलते ब्रिटेन ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
ब्रिटिश PM ने कुवैत के अमीर से की बात
ड्रोन हमले के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कुवैत के अमीर शेख मिशाल अल-अहमद अल-सबाह को फोन किया। यह कोई रोजमर्रा की बातचीत नहीं थी। इसी फोन कॉल के बाद ब्रिटेन की ओर से ‘रैपिड सेंट्री’ एयर डिफेंस सिस्टम (Rapid Sentry air defence system) कुवैत भेजने का फैसला सामने आया।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने बताया कि स्टार्मर ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि रात के अंधेरे में की गई यह ड्रोन कार्रवाई पूरी तरह गैरजिम्मेदाराना थी। उन्होंने यह भी साफ किया कि ब्रिटेन कुवैत के साथ खड़ा है और खाड़ी में अपने सभी साझेदार देशों के साथ भी।
रैपिड सेंट्री क्या है, यह सिस्टम कैसे काम करता है?
रैपिड सेंट्री एक एयर डिफेंस सिस्टम है जिसे ड्रोन और छोटे हवाई खतरों को रोकने के लिए तैयार किया गया है। इस वक्त जब पूरे खाड़ी इलाके में ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ता जा रहा है, इस तरह के सिस्टम की जरूरत भी उतनी ही बढ़ गई है।
यह सिस्टम तेजी से तैनात किया जा सकता है और इसे खासतौर पर उन जगहों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है जहां बड़े और भारी एयर डिफेंस सिस्टम लगाना मुश्किल हो। तेल रिफाइनरी जैसी जगहों के लिए यह बिल्कुल सही हथियार है।
खाड़ी में यह पहला हमला नहीं है
पिछले कुछ महीनों में खाड़ी देशों में तनाव लगातार बढ़ा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे टकराव का असर अब सिर्फ उन तीन देशों तक नहीं रहा। कुवैत, सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देश भी इस आग की गर्मी महसूस कर रहे हैं।
मीना अल-अहमदी पर हमला इसी बड़े तनाव की एक कड़ी है। अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि यह हमला किसने किया, लेकिन खाड़ी में इस तरह के ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी अक्सर ईरान समर्थित गुटों पर आती रही है।
आगे क्या होगा?
ब्रिटेन का यह कदम बताता है कि पश्चिमी देश खाड़ी में अपने साझेदारों को अकेला नहीं छोड़ना चाहते। लेकिन सवाल यह है कि एयर डिफेंस सिस्टम भेजने से तनाव कम होगा या और बढ़ेगा।
जब एक तरफ हथियार बढ़ते हैं तो दूसरी तरफ भी जवाबी तैयारी होती है। खाड़ी में यह सिलसिला कहां जाकर रुकेगा, यह अभी किसी को नहीं पता। फिलहाल कुवैत की तेल रिफाइनरी के ऊपर एक नया पहरा लगने वाला है और दुनिया की नजरें इस पूरे इलाके पर टिकी हैं।


