कोर्ट के फैसले के बाद संतपुरा गुरुद्वारे में टकराव:यमुनानगर में कब्जे को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने, पुलिस की मौजूदगी में संत करमजीत ने संभाली जिम्मेदारी

कोर्ट के फैसले के बाद संतपुरा गुरुद्वारे में टकराव:यमुनानगर में कब्जे को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने, पुलिस की मौजूदगी में संत करमजीत ने संभाली जिम्मेदारी

यमुनानगर में फर्जी दस्तावेजों के मामले में कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार देर रात संतपुरा गुरुद्वारे में कब्जे को लेकर तनावपूर्ण हालात बन गए। देर रात तक दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने डटे रहे, जिसके चलते मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। करीब तीन घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में संत करमजीत अपने समर्थकों के साथ गुरुद्वारे में पहुंचे और प्रबंधन संभाल लिया। हालात बिगड़ते देख भारी पुलिस बल तैनात दरअसल, अतिरिक्त सत्र न्यायालय द्वारा संत जगमोहन सिंह को फर्जी दस्तावेजों के मामले में दोषी ठहराए जाने और सजा को बरकरार रखने के बाद गुरुद्वारे के प्रबंधन को लेकर विवाद गहरा गया। शुक्रवार रात संत करमजीत अपने समर्थकों और श्रद्धालुओं के साथ गुरुद्वारे में पहुंचे और ट्रस्ट के अधिकार के आधार पर प्रबंधन संभालने की कोशिश की। उस समय गुरुद्वारे के भीतर संत जगमोहन सिंह के समर्थक मौजूद थे, जिन्होंने इसका कड़ा विरोध किया और दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। आधी रात तक बनी रही तनाव की स्थिति पुलिस ने पहले संत जगमोहन के समर्थकों से गुरुद्वारा परिसर खाली करने की अपील की, लेकिन संगत ने कड़ा विरोध करते हुए परिसर में “जो बोले सो निहाल” के नारे लगाने शुरू कर दिए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सख्ती दिखानी पड़ी और समर्थकों को गुरुद्वारा परिसर से बाहर निकालना पड़ा। रात करीब 9 बजे से लेकर आधी रात तक गुरुद्वारे में तनाव का माहौल बना रहा। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने लगातार मोर्चा संभाले रखा और दोनों पक्षों को शांत रखने की कोशिश की। अंततः पुलिस ने संत जगमोहन के समर्थकों को गुरुद्वारे से बाहर निकालकर पुलिस वैन में बैठाया, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आई। 11 बजे संत करमजीत ने गुरुद्वारा पहुंच संभाला प्रबंधन इसके बाद संत करमजीत अपने समर्थकों के साथ करीब रात 11 बजे गुरुद्वारे में पहुंचे। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका और संगत को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुद्वारे की देखरेख अब ट्रस्ट के माध्यम से की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह ट्रस्ट में सेवादार के रूप में कार्य करेंगे और ट्रस्ट जो निर्णय करेगा, उसी के अनुसार गुरुद्वारे का संचालन होगा। संत करमजीत ने बताया कि वह करीब 25 वर्ष बाद संतपुरा गुरुद्वारे में आए हैं। उन्होंने संगत से सहयोग और समर्थन की अपील करते हुए कहा कि ट्रस्ट की ओर से युवतियों के लिए लॉ और पॉलिटेक्निक कॉलेज खोलने की योजना बनाई जा रही है और डेरे के हालात को पूरी तरह बदलने का प्रयास किया जाएगा। कोर्ट के आदेश पर की गई कार्रवाई वहीं मौके पर पहुंचे एएसपी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि 11 मार्च को कोर्ट का फैसला आया था और उसी फैसले को लागू कराने के लिए पुलिस प्रशासन गुरुद्वारे पहुंचा था। कोर्ट के आदेश के अनुसार ट्रस्ट के असली अधिकार संत करमजीत सिंह को दिए गए हैं और ट्रस्ट के मेंबरों को बरकरार रखने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस ने कोर्ट के आदेश के तहत ही कार्रवाई की है। किसी को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया, केवल गुरुद्वारा परिसर में मौजूद संगत को बाहर कर शांति बनाए रखने की अपील की गई थी। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य है।

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