UGC के नए नियमों पर SC के रोक लगाने के बाद प्रतीक भूषण का बड़ा बयान: लिखा-जाति संबंधी नियम…

UGC के नए नियमों पर SC के रोक लगाने के बाद प्रतीक भूषण का बड़ा बयान: लिखा-जाति संबंधी नियम…

SC Stays New UGC Rules: सुप्रीम कोर्ट ने UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर फिलहाल रोक लगा दी है। जिसके बाद कई जानी-मानी हस्तियों के बयान सामने आ रहे हैं।

पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर किया है। जिसमें उन्होंने लिखा, ”UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक। कहा जाति संबंधी नियम अस्पष्ट, गलत इस्तेमाल हो सकता है।”

13 जनवरी 2026 को किया गया नया नियम लागू

बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को एक नया नियम लागू किया। “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026” वाली हेडिंग के नीचे जो कुछ लिखा हुआ है उसकी वजह से ज्यादातर लोगों ने असहमति जताई। जिसके चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।

छात्रों ने किया प्रदर्शन

दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर इस नियम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। लखनऊ में भी छात्र सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सरकार पर भेदभावपूर्ण नीति अपनाने का आरोप लगाया और नियम को वापस लेने की मांग की।

शिकायतों के निपटारे के लिए 24×7 हेल्पलाइन की व्यवस्था

UGC का कहना है कि इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव और असमानता पर प्रभावी तरीके से रोक लगाना है। नियम के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को इक्विटी सेंटर (Equity Center), **इक्विटी स्क्वॉड ( Equity Squad) और इक्विटी कमेटी (Equity Committee) का गठन करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, शिकायतों के निपटारे के लिए 24×7 हेल्पलाइन की व्यवस्था भी की जाएगी। UGC ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी स्थिति में UGC संबंधित संस्थान की मान्यता रद्द कर सकता है या उसे मिलने वाला फंड रोक सकता है।

इन नियमों के खिलाफ जारी प्रदर्शन और विरोध में एक बड़ी चिंता भी शामिल है। आलोचकों का कहना है कि नए नियमों में ‘झूठी शिकायतों’ से निपटने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है और इक्विटी कमेटी में जनरल कैटेगरी के प्रतिनिधित्व का जिक्र भी नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि यदि विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है, तो कमेटी के सदस्य अपने पूर्वाग्रहों के आधार पर एकतरफा निर्णय कर सकते हैं। इस पहलू को नियमों में पर्याप्त रूप से नहीं देखा गया है।

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