गुजरात आम आदमी पार्टी की किसान विंग के पूर्व प्रेसिडेंट राजू करपड़ा ने पार्टी में सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने गुरुवार को पार्टी की सीनियर लीडरशिप पर गंभीर आरोप लगाए।
राजकोट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए करपड़ा ने दावा किया कि जब उन्हें और दूसरे किसान एक्टिविस्ट को बोटाद जिले में एक विरोध प्रदर्शन के बाद जेल में डाला गया था, तो पार्टी कानूनी मदद देने में नाकाम रही।
मेरे कई साथी हिरासत में थे, फिर भी पार्टी ने कुछ नहीं किया
करपड़ा ने कहा- मैं और कई साथी किसान हिरासत में थे, फिर भी सीनियर लीडरशिप पूरी तरह से इनएक्टिव रही। इस आश्वासन के बावजूद कि काबिल वकील हाई कोर्ट में हमारा केस लड़ेंगे, पहली सुनवाई में एक भी वकील पेश नहीं हुआ। ऐसा लगा जैसे पार्टी मेरा साथ देने के बजाय मुझे फंसाने की कोशिश कर रही है।
करपड़ा ने आगे आरोप लगाया कि राज्य के दो सीनियर नेताओं ने जानबूझकर उनकी हिरासत को लंबा खींचने की कोशिश की और पूर्व राज्य प्रेसिडेंट गोपाल इटालिया सहित प्रमुख विधायक उनसे जेल में मिलने नहीं गए।
सब कुछ बताया तो कई लोगों को जवाब देना मुश्किल होगा
करपड़ा ने कहा- अगर मैं सब कुछ बता दूंगा, तो कई लोगों को जवाब देना मुश्किल होगा। उन्होंने पार्टी के अंदरूनी कामकाज की भी आलोचना की, यह दावा किया कि गोपाल इटालिया और आप के जनरल सेक्रेटरी मनोज सोरठिया संगठन के अंदर भाजपा की ‘B-टीम’ के तौर पर काम कर रहे थे।
करपड़ा के मुताबिक, पार्टी के कुछ अंदरूनी लोग लगातार पार्टी के अंदर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे नेताओं को कमजोर कर रहे थे। एक वीडियो विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी एक पुरानी रिकॉर्डिंग को एडिट करके जेल में रहते हुए समय से पहले रिलीज कर दिया गया ताकि उनकी रेप्युटेशन खराब हो सके।
हदादाद गांव की घटना पर क्या बोले करपड़ा?
बोटाद जिले के हदादाद गांव की घटना पर करपड़ा ने अपने खिलाफ IPC की धारा 307 लगाने पर निराशा जताई, जबकि उन्होंने दावा किया था कि विपक्ष अपने मकसद में कामयाब हो गया है।
उन्होंने कहा कि उन्हें कानूनी नतीजों का डर नहीं है, लेकिन पार्टी की तरफ से उन्हें व साथी किसानों को सपोर्ट न करने की वजह से उन्हें सही रिप्रेजेंटेशन नहीं मिला।
पुलिस के साथ झड़प में बनाए गए मुख्य आरोपी
करपड़ा और प्रवीण राम को हदादाद गांव में किसानों और पुलिस के बीच हुई झड़प में मुख्य आरोपी बनाया गया था, जिसमें हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश और गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने जैसे आरोप लगाए गए थे।
इस महीने की शुरुआत में बोटाद डिस्ट्रिक्ट और सेशंस कोर्ट से जमानत मिलने से पहले दोनों ने करीब साढ़े तीन महीने जेल में बिताए। अपने राजनीतिक भविष्य को साफ करते हुए करपड़ा ने कहा कि वह अभी किसी पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं, लेकिन किसानों के लिए अकेले वकालत करते रहेंगे।
किसानों के लिए लड़ते रहेंगे करपड़ा
करपड़ा ने कहा- मैं किसानों का एक बड़ा सम्मेलन बुलाने और उनकी चिंताओं को बताने की योजना बना रहा हूं। अगर कोई सत्ताधारी पार्टी किसानों के लिए पॉजिटिव काम करती है, तो मैं भविष्य में उनके साथ जुड़ने पर विचार कर सकता हूं।
मूल रूप से सुरेंद्रनगर जिले के मुली तालुका के दुधई गांव के रहने वाले करपड़ा ने सबसे पहले एक फसल बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद ध्यान खींचा और बाद में जमीन की माप व बीमा के मुद्दों पर कई आंदोलनों का नेतृत्व किया।
वह 2021-22 में AAP में शामिल हुए और 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में चोटिला से चुनाव लड़ा, जिसमें वह 45,937 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। उन्होंने बुधवार को पार्टी से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया।


