सीतापुर में सोमवार शाम स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की धर्म यात्रा उन्नाव और हरदोई की सीमाओं से होते हुए प्राचीन तीर्थ नैमिषारण्य पहुंची। उनके आगमन पर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। यहां सबसे पहले व्यास आश्रम के युवराज रंजीत दीक्षित ने माल्यार्पण कर शंकराचार्य का स्वागत और सम्मान किया। इसके बाद धर्म यात्रा नैमिषारण्य स्थित प्रसिद्ध ललिता देवी मंदिर पहुंची, जहां शंकराचार्य ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालु और समर्थक मौजूद रहे और मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा। सायंकालीन बेला में शंकराचार्य पौराणिक आस्था के केंद्र चक्रतीर्थ पहुंचे। यहां उन्होंने चक्रतीर्थ का पूजन-अर्चन किया और आरती में भाग लिया। आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। शंकराचार्य के आगमन की सूचना पहले से होने के कारण प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया। तीर्थ क्षेत्र में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने चाक-चौबंद इंतजाम किए, जिससे यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। चक्रतीर्थ में पूजन और आरती के बाद धर्म यात्रा परमार्थ धाम आश्रम पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य की पादुका पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। हालांकि सूर्यास्त के बाद मौन धारण करने की परंपरा के चलते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया से बातचीत नहीं की। मीडिया द्वारा प्रतिक्रिया मांगे जाने पर भी उन्होंने मौन व्रत के कारण कोई बयान नहीं दिया। धर्म यात्रा के दौरान नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा क्षेत्र धार्मिक आस्था से सराबोर नजर आया।


