Packaged Water Industry: मिडिल ईस्ट में युद्द की स्थिति ने दुनियाभर में महंगाई बढ़ा दी है। इस समय दुनिया के अधिकतर देश तेल और गैस की महंगाई से जूझ रहे हैं। भारत में भी एलपीजी संकट गहरा रहा है। कमर्शियल और घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की सप्लाई शॉर्टेज से लोग परेशान हैं। इस बीच पानी की बोतल भी महंगी होने की आशंका है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते यह आशंका गहरा रही है। शुक्रवार को भी ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर से ऊपर ट्रेड करता दिखा है।
महंगे क्रूड ने बढ़ा दी मुसीबत
गर्मियों का सीजन शुरू हो गया है। इस सीजन में बोतलबंद पानी की जबरदस्त डिमांड रहती है। कंपनियां इस समय तेजी से बोतलबंद पानी का उत्पादन करती हैं। लेकिन महंगे क्रूड ऑयल ने कंपनियों की मुसीबत बढ़ा दी है। उनकी लागत बढ़ रही है। भारत में 5 अरब डॉलर का बोतलबंद पानी का कारोबार है। सप्लाई बाधाओं के चलते पैकेजिंग सामग्री जैसे- प्लास्टिक बोतल, कैप, लेबल और कार्डबोर्ड बॉक्स महंगे हो गए हैं। छोटे मैन्यूफैक्चरर्स पर इसका काफी ज्यादा असर पड़ रहा है।
पानी की बोतल क्यों हो रही महंगी?
क्रूड ऑयल के भाव बढ़ने से पॉलिमर महंगा हो गया है। प्लास्टिक बोतल बनाने के लिए पॉलिमर प्रमुख कच्चा माल होता है। इससे प्लास्टिक बोतल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमत 50% बढ़कर 170 रुपये प्रति किलो हो गई है। बोतल के ढक्कन यानी कैप की कीमत भी दोगुना से अधिक बढ़कर 0.45 रुपये प्रति पीस पर पहुंच गई है। इसके अलावा, लेबल, गत्ते के बॉक्स और चिपकने वाली टेप के दाम भी बढ़ गए हैं।
डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए बढ़ गई कीमतें
डिस्ट्रीब्यूटर्स को प्रति बोतल करीब 1 रुपये ज्यादा कीमत में पानी की बोतल पड़ रही है। करीब 2000 छोटे बोतलबंद पानी निर्माताओं ने लागत बढ़ने से दाम बढ़ा दिये हैं। आगे कुछ समय में इसमें 10% तक और इजाफा हो सकता है।
बोतलबंद पानी की रिटेल कीमतों पर अभी ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। बिस्लेरी, रिलायंस, एक्वाफिना और किनले जैसे बड़े ब्रांड बढ़ी हुई लागत का बोझ अभी खुद ही उठा रहे हैं। हालांकि, छोटे मैन्यूफैक्चरर्स के लिए यह बोझ उठाना मुश्किल हो रहा है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के अनुसार, 4-5 दिनों में रिटेल कीमतों में भी महंगाई का असर देखने को मिल सकता है। यानी आपको पानी की बोतल महंगी मिलेगी।


