LPG के बाद अब Premium Petrol और Industrial Diesel के दाम भी बढ़े, Iran War से भारत में महंगाई का खतरा बढ़ा!

LPG के बाद अब Premium Petrol और Industrial Diesel के दाम भी बढ़े, Iran War से भारत में महंगाई का खतरा बढ़ा!
ईरान युद्ध का असर अब सीधे भारत तक पहुंच चुका है और महंगाई की आग तेजी से भड़कने वाली है। तेल से लेकर खाने तक और रोजमर्रा की हर चीज पर इसका असर साफ दिखने लगा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि आम आदमी की जेब पर आने वाले दिनों में जबरदस्त चोट पड़ने वाली है। हम आपको बता दें कि सबसे बड़ा झटका ईंधन के मोर्चे पर लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने प्रीमियम श्रेणी के पेट्रोल की कीमतों में दो रुपए से ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी है। अलग अलग कंपनियों के उच्च गुणवत्ता वाले पेट्रोल में यह बढ़ोतरी 2.09 से लेकर 2.35 रुपए प्रति लीटर तक हुई है। हालांकि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल जस का तस रखा गया है ताकि आम जनता को तुरंत झटका न लगे, लेकिन यह राहत अस्थायी मानी जा रही है।
लेकिन असली खतरा यहां खत्म नहीं होता। औद्योगिक डीजल की कीमतों में तो विस्फोटक उछाल आया है। पहले जो डीजल सत्तासी रुपए के आसपास मिल रहा था, वह अब सीधे एक सौ नौ रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। हम आपको बता दें कि यह डीजल आम जनता नहीं बल्कि फैक्ट्रियों, खनन कंपनियों, निर्माण कार्य और बड़े बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल होता है। इसका मतलब साफ है कि उत्पादन लागत बढ़ेगी, माल ढुलाई महंगी होगी और अंत में हर चीज की कीमत आम आदमी से वसूली जाएगी। हम आपको यह भी याद दिला दें कि हाल ही में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी 60 रुपए की वृद्धि की गयी थी।

इसे भी पढ़ें: Petrol Price Hike: तेल की कीमतों पर ईरान युद्ध का पहला असर, प्रीमियम पेट्रोल 2.35 रुपये लीटर महंगा

देखा जाये तो इस पूरी आग की जड़ पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष है। ईरान और उसके विरोधियों के बीच बढ़ते टकराव ने कच्चे तेल के दाम को सौ डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है और कई बार यह एक सौ बीस डॉलर तक उछल चुका है। सबसे बड़ी चिंता उस समुद्री रास्ते को लेकर है जहां से दुनिया का लगभग बीस प्रतिशत तेल गुजरता है। इस रास्ते में जरा-सी रुकावट भी पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को हिला सकती है।
भारत के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85 से 90 प्रतिशत तेल विदेशों से मंगाता है। इनमें से लगभग आधा तेल उसी संवेदनशील समुद्री मार्ग से होकर आता है। जैसे ही वहां खतरा बढ़ता है, जहाजों का खर्च बढ़ता है, बीमा महंगा होता है और कुल मिलाकर भारत का आयात बिल आसमान छूने लगता है। विशेषज्ञ साफ चेतावनी दे रहे हैं कि तेल के दाम में हर दस डॉलर की बढ़ोतरी भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डालती है और महंगाई को तेज कर देती है।
सरकारी आकलन और भी डराने वाला है। यदि यह संकट कुछ महीनों तक जारी रहा तो भारत को हर साल तीस हजार से पचास हजार करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ सकता है। व्यापार घाटा हर तिमाही में पांच से दस अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। थोक महंगाई दर में भी 0.3 से 0.7 प्रतिशत तक उछाल संभव है। निर्यात पर भी दो से चार प्रतिशत तक असर पड़ने की आशंका है क्योंकि वैश्विक मांग कमजोर पड़ रही है और परिवहन लागत बढ़ रही है।
यही नहीं, लॉजिस्टिक खर्च जो सामान्य तौर पर देश की कुल अर्थव्यवस्था का तेरह से चौदह प्रतिशत होता है, वह बढ़कर पंद्रह प्रतिशत तक जा सकता है। इसका मतलब है कि हर सामान महंगा होगा चाहे वह अनाज हो, कपड़ा हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक सामान।
दूसरी ओर, महंगाई की मार अब शहरों तक भी साफ दिखने लगी है। खाने की डिलीवरी करने वाली कंपनियों ने भी अपने शुल्क बढ़ा दिए हैं। जोमैटो पर अब हर ऑर्डर पर पहले से ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे। यानी घर बैठे खाना मंगाना भी अब सस्ता नहीं रहने वाला।
दूसरी ओर सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं के बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है। तेल के दाम बढ़ने और वैश्विक अनिश्चितता के चलते निवेशकों का रुख बदल गया है। सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब छह प्रतिशत तक गिर गया जबकि चांदी में दस प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजार में भी सोना और चांदी के दामों में बड़ी कमजोरी आई है।
देखा जाये तो यह पूरा घटनाक्रम साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में आर्थिक दबाव और बढ़ेगा। रुपया दबाव में है, विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे हैं और ईंधन के साथ-साथ रसोई गैस तक महंगी हो गयी है। सवाल अब यह नहीं है कि महंगाई कितनी और बढ़ेगी? सवाल यह है कि महंगाई किस किस क्षेत्र को कहां तक प्रभावित करेगी? बहरहाल, यह स्पष्ट है कि ईरान युद्ध अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, यह सीधे भारतीय रसोई, जेब और जिंदगी तक पहुंच चुका है। आने वाले महीनों में इसका असर और ज्यादा तीखा होने वाला है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *