डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि डॉ. रोहित की पहचान में कुछ समय लग रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह हर ऑपरेशन के लिए नया सिम इस्तेमाल करता और काम पूरा होने के बाद उसे फेंक देता था। डीसीपी के मुताबिक यह जानकारी आहूजा अस्पताल के डॉ. सुरजीत सिंह ने पूछताछ में दी। डॉ. सुरजीत ने डॉ. रोहित से पूछा कि ऑपरेशन के बाद आपका नंबर क्यों नहीं चलता। इस पर डॉ. रोहित हंसते हुए बोला था, “तुम मुझे बेवकूफ समझते हो क्या? हर ऑपरेशन के बाद सावधानी रखनी पड़ती है। इसलिए हर बार नया सिम इस्तेमाल होता है।” डीसीपी ने बताया कि हैंडराइटिंग से मिलान न हो इसके लिए वह ऑपरेशन के बाद दवाइयां सादे पर्चे पर नहीं लिखता, सब कुछ टाइप किया जाता था। घर के भेदी ने लंका ढहाई
सूत्रों के मुताबिक आहूजा अस्पताल का एक कर्मचारी, जिसे हाल ही में निकाल दिया गया था, ने पुलिस को किडनी कांड की पूरी जानकारी दी। कर्मचारी का अस्पताल संचालकों से वेतन को लेकर विवाद हुआ था। अधिकारी ने बताया कि जिस दिन पारुल का ऑपरेशन हो रहा था, पुलिस को सूचना मिली थी, लेकिन तकनीकी और कानूनी कारणों से ऑपरेशन में तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया गया। मेरठ, देहरादून और नोएडा में छापेमारी
किडनी कांड का मेरठ कनेक्शन मिलने के बाद बुधवार को पुलिस की टीमें मेरठ, देहरादून और नोएडा गईं। डीसीपी ने बताया कि मेरठ में अस्पताल संचालकों से पूछताछ की गई और कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। इन जानकारियों के आधार पर जांच जारी है। जल्द ही फरार आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होगा। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि अस्पतालों को लेकर अक्सर शिकायतें मिलती हैं। मरीजों की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए कमिश्नरेट पुलिस ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए नोटिस जारी किया है। थाना स्तर पर यह नोटिस अस्पताल संचालकों को भेजे जा रहे हैं। निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा, ऐसा न करने पर कड़ी कार्रवाई होगी।


