US Iran Blockade Russia Response: अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी के फैसले को लेकर वैश्विक स्तर पर विरोध बढ़ता जा रहा है। ब्रिटेन के बाद अब रूस ने भी इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। क्रेमलिन ने साफ शब्दों में कहा है कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय बाजारों और वैश्विक स्थिरता पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव (Dmitry Peskov) ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, ”ऐसी कार्रवाइयों का अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना लगभग तय है।” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अभी कई पहलू स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए इस पर विस्तृत टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।
रूस की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से जुड़े समुद्री यातायात को रोकने के लिए नाकेबंदी का ऐलान किया है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम ईरान की तेल आय को सीमित करने के लिए उठाया जा रहा है, खासतौर पर तब जब हालिया कूटनीतिक बातचीत विफल हो गई है।
रूस की दोहरी भूमिका: विरोध भी, मध्यस्थता भी
जहां एक ओर रूस अमेरिकी योजना की आलोचना कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह खुद को इस संकट में संभावित मध्यस्थ के रूप में भी पेश कर रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत के दौरान इस संघर्ष में मदद और समाधान का रास्ता निकालने की पेशकश की है।
इसके अलावा, रूस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी सहयोग का प्रस्ताव दिया था, जिसमें ईरानी यूरेनियम को अपने पास रखने की पेशकश शामिल थी। हालांकि, यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया, लेकिन रूस ने कहा है कि वह भविष्य में भी मदद के लिए तैयार है।
बढ़ता तनाव और रूस-ईरान सहयोग
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस इस संघर्ष के दौरान ईरान को खुफिया जानकारी भी दे रहा है, जिसमें अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की जानकारी शामिल है। साथ ही, यूक्रेन युद्ध के अनुभव के आधार पर रूस ईरान को ड्रोन रणनीति में भी मदद कर रहा है, जिससे मध्य पूर्व में अमेरिकी और सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बनाया जा सके।
वैश्विक बाजार पर असर की आशंका
क्रेमलिन की सबसे बड़ी चिंता इस पूरे घटनाक्रम के आर्थिक असर को लेकर है। तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की बाधा सीधे वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में रूस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अमेरिका की यह रणनीति क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक अस्थिरता को भी बढ़ा सकती है।
कुल मिलाकर, ईरान को लेकर अमेरिका की आक्रामक नीति अब उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करती दिख रही है। ब्रिटेन के बाद रूस का विरोध इस बात का संकेत है कि यह संकट आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।


