हर मां-बाप अपने बच्चों के सुखद भविष्य के लिए सपने देखते हैं। वो उन्हें कुछ बनता देखना चाहते हैं। हमने भी अंतु को इंजीनियर बनाने का सपना देखा था लेकिन पता नहीं था कि इतनी जल्दी सपना टूट जाएगा। रीनू ने भी मां होने का फर्ज निभाया और अंतु को डाट दिया। हमें क्या पता था कि बेटा इतनी जल्दी हिम्मत हार जाएगा। वो हमें ही नहीं पूरे मोहल्ले को बिलखता छोड़कर गया है…! यह दर्द है अपने इकलौते बेटे को खोने वाले मेरठ के शास्त्री नगर सेक्टर-3 निवासी विनय चौहान का। 26 जनवरी को जब पूरा शहर गणतंत्र दिवस मना रहा था तो उनके घर में बड़ा हादसा हो गया। उनके 14 वर्षीय बेटे अनंत उर्फ अंतु ने केवल अपनी मां के डाटने पर फांसी लगा ली। पूरे परिवार पर मानों दुखों का पहाड़ टूट गया। काफी देर तक आस पड़ौस को भी यकीन नहीं हुआ कि हमेशा हंसता खिलखिलाता रहने वाला अंतु उन्हें छोड़कर चला गया है। आइए जानते हैं क्या हुआ था उस दिन
विनय चौहान ड्राइविंग करते हैं और सुबह ही ड्यूटी पर निकल जाते हैं। वह बताते हैं कि 26 जनवरी को वह ड्यूटी पर निकल गए। उनकी बेटी काव्यांजलि अपने स्कूल चली गई। घर पर उनकी पत्नी रीनु, पिता बिजेंद्र सिंह चौहान और बेटा अनंत उर्फ अंतु रह गए। अनंत ने पड़ौस में रहने वाले अपने दोस्त के साथ उसकी गाड़ी साफ कराई। घर आया तो उसकी मां ने डाट दिया। बोला- बाहर के सारे काम कराया कर, बस अपने घर का कोई काम मत कर लेना। मां रीनु से अनंत की खूब नोकझोंक हुई। पढ़ाई के लिए टोकते ही वह और ज्यादा नाराज हो गया और सीधे घर की दूसरी मंजिल पर पहुंच गया। पहले चाची और फिर बहन पहुंची मनाने
पहले मां रीनु की नाराजगी पतंग उड़ाने से थी। दो दिन तक उसने खूब पतंग उड़ाई। अब उसका प्रोग्राम दोस्तों के साथ पतंग उड़ाने का था। मां ने मना कर दिया और अंतु छत पर चला गया। चाची लता ने शोर सुना तो वह पहुंच गई। वह सीधे अंतु को मनाने दूसरी मंजिल पर आ गई। अंतु ने कहा कि वह पतंग उड़ाकर उतर आएगा। थोड़ी देर बाद बड़ी बहन काव्यांजलि उसे लेने पहुंची जो वह उससे भी लड़ गया। बोला- मेरा दिमांग खराब मत कर। चली जा। मैं पतंग उड़ाकर खुद नीचे आ जाऊंगा। दीपांशु चिल्लाया तो सब छत पर भागे
विनय बताते हैं कि कुछ देर बाद अंतु का दोस्त दीपांशु घर पर आया। उसने पूछा- आंटी अंतु कहा है? मां ने कहा- वह नाराज होकर छत पर चला गया है, तू ही उसको नीचे ले आ। दीपांशु जितनी तेजी से छत पर पहुंचा, उससे कहीं अधिक गति से वह वापस आया। बोला- आंटी देखो अंतु ने क्या कर लिया है। सब दूसर मंजिल पर बने कमरे पर पहुंचे तो अंदर फंदे के सहारे अंतु लटका था। मां रीनू ने शोर मचाया और दीपांशु की मदद से किसी तरह फंदा खोला। पड़ौसी की मदद से डाक्टर के ले गए आस पड़ोस के लोग अंतु को उठाकर पास ही डा. अशोक गर्ग के क्लीनिक पर पहुंचे। वहां से उन्हें लोकप्रिय अस्पताल भेज दिया गया। तब तक पिता विनय को केवल यही बताया गया था कि अंतु की तबियत बहुत खराब है। विनय उनसे पहले अस्पताल पहुंच गए और स्ट्रेचर लेकर इंतजार करने लगे। अंतु के पहुंचते ही उन्होंने नब्ज देखी और फफक पड़े। फिर भी स्टाफ अंदर आईसीयू में ले गया लेकिन 10 मिनट बाद उन्होंने अंतु की मौत की सूचना दे दी। दादा बोले- अंतु यह तूने क्या किया
विनय बताते हैं कि डा. अशोक गर्ग के क्लीनिक से लोकप्रिय ले जाते वक्त रास्ते में अंतु ने एक बार अपनी आंख खोली थी। उसके दादा बोले- अंतु यह तूने क्या कर लिया। वह उसे जगाए रखने का प्रयास कर रहे थे लेकिन अचानक अंतु की आंख बंद हो गईं और वह रोने लगे। अपने भाई को ढूंढ रहीं काव्यांजलि की आंखे जिस वक्त यह सब हुआ, उससे कुछ देर पहले ही काव्यांजलि स्कूल से लौटी थी और घर के बाहर बैठी मोबाइल चला रही थी। वह भी भाई को मनाने गई लेकिन भाई नहीं माना। अंतु को खो जाने का एहसास काव्यांजलि को है। वह उस दृश्य को बताते बताते सहम जाती है। काव्यांजलि कहती है कि उसका अपने भाई से कभी कोई झगड़ा नहीं होता था। मम्मी-पापा भी घर पर नहीं होते थे तो दोनों एक दूसरे का पूरा ध्यान रखते थे। 14 फरवरी को उसका जन्म दिन था। उसे सेलिब्रेट करने की योजना बना रहे थे, उससे पहले ही वो चला गया। उस दिन नहीं जला किसी घर में चूल्हा
पड़ोसी अमित गुप्ता बताते हैं कि अंतु को सभी पसंद करते थे। वह हमेशा हर किसी से हंसकर बात करता था। जिस दिन उसकी मौत हुई, उस दिन शायद ही मोहल्ले के किसी घर में चूल्हा जला हो। कोई उसे भुला नहीं पा रहा है। ऐसा लगता है कि वह अभी खिलखिलाकर सामने आ जाएगा। उसने यह कदम क्यों उठाया, यह समझ से परे है। अन्य पड़ौसी राजीव बताते हैं कि अंतु का हर किसी से लगाव था। उनका बेटा उसका दोस्त था जो उसे बार बार याद करता है। वह ऐसे सवाल करता है, जिनका उनके पास जवाब नहीं है।


