इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) गुरुवार को अपनी स्थापना के 43 साल पूरे कर रहा है। 12 फरवरी 1983 को दिल्ली एम्स की तर्ज पर स्थापित यह संस्थान आज बिहार ही नहीं, बल्कि पूर्वी भारत के एक प्रमुख सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। स्थापना दिवस पर संस्थान परिसर में एक भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के जाने-माने चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल होंगे। स्थापना दिवस समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) बिन्दे कुमार पिछले 1 साल की उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर मैगजीन का विमोचन भी किया जाएगा, जिसमें शोध और नवाचारों का संकलन होगा।
मुख्य अतिथि की ओर से एक विशेष हेल्थ एग्जीबिशन का उद्घाटन होगा, जिसमें चिकित्सा तकनीक में आए नवीन बदलावों को दिखाया जाएगा। 4 दशकों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की संस्थान ने पिछले 4 दशकों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। यह बिहार का पहला सरकारी संस्थान बना, जहां सफलतापूर्वक किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट की शुरुआत की गई। आज इसका नेफ्रोलॉजी विभाग राज्य के सबसे उन्नत केंद्रों में से एक माना जाता है। क्षेत्रीय कैंसर संस्थान से कैंसर मरीजों को आधुनिक रेडियोथेरेपी और सर्जरी की सुविधा मिल रही है। इसी तरह, क्षेत्रीय चक्षु संस्थान नेत्र रोगियों के लिए अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध करा रहा है। एक विश्वविद्यालय के रूप में आईजीआईएमएस हर वर्ष सैकड़ों डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित कर स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बना रहा है।
मरीजों को कम लागत पर बेहतर इलाज देना उद्देश्य समारोह में एम्स के कार्यकारी निदेशक और सीईओ प्रो. (ब्रिगे.) डॉ. राजू अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। वहीं, 12वें स्थापना दिवस व्याख्यान के मुख्य वक्ता पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रो. (डॉ.) मनीष राठी होंगे। आईजीआईएमएस के अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि संस्थान की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बिहार और आसपास के राज्यों के मरीजों को कम लागत पर उच्च स्तरीय इलाज उपलब्ध कराना था। बिहार सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्थान के रूप में स्थापित आईजीआईएमएस को राज्य विधानमंडल के अधिनियम की ओर से विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) गुरुवार को अपनी स्थापना के 43 साल पूरे कर रहा है। 12 फरवरी 1983 को दिल्ली एम्स की तर्ज पर स्थापित यह संस्थान आज बिहार ही नहीं, बल्कि पूर्वी भारत के एक प्रमुख सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। स्थापना दिवस पर संस्थान परिसर में एक भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के जाने-माने चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल होंगे। स्थापना दिवस समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) बिन्दे कुमार पिछले 1 साल की उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर मैगजीन का विमोचन भी किया जाएगा, जिसमें शोध और नवाचारों का संकलन होगा।
मुख्य अतिथि की ओर से एक विशेष हेल्थ एग्जीबिशन का उद्घाटन होगा, जिसमें चिकित्सा तकनीक में आए नवीन बदलावों को दिखाया जाएगा। 4 दशकों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की संस्थान ने पिछले 4 दशकों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। यह बिहार का पहला सरकारी संस्थान बना, जहां सफलतापूर्वक किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट की शुरुआत की गई। आज इसका नेफ्रोलॉजी विभाग राज्य के सबसे उन्नत केंद्रों में से एक माना जाता है। क्षेत्रीय कैंसर संस्थान से कैंसर मरीजों को आधुनिक रेडियोथेरेपी और सर्जरी की सुविधा मिल रही है। इसी तरह, क्षेत्रीय चक्षु संस्थान नेत्र रोगियों के लिए अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध करा रहा है। एक विश्वविद्यालय के रूप में आईजीआईएमएस हर वर्ष सैकड़ों डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित कर स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बना रहा है।
मरीजों को कम लागत पर बेहतर इलाज देना उद्देश्य समारोह में एम्स के कार्यकारी निदेशक और सीईओ प्रो. (ब्रिगे.) डॉ. राजू अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। वहीं, 12वें स्थापना दिवस व्याख्यान के मुख्य वक्ता पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रो. (डॉ.) मनीष राठी होंगे। आईजीआईएमएस के अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि संस्थान की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बिहार और आसपास के राज्यों के मरीजों को कम लागत पर उच्च स्तरीय इलाज उपलब्ध कराना था। बिहार सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्थान के रूप में स्थापित आईजीआईएमएस को राज्य विधानमंडल के अधिनियम की ओर से विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है।


